
चुनावी खर्च पर ब्राजील की यथास्थिति, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट का पार्टी खर्च पर नियंत्रण हटाने का निर्णय
ब्राजील के चुनावी न्यायाधिकरण ने 2026 के अभियान खर्च की सीमा 2022 के स्तर पर बनाए रखी, जबकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने दलों के समन्वित खर्च पर लगी एक सीमा को असंवैधानिक ठहराया।
ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट (टीएसई) ने सर्वसम्मति से 2026 के चुनावों के लिए अभियान खर्च की अधिकतम सीमा को 2022 के स्तर—4.9 अरब रियाल—पर बनाए रखने का निर्णय लिया। न्यायालय के अध्यक्ष न्यायमूर्ति कासियो नून्स मार्केस के अनुसार, यह कदम अधिकांश राजनीतिक दलों के अनुरोध पर उठाया गया, क्योंकि चुनावी कानून में कोई बदलाव नहीं हुआ था और राष्ट्रपति लूला ने बजट दिशानिर्देश कानून के तहत कांग्रेस द्वारा पारित दल निधि में वृद्धि को वीटो कर दिया था। टीएसई का मानना है कि सीमा में किसी भी संशोधन से दलों का वित्तीय संतुलन बिगड़ सकता है और समावेशन नीतियों के तहत लाभान्वित उम्मीदवारों को नुकसान पहुंच सकता है।
इसके विपरीत, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक अलग दिशा में कदम बढ़ाते हुए नेशनल रिपब्लिकन सीनेटोरियल कमेटी बनाम फेडरल इलेक्शन कमीशन मामले में एक ऐसे कानून को रद्द कर दिया जो राजनीतिक दलों द्वारा उम्मीदवारों के साथ समन्वित खर्च पर सीमा लगाता था। न्यायालय के रूढ़िवादी बहुमत ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन बताया। न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ के प्रोफेसर रिक पिल्डेस जैसे कानूनी विशेषज्ञों का तर्क है कि इस फैसले से सुपर पीएसी जैसे स्वतंत्र समूहों के मुकाबले राजनीतिक दलों की स्थिति मजबूत हो सकती है, क्योंकि दल मतदाताओं के प्रति जवाबदेह होते हैं और व्यापक हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। हालांकि, डेमोक्रेटिक नेशनल कमेटी और ब्रेनन सेंटर फॉर जस्टिस जैसे वामपंथी संगठनों ने इस निर्णय की आलोचना करते हुए इसे भ्रष्टाचार विरोधी कानूनों को कमजोर करने वाला और अरबपति दानदाताओं के प्रभाव को बढ़ाने वाला बताया है।
कोलंबिया में, हाल ही में संपन्न राष्ट्रपति और कांग्रेस चुनावों के बाद, राजनीतिक टिप्पणीकारों ने एक बड़े राजनीतिक संघर्षविराम का आह्वान किया है ताकि नई सरकार सार्वजनिक वित्त को पटरी पर ला सके और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को पुनर्स्थापित कर सके। कोलंबियाई मीडिया में प्रकाशित विश्लेषणों के अनुसार, नवनिर्वाचित राष्ट्रपति अबेलार्दो दे ला एस्प्रिएया से विपक्षी दल ने अमेरिकी नागरिकता त्यागने और निवर्तमान राष्ट्रपति गुस्तावो पेत्रो के प्रत्यर्पण न करने की गारंटी देने की मांग की है, जो अमेरिका में जांच का सामना कर रहे हैं। इन टिप्पणियों में चेतावनी दी गई है कि व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता पर केंद्रित राजनीतिक खींचतान देश के आर्थिक विकास को बाधित कर सकती है और 1.5 करोड़ से अधिक कोलंबियाई नागरिकों को गरीबी से बाहर निकालने के प्रयासों को पटरी से उतार सकती है।
इटली से आ रहे राजनीतिक विश्लेषण चुनावी कानूनों के प्रति एक व्यापक अविश्वास को रेखांकित करते हैं। इतालवी टिप्पणीकारों का आरोप है कि पिछले तीन दशकों में संसद ने सत्तारूढ़ दलों के लिए सुविधाजनक चुनावी सुधारों को मंजूरी दी है, जिससे दलतंत्र मजबूत हुआ है और नागरिक भागीदारी हतोत्साहित हुई है। उनके अनुसार, मौजूदा केंद्र-दक्षिणपंथी बहुमत एक और असंवैधानिक चुनावी कानून पारित करने का प्रयास कर रहा है, साथ ही महापौरों के प्रत्यक्ष चुनाव की प्रणाली को कमजोर करना चाहता है, जिसे जनता और संस्थाओं के बीच निकटता का एकमात्र प्रभावी माध्यम माना जाता है। ये आलोचनाएं बताती हैं कि दल नेतृत्व वरीयता मत और आनुपातिक प्रतिनिधित्व जैसे उपायों का विरोध करते हैं, क्योंकि इससे संसद में संविधान के प्रति समर्पित नए चेहरों का प्रवेश हो सकता है।
ब्राजील में टीएसई का अगला सत्र अगस्त में शुरू होगा, जबकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का प्रभाव 2026 के मध्यावधि चुनावों में दिखाई देगा। कोलंबिया में नई कांग्रेस 20 जुलाई को शपथ लेगी, और इटली में चुनावी सुधार पर बहस विधायी कार्यक्रम का हिस्सा बनी हुई है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ब्राजील की चुनावी अदालत ने सर्वसम्मति से 2026 के चुनावी खर्च की सीमा को 2022 के स्तर यानी लगभग 4.9 अरब रियास पर बनाए रखने का निर्णय लिया। अदालत का तर्क था कि किसी भी वृद्धि से दलों का वित्तीय संतुलन बिगड़ सकता है और समावेशन नीतियां कमजोर हो सकती हैं। यह निर्णय चुनावी प्रक्रिया में स्थिरता और समानता बनाए रखने के व्यावहारिक प्रयास को दर्शाता है।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के चुनावों में राजनीतिक दलों के खर्च पर लगी सीमाओं को 6-3 के निर्णय से हटा दिया, जिसने पहले संशोधन के आधार पर संघीय चुनाव अभियान अधिनियम के एक हिस्से को रद्द कर दिया। कुछ विश्लेषकों का तर्क है कि यह निर्णय पुराने प्रतिबंधों को हटाकर राजनीति को बेहतर बना सकता है, जबकि अन्य चेतावनी देते हैं कि इससे धन का प्रभाव बढ़ने का रास्ता खुल गया है। इस निर्णय को चुनावी वित्तपोषण के लिए दीर्घकालिक प्रभावों वाला एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
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