
अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद कच्चा तेल 79 डॉलर प्रति बैरल से नीचे, भारत को राहत
स्विट्जरलैंड में पहले दौर की बातचीत खत्म होने पर ईरान ने तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर छूट मिलने की बात कही, जिससे ब्रेंट क्रूड 1.9% टूटकर 79.04 डॉलर पर आ गया और वैश्विक आपूर्ति का जोखिम घटा।
सोमवार को स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच उच्च-स्तरीय वार्ता का पहला दौर समाप्त होने के बाद वैश्विक तेल बाजार में गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 1.53 डॉलर (1.9%) घटकर 79.04 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) का अगस्त अनुबंध 55 सेंट गिरकर 75.30 डॉलर पर आ गया। कारोबार की शुरुआत में ब्रेंट 82.30 डॉलर तक चढ़ गया था, जिसकी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान पर फिर से हमले की धमकी और तेहरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य बंद करने की घोषणा थी।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराकची ने वार्ता के बाद कहा कि उनके देश को तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात के लिए छूट, कुछ जब्त संपत्तियों की रिहाई और पुनर्निर्माण योजना शुरू करने की मंजूरी मिली है। इस घोषणा ने बाजार की आपूर्ति संबंधी आशंकाओं को कम किया, क्योंकि इससे ईरान के लगभग 15 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चे तेल की वैश्विक बाजार में वापसी की संभावना बनी। विश्लेषकों के अनुसार, पिछले सप्ताह ही तेल की कीमतों में 8% से अधिक की गिरावट आई थी, जो खाड़ी में फंसे टैंकरों से तेल की रिहाई और अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील की उम्मीदों से प्रेरित थी। इस बीच, एशियाई शेयर बाजारों में तेजी रही—जापान का निक्की 1.9% और दक्षिण कोरिया का सूचकांक 2.6% चढ़ा—जबकि सोने की कीमतों में मामूली सुधार हुआ, क्योंकि तेल की गिरावट ने मुद्रास्फीति और सख्त मौद्रिक नीति की चिंताओं को कुछ हद तक कम किया।
क्षेत्रीय आपूर्ति के मोर्चे पर, ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी के प्रमुख हामिद बोवार्द ने बताया कि सोमवार से अब तक 2.5 करोड़ बैरल से अधिक ईरानी तेल ‘वर्चुअल नाकेबंदी रेखा’ को पार कर चुका है। साथ ही, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और इराक ने पिछले सप्ताह ग्राहकों को अतिरिक्त तेल की पेशकश की है। इराक ने अपने कच्चे तेल उत्पादन को धीरे-धीरे बढ़ाकर 42 से 43 लाख बैरल प्रतिदिन करने की योजना की घोषणा की है। इन घटनाक्रमों ने अल्पकालिक आपूर्ति जोखिम को कम किया है, हालांकि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही में रविवार को भारी गिरावट दर्ज की गई थी, जब ईरान ने अंतरिम शांति समझौते के उल्लंघन का हवाला देते हुए इसे फिर से बंद करने की बात कही।
हालांकि, स्थायी समझौते की राह आसान नहीं है। लेबनान में युद्धविराम के एक दिन बाद ही इजरायली हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हो गई, और आईएनजी के विश्लेषकों ने 60 दिनों की संघर्षविराम अवधि के दौरान हिंसा भड़कने के ‘बहुत वास्तविक जोखिम’ की चेतावनी दी है। भारत जैसे बड़े तेल आयातक के लिए, कीमतों में यह नरमी चालू खाता घाटे और मुद्रास्फीति के दबाव को कम कर सकती है, बशर्ते होर्मुज मार्ग खुला रहे और राजनयिक प्रगति जारी रहे। अगला ठोस पड़ाव अमेरिका-ईरान उच्च-स्तरीय समिति की बैठक और 60 दिनों की विस्तारित संघर्षविराम अवधि के दौरान जमीनी हालात का आकलन होगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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स्विट्ज़रलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता के बाद, तेहरान द्वारा कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात के लिए छूट प्राप्त करने की घोषणा से तेल की कीमतें गिर गईं, जिससे आपूर्ति की चिंताएँ कम हुईं। शुरुआती उछाल ट्रंप की धमकियों और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने के कारण था, लेकिन कूटनीतिक सफलता ने बाजार में शांति ला दी।
स्विट्ज़रलैंड में अमेरिका-ईरान वार्ता समाप्त होने के बाद सोमवार को तेल की कीमतें गिर गईं, ब्रेंट 80 डॉलर से नीचे आ गया। तेहरान द्वारा निर्यात छूट प्राप्त करने की घोषणा ने वैश्विक आपूर्ति व्यवधान की चिंताओं को कम किया। तनाव और धमकियों के बीच कीमतें पहले बढ़ी थीं, लेकिन वार्ता के बाद निचले स्तर पर आ गईं।
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