
रास तनूरा से सऊदी तेल निर्यात फिर शुरू, स्पॉट मूल्य निर्धारण से एशियाई बाजार में हलचल
चार महीने के ठहराव के बाद सऊदी अरामको ने रास तनूरा से कच्चे तेल की लोडिंग दोबारा शुरू की और एशिया में मांग बढ़ाने के लिए स्पॉट कीमतों पर बिक्री का रुख अपनाया।
सऊदी अरामको ने शुक्रवार को दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यात बंदरगाह रास तनूरा से लोडिंग फिर से शुरू कर दी, जिसके बाद कम से कम पांच वीएलसीसी टैंकर कुल एक करोड़ बैरल कच्चा तेल लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं। इस कदम ने वैश्विक बाजार में तुरंत असर दिखाया: ब्रेंट क्रूड मार्च के लगभग 120 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर अब करीब 70 डॉलर पर आ गया है, जिसकी एक बड़ी वजह अमेरिका-ईरान अंतरिम शांति समझौते के बाद आपूर्ति की बहाली और मांग में नरमी है।
सामान्यतः अरामको दीर्घकालिक अनुबंधों के तहत हर महीने तय आधिकारिक विक्रय मूल्य (ओएसपी) पर तेल बेचती है, लेकिन जुलाई लोडिंग के लिए उसके ओएसपी में 6 से 10 डॉलर प्रति बैरल का प्रीमियम था, जबकि अमेरिका-ईरान वार्ता की प्रगति के बाद मध्य पूर्व के अन्य विक्रेता जुलाई-अगस्त कार्गो के लिए छूट देने लगे थे। इस प्रतिस्पर्धा के बीच अरामको ने अपने बाहरी टैंकर बेड़े के साथ-साथ एशियाई ग्राहकों को स्पॉट मूल्य पर तेल की पेशकश शुरू की, जिसे चीनी खरीदारों ने “बहुत आकर्षक” बताया। व्यापारियों का अनुमान है कि कंपनी अगस्त के लिए अपने ओएसपी में बड़ी कटौती कर सकती है।
यह बदलाव सिर्फ बाजार की चाल नहीं, बल्कि अमेरिका-सऊदी संबंधों में आई गहरी दरार की पृष्ठभूमि में हो रहा है। ईरान युद्ध के दौरान सऊदी अरब ने अमेरिकी सेना को अपने हवाई क्षेत्र और ठिकानों का इस्तेमाल करने से मना कर दिया था, जिसके चलते ट्रंप प्रशासन को होर्मुज में तेल टैंकरों की सुरक्षा वाला ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ महज 48 घंटों में स्थगित करना पड़ा। वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, अमेरिका अब सऊदी अरब से अपनी सैन्य मौजूदगी घटाकर उसे इज़राइल और जॉर्डन जैसे “अधिक सहयोगी” देशों में स्थानांतरित करने पर विचार कर रहा है।
सऊदी युवराज मोहम्मद बिन सलमान ने युद्ध शुरू होने से पहले कूटनीतिक समाधान की वकालत की, फिर ईरानी शासन को उखाड़ फेंकने का समर्थन किया, और बाद में जब ईरानी मिसाइलों का खतरा बढ़ा तो युद्धविराम के लिए दबाव डाला। रियाद ने पाकिस्तान और चीन के साथ संबंध मजबूत किए हैं और ईरान के साथ सीधी बातचीत कर रहा है, जिसमें होर्मुज नियंत्रण और मिलिशिया समर्थन जैसे मुद्दे शामिल हैं। भारत जैसे बड़े आयातक के लिए यह घटनाक्रम दोहरा संकेत देता है: एक ओर सस्ते स्पॉट तेल की उपलब्धता, दूसरी ओर खाड़ी में अस्थिरता का जोखिम जो आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर सकता है।
अगला ठोस पड़ाव अरामको के अगस्त ओएसपी की घोषणा होगी, जिससे एशियाई रिफाइनरों की खरीद रणनीति तय होगी। साथ ही, अमेरिकी सैन्य पुनर्संयोजन और ईरान के साथ जारी शांति वार्ता का नतीजा इस बात को निर्धारित करेगा कि रास तनूरा से निर्यात की यह बहाली स्थायी होती है या फिर भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर आपूर्ति मार्ग को अवरुद्ध कर देते हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ
Saudi Arabia has resumed crude exports from Ras Tanura after a nearly four-month halt, with at least five supertankers carrying 10 million barrels. To speed up sales in Asia, Saudi Aramco has switched to spot pricing, adding to a supply glut that has pushed Brent below $70 a barrel.
The war in Iran has strained the decades-old alliance between Washington and Riyadh, with the Trump administration reportedly considering reducing its military footprint in the kingdom. Saudi Arabia's refusal to grant airspace for a US mission has exposed growing mistrust and Trump's unreliability, marking a turning point in bilateral relations.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
ट्रंप ने कतर से उपहार में मिले नए एयर फोर्स वन की पहली उड़ान भरी
10 भाषाएँ · 26 स्रोत
Economy & Markets सेवैश्विक ऑटो बाजार में चीनी कंपनियों की धमक: BYD टेस्ला को पीछे छोड़ने को तैयार, यूरोपीय दिग्गज संकट में
3 भाषाएँ · 13 स्रोत
Technology सेभारत ने व्हाट्सएप का यूजरनेम फीचर रोका, टेलीग्राम और सिग्नल पर भी शिकंजा
4 भाषाएँ · 16 स्रोत