
मोनाको बम हमले की संदिग्ध की हत्या: यूक्रेनी खुफिया अधिकारी ने अदालत में बयान बदला, सह-आरोपी पर ठहराया आरोप
कीव की एक अदालत में सुनवाई के दौरान यूक्रेनी सैन्य खुफिया एजेंट ने अपना पूर्व स्वीकारोक्ति वापस लेते हुए पूर्व एसबीयू अधिकारी पर गोली चलाने का आरोप लगाया, जिससे मामले की अंतरराष्ट्रीय जांच में नए सवाल खड़े हो गए हैं।
कीव की एक अदालत में गुरुवार को यूक्रेनी सैन्य खुफिया (एचयूआर) के एजेंट व्लादिस्लाव रेउत ने मोनाको बम हमले की मुख्य संदिग्ध अनास्तासिया बेरेज़ोव्स्का की हत्या के मामले में अपना बयान बदल दिया। रेउत ने पहले जांचकर्ताओं के सामने स्वीकार किया था कि उन्होंने सह-आरोपी के साथ मिलकर बेरेज़ोव्स्का की गोली मारकर हत्या की, लेकिन अब उन्होंने अदालत में कहा कि उन्होंने गोली चलाने से इनकार कर दिया था और वास्तव में पूर्व यूक्रेनी सुरक्षा सेवा (एसबीयू) अधिकारी विटाली झिकोविच ने चार गोलियां मारीं। दोनों आरोपी पूर्व-नियोजित हत्या के आरोप में न्यायिक हिरासत में हैं और जांच जारी है।
यूक्रेनी अभियोजन पक्ष के अनुसार, दोनों ने "संयुक्त और समन्वित रूप से" कार्य किया, और रेउत का नया बयान जिम्मेदारी से बचने का प्रयास हो सकता है। रेउत ने अदालत को बताया कि झिकोविच ने उन्हें धमकी दी थी कि अगर उन्होंने बयान नहीं बदला तो उनके परिवार को खतरा होगा। वहीं, झिकोविच के बचाव पक्ष ने इस संस्करण को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे एक "जाल" बताया और संकेत दिया कि यह कोई सामान्य हत्या नहीं, बल्कि एक आदेशित सज़ा-ए-मौत हो सकती है। रूस समर्थक यूक्रेनी राजनेता विक्टर मेदवेदचुक ने इस मामले को कीव सरकार द्वारा रची गई एक विशेष कार्रवाई करार दिया, जिसका उद्देश्य हमले के असली आकाओं को छिपाना है। पश्चिमी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की से मामले की स्पष्ट जानकारी मांगी है, जिससे यह प्रकरण कूटनीतिक रूप से संवेदनशील बन गया है।
यह घटनाक्रम पिछले सप्ताह मोनाको में हुए बम हमले से जुड़ा है, जिसमें यूक्रेनी मूल के व्यवसायी वादिम येरमोलाएव, उनकी साथी और बेटा गंभीर रूप से घायल हो गए थे। येरमोलाएव पर कीव ने 2023 में रूसी कब्जे वाले क्रीमिया में कारोबार जारी रखने के लिए प्रतिबंध लगाए थे। बेरेज़ोव्स्का पर हमले का आरोप था और वह इंटरपोल द्वारा वांछित थी; वह पैदल फ्रांस, फिर कार से जर्मनी और पोलैंड होते हुए यूक्रेन पहुंची, जहां 1 जुलाई को कीव के पास एक जंगल में उसका शव बरामद हुआ। यूक्रेनी जांचकर्ताओं के अनुसार, दोनों आरोपियों ने बेरेज़ोव्स्का के बैंक और क्रिप्टोकरेंसी खातों में बार-बार धन हस्तांतरित किया था, और पूर्व पुलिस अधिकारी झिकोविच के घर की तलाशी के दौरान एक तहखाने का कमरा मिला जो यातना कक्ष जैसा प्रतीत होता है।
यूक्रेनी अधिकारियों ने कहा है कि मोनाको हमले और बेरेज़ोव्स्का की हत्या के पीछे के उद्देश्यों की जांच अभी भी खुली है, जिसमें आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार या रूसी हस्तक्षेप सहित सभी संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। यूक्रेन की कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने मोनाको के अधिकारियों के साथ सभी उपलब्ध सूचनाएं साझा कर दी हैं। अदालती कार्यवाही जारी रहेगी, और रेउत ने स्वेच्छा से पॉलीग्राफ परीक्षण की पेशकश की है, जबकि अभियोजन पक्ष दोनों आरोपियों की भूमिका को स्पष्ट करने के लिए और सबूत जुटा रहा है। यह मामला यूक्रेन की आंतरिक सुरक्षा संस्थाओं की विश्वसनीयता और यूरोपीय सहयोगियों के साथ उसके संबंधों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −1.00 | critical |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.10 | neutral |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
The Ukrainian state orchestrated the Monaco attack through its intelligence officers, and the retraction is a desperate attempt to hide its involvement.
By quoting a former Ukrainian opposition figure now aligned with Russia, the narrative gains credibility from an insider source, while generalizing the actions of individuals to the entire state apparatus.
The article omits the fact that the retraction was made in court and that the co-defendant is also a former SBU official, not necessarily acting on state orders. It also ignores the possibility of a personal motive or a rogue operation.
The court hears a retraction that shifts blame, and the political implications for Ukraine's leadership are unavoidable.
By reporting the retraction as a judicial fact and then noting the political pressure on Zelenskyy, the narrative connects a legal event to broader political consequences without explicitly accusing.
The article omits any mention of the victim's background or the possibility that the bombing suspect might have been an agent herself, focusing instead on the procedural twist.
The case takes a new turn as a confession is retracted, but the full story remains unclear.
By presenting the retraction as a 'twist' without analysis or context, the narrative maintains a tone of neutral curiosity, avoiding any judgment.
The article omits the identities and affiliations of the accused, as well as the political context of the bombing, leaving the reader with an incomplete picture.
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