
रूस की ओलंपिक वापसी का रास्ता साफ, आईओसी ने हटाए प्रतिबंध
अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति ने रूसी खिलाड़ियों पर लगी पाबंदियां हटा दीं, लेकिन राष्ट्रगान और ध्वज पर रोक फिलहाल बरकरार; नॉर्डिक देशों ने तीखी प्रतिक्रिया दी।
लॉज़ेन में मंगलवार को एक निर्णायक मोड़ आया जब अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) ने रूसी एथलीटों पर से वे सभी प्रतिबंध हटा दिए जो टीम स्पर्धाओं और लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के क्वालीफिकेशन में उनकी भागीदारी रोक रहे थे। तीन साल के लंबे अंतराल के बाद रूसी खिलाड़ी अब फिर से अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उतर सकते हैं, हालांकि ओलंपिक खेलों में रूसी ध्वज, राष्ट्रगान और रंगों के इस्तेमाल पर अंतिम फैसला बाद में लिया जाएगा। यह कदम बेलारूस पर से मई में प्रतिबंध हटाए जाने के बाद आया है, जिससे रूस की वापसी की अटकलों को बल मिला था।
यह बदलाव एक कानूनी पेंच के सुलझने से संभव हुआ। आईओसी ने अक्टूबर 2023 में रूसी ओलंपिक समिति (आरओसी) को इस आधार पर निलंबित किया था कि उसने यूक्रेन के चार अधिकृत क्षेत्रों—दोनेत्स्क, खेरसॉन, लुहांस्क और ज़ापोरिज्जिया—के खेल संगठनों को अपना सदस्य बना लिया था। अब आरओसी ने पुष्टि की है कि वह इन क्षेत्रों में कोई गतिविधि नहीं करेगी, जिससे निलंबन का कानूनी आधार समाप्त हो गया। साथ ही, लौटने वाले हर रूसी एथलीट को कई चरणों की डोपिंग जांच से गुज़रना होगा—यह शर्त रूस के पिछले डोपिंग विवादों के कारण लगाई गई है। आईओसी ने यह भी स्पष्ट किया कि वह रूस में किसी आयोजन की मेज़बानी नहीं करेगा और न ही रूसी सरकारी प्रतिनिधियों को अपने कार्यक्रमों में आमंत्रित करेगा।
इस फैसले पर वैश्विक प्रतिक्रिया दो ध्रुवों पर बंटी दिखी। नॉर्डिक और बाल्टिक क्षेत्रों से कड़ा विरोध सामने आया। स्वीडन के खेल मंत्री याकोब फ़ोर्समेद ने इसे “दुखद निर्णय” बताया जो “रूस के आक्रामक युद्ध को सामान्य बनाता है,” और स्वीडिश ओलंपिक समिति के अध्यक्ष हांस फ़ॉन उथमान ने कहा कि यूक्रेन की स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया है, इसलिए यह निर्णय गलत है। यूरोपीय संघ की स्वीडिश मंत्री जेसिका रोसेंक्रांत्स ने इसे “पूरी तरह शर्मनाक” करार दिया। दूसरी ओर, रूस ने इस कदम का स्वागत किया। रूसी खेल मंत्री मिखाइल देगत्यारेव ने टेलीग्राम पर कहा कि “आईओसी एक स्पष्ट संकेत भेज रहा है—ओलंपिक आंदोलन को राजनीति से मुक्त रहना चाहिए।” आईओसी ने अपने बयान में युद्धों और हिंसा की निंदा की, लेकिन इस बात पर ज़ोर दिया कि एथलीटों की भागीदारी सरकारों के कार्यों से प्रतिबंधित नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, रूसी खिलाड़ियों की वापसी की राह में अभी भी अड़चनें हैं। अंतिम अनुमति अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघों के हाथ में है। विश्व एथलेटिक्स (वर्ल्ड एथलेटिक्स) ने रूसी एथलीटों पर अपना प्रतिबंध जारी रखा है, इसलिए ट्रैक और फील्ड के खिलाड़ी फिलहाल ओलंपिक की दौड़ से बाहर हैं। दूसरे महासंघ अपने-अपने स्तर पर निर्णय लेंगे। लॉस एंजिल्स 2028 के लिए क्वालीफिकेशन मुकाबले इसी शरद ऋतु से शुरू होने वाले हैं—यही वह ठोस खेल मंच होगा जहां इस नीतिगत बदलाव की असली परीक्षा होगी।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.90 | critical |
|---|---|---|
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | 0.00 | neutral |
Sweden and Germany condemn the IOC decision as an act that normalizes Russian aggression.
The rhetorical mechanism is 'normalization' – it argues that by removing sanctions, the IOC implicitly legitimizes the war, equating sport with politics.
Omitted is the fact that the IOC kept the ban on flag and anthem, and that return conditions include multiple doping tests – details that would soften the criticism of full rehabilitation.
The IOC sets conditions for the return of Russian athletes, keeping the ban on national symbols and imposing doping tests.
The technique is 'bureaucratization' – the decision is presented as a series of technical procedures (tests, qualifications) that obscure the political dimension.
Omitted is the context of the war in Ukraine and the criticism from European governments, which would give a political dimension to the news.
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