
लेबनान-इज़राइल वार्ता में गतिरोध, अमेरिकी दबाव के बावजूद शुक्रवार तक बढ़ी
वाशिंगटन में पाँचवें दौर की सीधी बातचीत हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और इज़राइली सेना की वापसी की शर्तों पर अटकी, अमेरिकी विदेश मंत्री रुबियो ने व्यक्तिगत हस्तक्षेप किया।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि लेबनान और इज़राइल के बीच वाशिंगटन में चल रही पाँचवें दौर की सीधी बातचीत, जो गुरुवार को समाप्त होनी थी, शुक्रवार सुबह तक जारी रहेगी। मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने रहने के कारण वार्ता को एक अतिरिक्त दिन के लिए बढ़ाया गया है। यह निर्णय लगातार ग्यारह घंटे की बातचीत के बाद लिया गया, जो अमेरिकी मध्यस्थता के तहत किसी सुरक्षा व्यवस्था पर ‘सैद्धांतिक प्रतिबद्धता’ हासिल करने के प्रयासों की तीव्रता को दर्शाता है।
लेबनानी प्रतिनिधिमंडल, सरकारी सूत्रों के अनुसार, एक ‘इरादों की घोषणा’ चाहता है जिसमें दक्षिणी लेबनान से इज़राइली सेना की वापसी की स्पष्ट समय-सीमा शामिल हो। दूसरी ओर, इज़राइली पक्ष किसी भी समझौते को हिज़्बुल्लाह के पूर्ण निरस्त्रीकरण से जोड़ रहा है और तब तक सेना हटाने से इनकार कर रहा है। इज़राइली ऊर्जा मंत्री एली कोहेन ने एक स्थानीय चैनल से कहा कि सुरक्षा क्षेत्र से वापसी फ़िलहाल सरकार के एजेंडे में नहीं है, भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इसकी माँग करें। हिज़्बुल्लाह ने इन सीधी वार्ताओं को ‘विश्वासघात’ और ‘मुफ़्त रियायत’ करार दिया है, जबकि उसके महासचिव ने स्पष्ट किया है कि संगठन लीतानी नदी के दक्षिण तक ही हथियार सौंपने पर सहमत हो सकता है, पूरे देश में नहीं।
वार्ता का सबसे संवेदनशील बिंदु अमेरिकी प्रस्तावित ‘पायलट ज़ोन’ या मॉडल क्षेत्रों की अवधारणा है। इसके तहत चुनिंदा इलाकों से इज़राइली सेना हटेगी और लेबनानी सेना सुरक्षा की ज़िम्मेदारी संभालेगी, जिसके जवानों की अमेरिका में जाँच होगी। लेबनानी सैन्य प्रतिनिधिमंडल ने इन क्षेत्रों को कब्ज़े वाली भूमि से आगे बढ़ाने और इज़राइली सेना के साथ सीधे समन्वय को अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप किया और सैन्य प्रतिनिधियों की जगह राजनीतिक दल को आगे बढ़ाया। लेबनानी मीडिया के अनुसार, इज़राइल ने दस से अधिक प्रस्तावित मॉडल क्षेत्रों को खारिज कर दिया और लीतानी नदी के उत्तर में भी प्रयोग का विस्तार चाहता है।
यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका और खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) ने एक संयुक्त बयान में सभी ग़ैर-सरकारी सशस्त्र समूहों के निरस्त्रीकरण को लेबनान में स्थायित्व के लिए ज़रूरी बताया है। साथ ही, अमेरिकी सेन्ट्रल कमान एक वास्तविक-समय निगरानी तंत्र स्थापित कर रही है ताकि ज़मीनी स्थिति पर नज़र रखी जा सके। ईरान के साथ अमेरिकी वार्ता में भी लेबनान का मुद्दा शामिल किए जाने की ख़बरों के बीच लेबनानी प्रधानमंत्री नवाफ़ सलाम ने स्पष्ट किया है कि तेहरान बेरूत की ओर से बातचीत नहीं कर सकता। दक्षिण एशिया के लिए यह घटनाक्रम ऊर्जा आपूर्ति मार्गों और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़ा है, क्योंकि पश्चिम एशिया में लम्बा तनाव वैश्विक तेल कीमतों और प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।
शुक्रवार सुबह वार्ता फिर शुरू होगी, लेकिन इज़राइली राजदूत ने इसे ‘ट्रेन रेक’ (अनियंत्रित टकराव) बताया है, जो गहरी आशंका को दर्शाता है। अमेरिकी अधिकारी एक ‘प्रतिबद्धता पत्र’ की ओर बढ़ने की बात कर रहे हैं, पर अभी तक किसी ठोस समझौते की रूपरेखा सामने नहीं आई है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिका की मध्यस्थता वाली वार्ता दक्षिणी लेबनान से हटने पर इज़राइली हठ के बावजूद जारी है। हिज़्बुल्लाह सीधी बातचीत को कब्ज़ा करने वाले शासन के लिए देशद्रोह और मुफ़्त रियायतें बताकर निंदा करता है। इज़राइल के कब्ज़ा बनाए रखने के आग्रह के कारण गतिरोध बना हुआ है।
मैराथन सत्रों के बाद वार्ता के पांचवें दौर को बढ़ा दिया गया, जिसका लक्ष्य सुरक्षा व्यवस्था है। मुख्य अड़चन हिज़्बुल्लाह का निरस्त्रीकरण और दक्षिणी लेबनान में भविष्य के सुरक्षा तंत्र बने हुए हैं। गतिरोध के बावजूद अमेरिकी मध्यस्थता जारी है।
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