
बैंक्सिको ने दर 6.5% पर स्थिर रखी, वैश्विक दबावों के बीच लंबे विराम के संकेत
मेक्सिको के केंद्रीय बैंक ने मुद्रास्फीति के मिले-जुले रुख और कमजोर आर्थिक वृद्धि के चलते दरें यथावत रखीं, विश्लेषकों का अनुमान है कि अगला कदम बढ़ोतरी का हो सकता है।
बैंक ऑफ मेक्सिको (बैंक्सिको) ने 25 जून को अपनी नीतिगत ब्याज दर 6.50 प्रतिशत पर बरकरार रखी। यह निर्णय गवर्निंग बोर्ड का सर्वसम्मत था और मई में 25 आधार अंकों की कटौती के बाद लगातार दो बैठकों में दर स्थिर रखने का संकेत देता है। बैंक ने स्पष्ट किया कि मौजूदा मौद्रिक रुख मुद्रास्फीति के जोखिमों से निपटने के लिए पर्याप्त है और आगे भी दर को इसी स्तर पर बनाए रखना उपयुक्त होगा।
मुद्रास्फीति के मोर्चे पर मिश्रित तस्वीर उभर रही है। जून के पहले पखवाड़े में सालाना महंगाई दर घटकर 3.55 प्रतिशत पर आ गई, जो लगातार दूसरी बार 4 प्रतिशत के नीचे रही। इसमें कृषि उत्पादों, खासकर टमाटर की कीमतों में 24 प्रतिशत तक की गिरावट का बड़ा योगदान रहा। लेकिन सेवा क्षेत्र की मुद्रास्फीति, विशेषकर फुटबॉल विश्व कप से जुड़े पर्यटन व्यय में उछाल, चिंता का विषय बना हुआ है। बैंक्सिको ने दूसरी तिमाही के लिए समग्र मुद्रास्फीति के अनुमान को थोड़ा घटाया, परंतु शेष वर्ष के लिए मूल मुद्रास्फीति के पूर्वानुमान बढ़ा दिए, जो सेवाओं की कीमतों में बनी रहने वाली कठोरता को दर्शाता है।
आर्थिक गतिविधि कमजोर बनी हुई है। पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद में 0.6 प्रतिशत का संकुचन दर्ज किया गया, और बैंक ने 2026 के विकास अनुमान को 1.6 से घटाकर 1.1 प्रतिशत कर दिया। निवेश में सुस्ती और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों को लेकर अनिश्चितता, खासकर टी-एमईसी की समीक्षा, विकास पर दबाव डाल रही है। मोनेक्स के विश्लेषकों का मानना है कि बैंक्सिको का दर कटौती चक्र समाप्त हो चुका है और अगला कदम बढ़ोतरी का हो सकता है, हालांकि यह निकट भविष्य में संभव नहीं दिखता। उनके अनुसार, मौद्रिक नीति अब तटस्थ स्तर पर पहुंच गई है और बाजार भी भविष्य में दर वृद्धि की अधिक संभावना जता रहे हैं।
वैश्विक परिदृश्य भी चुनौतीपूर्ण है। यूरोप में, यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) ने 11 जून को ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर मुख्य दर 2.4 प्रतिशत कर दी, जबकि वहां मुद्रास्फीति मुख्यतः ऊर्जा आपूर्ति के झटकों और भू-राजनीतिक तनावों से प्रेरित है। ईसीबी की यह कार्रवाई मांग को ठंडा करने के लिए है, लेकिन अर्थशास्त्री इस बात पर जोर दे रहे हैं कि आपूर्ति-जनित मुद्रास्फीति से निपटने में दर वृद्धि की सीमाएं हैं। मेक्सिको के लिए भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित सख्ती और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव अतिरिक्त जोखिम पैदा कर रहे हैं।
आगे की राह डेटा पर निर्भर करेगी। बैंक्सिको ने अपने संचार में ‘लंबी अवधि’ शब्द का प्रयोग नहीं किया, जिससे संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों के आर्थिक आंकड़े ही नीति की दिशा तय करेंगे। अगली नीतिगत बैठक और फेड के निर्णय, साथ ही टी-एमईसी समीक्षा से जुड़े घटनाक्रम, निकट भविष्य में देखने योग्य मील के पत्थर होंगे।
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