
उत्तर कोरिया ने लंबी दूरी की हथियार प्रणालियों का परीक्षण किया, 'घातक आक्रामक मुद्रा' पर जोर
किम जोंग उन ने 90 किमी तक मार करने वाली रॉकेट प्रणाली और विशेष हथियार का परीक्षण देखा, दक्षिण कोरिया और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता का प्रदर्शन किया।
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने 25 जून 2026 को आधुनिकीकृत लंबी दूरी की हथियार प्रणालियों के परीक्षणों की निगरानी की, जिनमें 90 किलोमीटर की मारक क्षमता वाली 240 मिमी मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर प्रणाली, सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल के लिए एक 'विशेष अभियान' हथियार, और 155 मिमी स्व-चालित हॉवित्जर के विस्तारित रेंज के गोले शामिल थे। सरकारी कोरियन सेंट्रल न्यूज़ एजेंसी (केसीएनए) के अनुसार, किम ने परिणामों पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि सैन्य नीति का लक्ष्य केवल रक्षात्मक क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि 'घातक और विनाशकारी आक्रामक मुद्रा' को मजबूत करना है ताकि कोई शत्रु सामना करने का साहस न कर सके।
केसीएनए के बयानों के मुताबिक, परीक्षणों का उद्देश्य दक्षिणी सीमा पर अग्नि क्षमता में बदलाव लाना है, और 'विशेष अभियान' हथियार का लक्ष्य हवाई अड्डों, बंदरगाहों और बिजली सुविधाओं जैसे प्रमुख ठिकानों को घातक क्षति पहुंचाना है। उत्तर कोरियाई नेतृत्व ने शत्रुओं में निरंतर बेचैनी और भय पैदा करने को युद्ध निरोध का महत्वपूर्ण पहलू बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि 'विशेष अभियान' शब्द का प्रयोग अक्सर सामरिक परमाणु, रासायनिक या जैविक हथियारों के लिए किया जाता है, जिससे इन परीक्षणों की गंभीरता बढ़ जाती है।
दक्षिण कोरिया ने इस घटनाक्रम के जवाब में अपनी ड्रोन क्षमताओं के विस्तार की योजना की घोषणा की है। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, 2029 तक 5 लाख ड्रोन ऑपरेटरों को प्रशिक्षित करने और 20,000 से अधिक कम लागत वाले कामिकेज़ ड्रोन खरीदने का लक्ष्य है, जो अमेरिकी लुकास प्रणाली के कोरियाई संस्करण होंगे। यह कदम 2022-23 में उत्तर कोरियाई ड्रोनों द्वारा सियोल के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ की घटनाओं के बाद उठाया गया है। इस बीच, संयुक्त राष्ट्र कमान (यूएनसी) और सियोल के बीच उत्तर कोरिया की सीमा पर किलेबंदी को लेकर मतभेद उभर आया है—दक्षिण कोरिया इसे युद्धविराम समझौते का उल्लंघन मानता है, जबकि यूएनसी ने तथ्य पत्र जारी कर कहा कि ये गतिविधियाँ सैन्य सीमांकन रेखा के उत्तरी ओर हुई हैं, इसलिए उल्लंघन नहीं हैं।
भू-राजनीतिक स्तर पर, चीन और रूस के बीच उत्तर कोरिया पर प्रभाव की प्रतिस्पर्धा ने प्योंगयांग को अधिक रणनीतिक स्वायत्तता प्रदान की है। जून 2026 की शुरुआत में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की प्योंगयांग यात्रा के दौरान परमाणु निरस्त्रीकरण का कोई उल्लेख नहीं किया गया, जो 2019 की यात्रा के विपरीत था। वहीं, रूस ने यूक्रेन युद्ध में उत्तर कोरियाई सैनिकों और गोला-बारूद के बदले तकनीकी जानकारी और हथियारों की आपूर्ति करके प्रतिबंधों को दरकिनार किया है। विश्लेषकों के अनुसार, इस प्रतिस्पर्धा ने किम शासन को शीत युद्ध की समाप्ति के बाद पहली बार दो बड़ी शक्तियों के बीच संतुलन साधने का अवसर दिया है, जिससे वह अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर अंतरराष्ट्रीय दबाव को कम करने में सफल रहा है।
वर्तमान में, उत्तर कोरिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कूटनीति बहाल करने के प्रस्तावों को यह कहते हुए ठुकरा दिया है कि जब तक परमाणु निरस्त्रीकरण की पूर्व शर्त नहीं हटाई जाती, बातचीत संभव नहीं। दक्षिण एशियाई परिप्रेक्ष्य में, यह घटनाक्रम एक छोटे परमाणु शक्ति संपन्न राज्य द्वारा महाशक्ति प्रतिद्वंद्विता का लाभ उठाकर रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ाने का उदाहरण प्रस्तुत करता है। आगामी कदमों में उत्तर कोरिया द्वारा सीमा पर नई तोपखाना और मिसाइल प्रणालियों की तैनाती तथा दक्षिण कोरिया-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यासों के जवाब में और परीक्षणों की संभावना है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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North Korea's latest weapons tests underscore a drive for a 'deadly and destructive' offensive capability, as Kim Jong Un personally oversaw the launches. The display, coming just days after the commissioning of the first naval destroyer, signals an accelerating military buildup that deepens regional security concerns.
North Korea's border fortifications have exposed a rift between Seoul and the UN Command, with the latter refusing to label them an armistice violation. The dispute extends to disagreements over DMZ access and the future role of US forces, revealing misalignments between South Korea and Washington on the primary purpose of the American troop presence.
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