
अमेरिका ने ईरान पर लगातार छठी रात किए हमले, पुल-हवाई अड्डे को निशाना; हॉरमुज जलडमरूमध्य पर तनाव गहराया
अमेरिकी हमलों में कम से कम 38 लोगों की मौत के बाद ईरान ने खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किए, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और कूटनीतिक वार्ता पर संकट मंडरा रहा है।
अमेरिकी सेना ने ईरान पर लगातार छठी रात हवाई हमले किए, जिनमें दक्षिणी होर्मोज़गान प्रांत में पुल, बंदर अब्बास का रेलवे जंक्शन स्टेशन और इरानशहर हवाई अड्डा शामिल हैं। ईरानी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 22 जून से अब तक अमेरिकी हमलों में 38 लोग मारे गए और 400 से अधिक घायल हुए हैं। सरकारी मीडिया ने बंदर-ए-ख़मीर में दो पुलों पर हुए हमले में सात लोगों की मौत की पुष्टि की, जबकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि उसने ‘सैन्य क्षमताओं को और कमज़ोर करने’ के लिए तटीय निगरानी, वायु रक्षा और सैन्य रसद ठिकानों को निशाना बनाया।
वाशिंगटन का रुख़ यह है कि ये हमले ईरान द्वारा हॉरमुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाज़ों पर किए गए हमलों की प्रतिक्रिया हैं और इनका उद्देश्य नागरिक नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से धमकी दी है कि यदि ईरान वार्ता की मेज़ पर नहीं लौटता तो अगले सप्ताह से बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाया जाएगा। इसी क्रम में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू कर दी है और एक जहाज़ को निष्क्रिय करने के साथ तीन वाणिज्यिक पोतों को रोका या पुनर्निर्देशित किया है।
तेहरान ने इन हमलों को संप्रभुता का उल्लंघन और ‘युद्ध अपराध’ बताया है, विशेषकर अहवाज़ में एक बाल कैंसर अस्पताल के निकट हुए हमले को लेकर। ईरानी सशस्त्र बलों के प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि यदि अमेरिका ने ईरानी बुनियादी ढाँचे को निशाना बनाया तो ‘क्षेत्र की समूची बुनियादी ढाँचा वैध लक्ष्य बन जाएगी’। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत, बहरीन, जॉर्डन और क़तर में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, साथ ही सीरिया में अल-तन्फ़ बेस को भी निशाना बनाया। खाड़ी देशों ने इन हमलों की पुष्टि करते हुए नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी।
यह संघर्ष फरवरी 2026 में अमेरिका-इज़राइल के संयुक्त हमलों से शुरू हुआ था, जिसके बाद ईरान ने हॉरमुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया था। पाकिस्तान और चीन के विदेश मंत्रियों ने दोनों पक्षों से हिंसा रोकने और तकनीकी स्तर की वार्ता फिर से शुरू करने का आह्वान किया है, लेकिन ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ़ ने कहा कि जब तक समझौते से ईरान को लाभ नहीं होता, उसके पालन का कोई कारण नहीं है। वैश्विक तेल कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं और दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है, क्योंकि चाबहार बंदरगाह का नियंत्रण टॉवर क्षतिग्रस्त हुआ है और जलडमरूमध्य से जहाज़ों की आवाजाही लगभग ठप है। फ़िलहाल, पाकिस्तान की मध्यस्थता वाला जून का ज्ञापन ध्वस्त हो चुका है और किसी नई वार्ता की तिथि तय नहीं है।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.40 | critical |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
Latin America condemns US aggression and denounces war crimes against Iranian civilians.
By emphasizing civilian casualties and the legal language of war crimes, a moral framework is created that legitimizes the condemnation of the United States.
It omits Iran's threat to target regional infrastructure, which would portray Tehran as an aggressor.
Russia projects the responsibility for the escalation onto the United States, highlighting Iran's readiness for dialogue.
By contrasting Iran's ongoing negotiations with America's unilateral violence, an image is built of Tehran as a rational actor and Washington as the aggressor.
It omits the Iranian attack on a US airbase in Jordan, which would partially justify the American response.
Atlantic analysis frames the escalation as a strategic crisis in the Strait of Hormuz, with implications for global security.
By selecting strategic targets and contextualizing the escalation within the framework of control over the Strait of Hormuz, the crisis is presented as a matter of power balance rather than morality.
It omits Iranian accusations of war crimes and the impact on civilians, which would shift focus from strategy to morality.
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