
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद भी लेबनान में संघर्ष, हिजबुल्लाह ने इजरायली सेना को खदेड़ा
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम की घोषणा के बावजूद सोमवार को दक्षिणी लेबनान में इजरायली हमले जारी रहे, जिसके जवाब में हिजबुल्लाह ने मिसाइलों और ड्रोनों से इजरायली बख्तरबंद टुकड़ी को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।
अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुए समझौते ने मध्य पूर्व के सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने का वादा किया, लेकिन सोमवार को लेबनान की ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग रही। समझौते की घोषणा के तुरंत बाद हिजबुल्लाह ने दक्षिणी लेबनान में अपने सैन्य अभियान रोक दिए थे और ईरान के समर्थन के लिए आभार जताया था। विस्थापित लोग अपने गांवों की ओर लौटने लगे, कासमियेह पुल पर गद्दे और सूटकेस लादे वाहनों की कतारें देखी गईं। लेकिन यह राहत क्षणभंगुर साबित हुई। इजरायली युद्धक विमानों और ड्रोनों ने मजदल ज़ून और कफ़र तेबनीत पर हमले किए, वहीं नबातियेह और आसपास के इलाकों पर भारी तोपखाने की बौछार जारी रही। लेबनानी सरकार को इस क्षेत्रीय समझौते की शर्तों की कोई औपचारिक जानकारी नहीं दी गई थी, जिससे बेरूत की भूमिका हाशिए पर नज़र आई।
इजरायली हमलों ने युद्धविराम के दावों को तुरंत चुनौती दे दी। कफ़र तेबनीत में एक ड्रोन हमले ने एक कार को निशाना बनाकर चालक की जान ले ली, जबकि दूसरे हमले में कई लोग घायल हुए, जिनमें एक लेबनानी रिपोर्टर भी शामिल था। इजरायली चैनल 12 ने दावा किया कि सेना की सभी गतिविधियां रोक दी गई हैं और विस्थापितों की वापसी में बाधा न डालने के आदेश दिए गए हैं, लेकिन ज़मीनी रिपोर्टों ने इसके विपरीत तस्वीर पेश की। इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन गवीर ने खुलेआम कहा कि ट्रंप का समझौता इजरायल को बाध्य नहीं करता और वे लेबनान में तब तक हमले जारी रखेंगे जब तक हिजबुल्लाह पूरी तरह नष्ट न हो जाए। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति को स्पष्ट संदेश दिया कि इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान से पीछे नहीं हटेगी।
इन उल्लंघनों के बीच हिजबुल्लाह ने सोमवार शाम पहला जवाबी कदम उठाया। समूह ने एक बयान में कहा कि अरनून-अल-कमाशा क्षेत्र से कफ़र तेबनीत की ओर बढ़ रहे एक बुलडोज़र और दो मर्कवा टैंकों वाले इजरायली बल को गाइडेड मिसाइलों और अबाबिल ड्रोनों से निशाना बनाकर पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। हिजबुल्लाह ने इसे युद्धविराम उल्लंघन का सीधा जवाब बताया और चेतावनी दी कि वह लेबनान की संप्रभुता या नागरिकों पर किसी भी हमले को स्वीकार नहीं करेगा। ईरानी मीडिया ने इस हमले को प्रतिरोध की वैधता के रूप में प्रस्तुत किया, जबकि हिजबुल्लाह ने ईरान के सर्वोच्च नेता, सरकार और आईआरजीसी के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया।
यह घटनाक्रम दर्शाता है कि अमेरिका-ईरान समझौता लेबनान के लिए कितने अनसुलझे सवाल छोड़ गया है। समझौते में न तो इजरायली सेना की वापसी का ज़िक्र है और न ही हिजबुल्लाह को ईरानी समर्थन रोकने का। लेबनानी अधिकारी अमेरिकी दबाव में इजरायल से सीधी बातचीत कर रहे थे, लेकिन यह क्षेत्रीय डील उनकी कोशिशों पर भारी पड़ती दिख रही है। विस्थापितों को जल्दबाज़ी में घर न लौटने की चेतावनी दी गई है, क्योंकि दक्षिणी लेबनान में इजरायली सेना की मौजूदगी और रुक-रुक कर हो रहे हमले स्थायी शांति की राह में बड़ी बाधा बने हुए हैं। दक्षिण एशिया की कूटनीतिक सफलता के बावजूद, लेबनान की सीमा पर तनाव कम होने के बजाय और जटिल होता जा रहा है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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युद्धविराम के इज़राइली उल्लंघन के जवाब में, हिज़्बुल्लाह के लड़ाकों ने कफ़र तेबनीत की ओर बढ़ रही इज़राइली बख़्तरबंद सेना को पीछे धकेल दिया और उसे पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। बाद में इज़राइली ड्रोन और तोपखाने के हमलों में एक नागरिक मारा गया और कई अन्य घायल हो गए, जिनमें एक पत्रकार भी शामिल था, जबकि इज़राइली हस्तियों ने अमेरिका-ईरान समझौते की आलोचना की।
इज़राइली ड्रोन हमले ने दक्षिणी लेबनान में एक कार को निशाना बनाया, जिससे उसका चालक मारा गया। अमेरिका-ईरान समझौते की घोषणा के बाद लेबनान में यह पहला घातक इज़राइली हमला था।
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