
पेनल्टी शूटआउट में जर्मनी का सफ़ाया, पैराग्वे ने रचा विश्व कप का सबसे बड़ा उलटफेर
चार बार के विश्व विजेता जर्मनी को पहली बार विश्व कप में पेनल्टी पर हार झेलनी पड़ी, जबकि पैराग्वे 2010 के बाद पहली बार नॉकआउट मुकाबला जीतकर अंतिम-16 में पहुंचा।
बोस्टन के जिलेट स्टेडियम में सोमवार रात फुटबॉल की दुनिया ने एक ऐसा दृश्य देखा जो विश्व कप इतिहास में दर्ज हो गया। 120 मिनट तक 1-1 की बराबरी के बाद पेनल्टी शूटआउट में पैराग्वे ने जर्मनी को 4-3 से हराकर अंतिम-16 में जगह बना ली। यह जर्मनी की विश्व कप में पहली पेनल्टी हार थी, जबकि पैराग्वे के लिए यह किसी नॉकआउट मैच में पहला गोल और 2010 के बाद पहली जीत थी। गोलकीपर ऑरलैंडो गिल ने काई हैवर्ट्ज़ और निक वोल्टेमेड के पेनल्टी बचाकर मैच का रुख पलट दिया, और जोनाथन टा के चूकने के बाद जोसे कनाले ने निर्णायक किक लगाकर पूरे पैराग्वे को जश्न में डुबो दिया।
मैच की कहानी दो विपरीत शैलियों की टक्कर थी। जर्मनी ने 75 प्रतिशत गेंद पर कब्ज़ा रखा और 21 शॉट लगाए, लेकिन पैराग्वे की संगठित रक्षा ने उन्हें बार-बार नाकाम किया। 42वें मिनट में जूलियो एनसिसो ने मटियास गलार्ज़ा के क्रॉस पर हेडर से पैराग्वे को बढ़त दिलाई। दूसरे हाफ में जर्मनी ने वापसी की: 54वें मिनट में फ्लोरियन विर्ट्ज़ के क्रॉस पर हैवर्ट्ज़ ने हेडर से बराबरी कर ली। अतिरिक्त समय में जर्मनी को एक गोल मिला जिसे वीएआर ने गिल के साथ बाधा डालने के कारण रद्द कर दिया, जिससे जर्मन खेमे में भारी निराशा फैली।
यह हार जर्मनी के लिए एक गहरे संकट का प्रतीक बन गई है। 2014 में विश्व चैंपियन बनने के बाद से टीम लगातार तीसरे विश्व कप में 16 के दौर से पहले ही बाहर हो गई है—2018 और 2022 में तो ग्रुप चरण से ही विदाई हो गई थी। जर्मन मीडिया ने इसे “शर्मनाक” और “दुःस्वप्न” करार दिया, जबकि कोच यूलियन नागल्समान ने इस्तीफे से इनकार करते हुए कहा कि अगर संघ चाहे तो वे यूरो 2028 तक टीम का नेतृत्व करने को तैयार हैं। दूसरी ओर, दक्षिण अमेरिकी मीडिया ने पैराग्वे की “गारा गुआरानी” (गुआरानी जुझारूपन) की जमकर तारीफ की। ब्राज़ील के समाचार आउटलेट्स ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस हार के साथ ब्राज़ील एकमात्र पाँच बार का विश्व विजेता बना रहेगा।
भारतीय समयानुसार मंगलवार तड़के खेले गए इस मुकाबले ने एशियाई फुटबॉल प्रशंसकों को भी चौंका दिया। इंडोनेशियाई और भारतीय मीडिया ने इसे “बड़ा उलटफेर” बताया और गिल के प्रदर्शन को सुर्खियों में रखा। पैराग्वे के राष्ट्रपति सैंटियागो पेन्या ने तो ऐतिहासिक जीत के जश्न में अगले दिन राष्ट्रीय अवकाश घोषित कर दिया। कोच गुस्तावो अल्फारो ने अपने खिलाड़ियों को “26 योद्धा जो मैदान में उतरे और 26 किंवदंती बनकर लौटे” कहकर भावुक श्रद्धांजलि दी।
अब पैराग्वे का सामना 4 जुलाई को फिलाडेल्फिया में फ्रांस और स्वीडन के बीच होने वाले मुकाबले के विजेता से होगा। यह टीम 2010 के बाद पहली बार विश्व कप के अंतिम-16 में पहुँची है, और उसकी नज़रें क्वार्टर फाइनल में जगह बनाने पर टिकी हैं, जो उसका अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन होगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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पैराग्वे ने जर्मनी को हराकर राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया। सरकार अप्रत्याशित जीत का जश्न मनाती है, राष्ट्रीय टीम की लड़ाई की भावना पर जोर देती है। ध्यान राष्ट्रीय गर्व और खुशी पर है, मैच के विवरण पर नहीं।
ऑरलैंडो गिल की कहानी, पैराग्वे के गोलकीपर जो जर्मनी के खिलाफ पेनल्टी बचाकर राष्ट्रीय नायक बन गए। कथा उनके व्यक्तिगत बलिदान और विनम्र पृष्ठभूमि पर जोर देती है, जीत को दृढ़ता की कहानी में बदल देती है। जर्मनी की विफलता का उल्लेख केवल एक ऐतिहासिक तथ्य के रूप में किया गया है।
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