
कोरियाई प्रायद्वीप पर एक साथ सैन्य प्रदर्शन: उत्तर कोरिया ने दागीं मिसाइलें, दक्षिण कोरिया ने 5 लाख ‘ड्रोन योद्धा’ तैयार करने की घोषणा की
किम जोंग उन ने 90 किमी तक मार करने वाली रॉकेट प्रणाली और विशेष हथियार का परीक्षण देखा, जबकि सियोल ने सभी सैनिकों को ड्रोन संचालन में प्रशिक्षित करने की योजना बताई।
26 जून 2026 को कोरियाई प्रायद्वीप पर दो समानांतर सैन्य घटनाक्रम सामने आए। उत्तर कोरिया की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, नेता किम जोंग उन ने एक साथ तीन प्रमुख हथियार प्रणालियों के परीक्षण का निरीक्षण किया, जिनमें 90 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली उन्नत 240 मिमी मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर प्रणाली, सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल के लिए एक ‘विशेष अभियान’ वारहेड, और 65 किमी तक की विस्तारित रेंज वाले 155 मिमी स्व-चालित हॉवित्जर तोप के गोले शामिल थे। इसी दिन, दक्षिण कोरिया के रक्षा मंत्रालय ने घोषणा की कि वह अपने सभी पांच लाख सैन्य कर्मियों को ‘ड्रोन योद्धा’ के रूप में प्रशिक्षित करेगा और 2030 तक 20,000 से अधिक कम लागत वाले आत्मघाती ड्रोन खरीदेगा।
उत्तर कोरियाई पक्ष ने इन परीक्षणों को अपनी ‘घातक और विनाशकारी आक्रामक मुद्रा’ को मजबूत करने की नीति का हिस्सा बताया। केंद्रीय समाचार एजेंसी के हवाले से किम जोंग उन ने कहा कि ‘दुश्मनों को लगातार बेचैनी और भय में रखना युद्ध निरोधक क्षमता के प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण पहलू है।’ एजेंसी ने स्पष्ट किया कि विशेष वारहेड का उद्देश्य दुश्मन के हवाई अड्डों, बंदरगाहों और बिजली सुविधाओं जैसे प्रमुख ठिकानों को ‘घातक क्षति’ पहुंचाना है। दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्री आहन ग्यु-बैक ने सियोल में कहा कि यूक्रेन और मध्य पूर्व के युद्धों ने दिखाया है कि बड़ी संख्या में संचालित कम लागत वाले ड्रोन ‘युद्ध की प्रकृति को मौलिक रूप से बदल रहे हैं।’ उन्होंने चेतावनी दी कि उत्तर कोरिया भी मानवरहित प्रणालियां विकसित कर रहा है, जिससे दक्षिण की सैन्य और नागरिक सुविधाओं के लिए खतरा बढ़ रहा है।
इन घटनाक्रमों के पीछे के कारकों का विश्लेषण करते हुए, सियोल स्थित सैन्य विशेषज्ञों ने कहा कि उत्तर कोरिया का ताजा परीक्षण कोरियाई युद्ध की 76वीं वर्षगांठ के आसपास किया गया, जो दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल के कुछ हिस्सों को अपनी मारक क्षमता में लाने की क्षमता का प्रदर्शन है। स्टॉकहोम अंतर्राष्ट्रीय शांति अनुसंधान संस्थान के अनुमानों के अनुसार, उत्तर कोरिया के पास लगभग 60 परमाणु हथियार होने का अनुमान है और वह अपने शस्त्रागार का तीव्र गति से विस्तार कर रहा है। दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया की ड्रोन पहल 2022 की उस घटना की पृष्ठभूमि में आई है, जब उत्तर कोरिया के पांच छोटे ड्रोन सियोल के राष्ट्रपति कार्यालय के ऊपर नो-फ्लाई जोन तक घुस आए थे और दक्षिण कोरियाई सेना उन्हें मार गिराने में विफल रही थी। दक्षिण कोरियाई रक्षा मंत्रालय ने यह भी संकेत दिया कि वह अमेरिकी लुकास प्रणाली पर आधारित स्वदेशी लंबी दूरी का के-लुकास ड्रोन तेजी से विकसित करेगा, जो ईरानी शाहेद-136 ड्रोन से प्रेरित है।
क्षेत्रीय शक्तियों की स्थिति को देखें तो, वाशिंगटन और टोक्यो ने प्योंगयांग के लगातार हथियार परीक्षणों पर चिंता व्यक्त की है, जबकि बीजिंग और मॉस्को ने प्रायद्वीप पर स्थिरता का आह्वान किया है। दक्षिण कोरियाई विश्लेषकों के अनुसार, रूस के साथ गहराते सैन्य संबंधों के कारण उत्तर कोरिया की ड्रोन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, क्योंकि यूक्रेन युद्ध में तैनात उत्तर कोरियाई सैनिकों को बड़े पैमाने पर ड्रोन युद्ध का प्रत्यक्ष अनुभव मिल रहा है। इस बीच, दक्षिण कोरिया की नई ड्रोन नीति पूर्व राष्ट्रपति यून सुक येओल के कार्यकाल में हुए विवादास्पद ड्रोन संचालन के बाद कमान संरचना को विकेंद्रीकृत करने का भी प्रयास है, जिन्हें हाल ही में एक अदालत ने उत्तर कोरिया में ड्रोन घुसपैठ के आदेश देने के लिए 30 साल की जेल की सजा सुनाई है।
फिलहाल, कोरियाई प्रायद्वीप पर तनाव बना हुआ है और दोनों पक्षों के बीच कोई शांति संधि नहीं होने के कारण तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति कायम है। उत्तर कोरिया ने अपनी पंचवर्षीय रक्षा योजना के तहत और अधिक हथियार प्रणालियों के परीक्षण और सीमा पर तैनाती का संकेत दिया है, जबकि दक्षिण कोरिया 2029 तक 110,000 ड्रोन के उत्पादन और सभी सैन्य इकाइयों में उनके वितरण की तैयारी कर रहा है। कूटनीतिक वार्ता फिलहाल ठप है, और आने वाले महीनों में दोनों ओर से सैन्य आधुनिकीकरण की गति और तेज होने की उम्मीद है।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.20 | neutral |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.60 | critical |
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | +0.70 | aligned |
Russia projects its own security narrative onto the Korean peninsula, presenting the tests as an inevitable reaction to Western pressure.
Uses the technique of projection: attributes to the opponent (US) the same actions that are criticized, creating symmetry.
The West condemns the tests as an unacceptable provocation and legitimizes the South Korean response as defensive.
Builds a hierarchy of threats where North Korea is the main danger, thus justifying South Korean countermeasures.
Iran sides with Pyongyang, celebrating its defiance of the US-led world order and denouncing sanctions.
Adopts victimism: presents North Korea as a target of unjust aggression, turning the tests into an act of legitimate self-defense.
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