
अमेरिका नहीं चाहता इज़राइल की सैन्य भागीदारी, लेकिन नेतन्याहू सरकार ने ईरान पर तीसरे हमले की दी चेतावनी
इज़राइली सूत्रों के अनुसार वाशिंगटन संघर्ष पर नियंत्रण खोने के डर से सहयोगी को दूर रखना चाहता है, जबकि तेल अवीव ने स्वतंत्र कार्रवाई की तैयारी का सार्वजनिक संकेत दिया है।
दो इज़राइली सूत्रों ने सीएनएन को बताया कि ट्रंप प्रशासन फ़िलहाल नहीं चाहता कि इज़राइल ईरान पर अमेरिकी हमलों में शामिल हो। सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू वास्तव में इन हमलों में भाग लेना चाहते हैं, लेकिन अमेरिका इस समय इज़राइल की संलिप्तता से बच रहा है। यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है जब हाल ही में होर्मुज़ जलडमरूमध्य में एक व्यापारिक जहाज़ पर ईरानी हमले के बाद अमेरिका और ईरान के बीच फिर से सैन्य कार्रवाइयाँ हुई हैं।
वाशिंगटन की ओर से इस दावे का खंडन किया गया है। फ़ॉक्स न्यूज़ से बात करते हुए एक अमेरिकी अधिकारी ने इसे “फ़र्ज़ी ख़बर” बताया और कहा कि ऑपरेशन मिडनाइट हैमर और ऑपरेशन एपिक फ़्यूरी की सफलता में इज़राइल का योगदान रहा है तथा दोनों देशों के बीच निकट समन्वय जारी है। इज़राइली विश्लेषक नदाव एयाल के अनुसार, सार्वजनिक रूप से इज़राइल ईरान पर हमले के लिए उत्सुक दिख रहा है, लेकिन निजी तौर पर सूत्र इसके विपरीत संकेत दे रहे हैं। उनका कहना है कि किसी भी इज़राइली हमले के जवाब में ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल हमले होंगे, और आगामी चुनावों को देखते हुए घरेलू राजनीतिक परिणाम नेतन्याहू को नई लड़ाई से हिचकिचाने पर मजबूर कर सकते हैं।
तेल अवीव ने सार्वजनिक रूप से आक्रामक रुख़ अपनाया है। रक्षा मंत्री इज़राइल काट्ज़ ने वायुसेना के पायलटों के दीक्षांत समारोह में कहा कि इज़राइली रक्षा बल (आईडीएफ़) हाई अलर्ट पर है और हवाई वर्चस्व हासिल करने तथा ख़तरों को ख़त्म करने के लिए “तीसरी बार भी” स्वतंत्र इज़राइली हमला करने को तैयार है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी चेतावनी दी कि ईरान के ख़िलाफ़ अभियान समाप्त नहीं हुआ है और तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इज़राइल ने जून 2025 में ईरान के ख़िलाफ़ बड़ा अभियान शुरू किया था, जिसमें बाद में अमेरिका भी शामिल हुआ और फ़ोरदो, नतांज़ तथा इस्फ़हान परमाणु केंद्रों पर हमले किए।
ईरान ने हालिया अमेरिकी हमलों के जवाब में बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और क़तर स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया, जिसकी खाड़ी देशों ने निंदा की। भारतीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन पूर्ण-स्तरीय युद्ध की ओर लौटने से बचना चाहता है और अधिकतम जो क़दम उठाने को तैयार है, वह ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू करना है। इज़राइली सूत्रों का प्रमुख आकलन यही है कि राष्ट्रपति ट्रंप बड़े पैमाने के युद्ध में वापसी के इच्छुक नहीं हैं।
इस बीच, ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि ईरान ने बातचीत जारी रखने का अनुरोध किया है और अमेरिका इसके लिए राज़ी हो गया है, लेकिन युद्धविराम “समाप्त” हो चुका है। कूटनीतिक पहल जारी रहने के बावजूद सैन्य तनाव बना हुआ है। इज़राइली विश्लेषकों का मानना है कि यदि ट्रंप सीधे तौर पर नेतन्याहू से शामिल होने की माँग करते हैं तो इज़राइल के लिए मना करना कठिन होगा, लेकिन अभी इसके लिए कोई वास्तविक उत्साह नहीं दिखता। फ़िलहाल, स्थिति अनिश्चित बनी हुई है और सभी पक्षों की ओर से सार्वजनिक बयानबाज़ी और निजी आकलन के बीच अंतर स्पष्ट है।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.10 | neutral |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
Iran denounces Israel's warlike ambitions and emphasizes that the United States is restraining Netanyahu.
It uses Israeli sources to legitimize its narrative of an aggressive Israel and a cautious America.
It omits the context of Israeli military readiness and US-Israel coordination, which emerge in the Atlantic bloc.
Israel asserts its readiness and close cooperation with the United States, downplaying any divergence.
It emphasizes official Israeli and US statements to project an image of unity and capability.
It omits sources indicating the American refusal to involve Israel, present in the Iranian and Russian blocs.
Russia reports the reasons for the American refusal with detachment, without taking sides.
It relies on an external source (CNN) to confer credibility and neutrality.
It omits the warlike Israeli statements and military readiness, present in the Atlantic bloc.
Latin America reports the news of the American refusal with a neutral tone, highlighting Trump's caution.
It uses Israeli sources to give weight to the news, but without adding commentary.
It omits the Israeli perspective of readiness and coordination, present in the Atlantic bloc.
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