
ईरानी मीडिया और इराकी मिलिशिया की ट्रंप को मारने की खुली धमकी, अमेरिका सतर्क
तेहरान में भित्तिचित्रों और वीडियो के ज़रिए हत्या के आह्वान के बीच, ईरान समर्थित इराकी गुट ने अमेरिकी राष्ट्रपति पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम रखा है।
ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया गठबंधन 'इस्लामिक रेसिस्टेंस इन इराक' ने 16 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या के लिए 10 मिलियन डॉलर के इनाम की घोषणा की। इसी दौरान, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़ी फ़ार्स समाचार एजेंसी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया जिसका अंग्रेज़ी शीर्षक था 'ट्रंप को कहां मारा जा सकता है?' इसमें फ्लोरिडा स्थित मार-अ-लागो तक ट्रंप के काफिले के रास्ते को दिखाया गया। तेहरान में सरकारी समर्थन वाले स्थानों पर लगे भित्तिचित्रों में ट्रंप को ताबूत में दिखाया गया और 'हम ट्रंप को मारेंगे' जैसे नारे लिखे गए।
ईरानी सरकारी मीडिया और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स से जुड़े संगठन इन धमकियों को सार्वजनिक रूप से प्रसारित कर रहे हैं। तेहरान के अख़बार हमशहरी ने 13 पश्चिमी नेताओं की 'वांटेड लिस्ट' प्रकाशित की, जिसमें ट्रंप और इज़राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू शीर्ष पर थे। ईरानी राजनीतिक विश्लेषक मोईन खज़ाएली के अनुसार, इन धमकियों का एक बड़ा हिस्सा मनोवैज्ञानिक युद्ध और दिखावटी प्रतिरोध की रणनीति है, जिसका उद्देश्य सैन्य रूप से कमज़ोर पड़े शासन को मज़बूत दिखाना और घरेलू समर्थकों को एकजुट करना है। वहीं, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई ने सार्वजनिक रूप से बदला लेने की शपथ ली है। इराकी मिलिशिया ने अपने बयान में कहा कि यह इनाम 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए ईरानी जनरल क़ासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए रखा गया है।
इन धमकियों ने अमेरिका-ईरान के बीच जारी कूटनीतिक संपर्क को जटिल बना दिया है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लीविट ने कहा कि ईरान के साथ 'निकट संपर्क' बना हुआ है, लेकिन अमेरिकी खुफिया एजेंसियां हत्या की धमकी को वास्तविक ख़तरा मान रही हैं। जर्मन विश्लेषकों के अनुसार, ट्रंप एक रणनीतिक जाल में फंस रहे हैं—वे सार्वजनिक रूप से अपनी हत्या की धमकियों को नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते, लेकिन साथ ही मध्यावधि चुनावों से पहले अलोकप्रिय युद्ध को समाप्त करना चाहते हैं। ईरानी कार्यकर्ता रज़ा अलीजानी का कहना है कि यह अभियान सैन्य विफलताओं से ध्यान हटाने और संघर्ष को वैध ठहराने का प्रयास है।
यह तनाव पूर्व सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद और बढ़ा है, जो फरवरी में अमेरिकी-इज़राइली हवाई हमले में मारे गए थे। अंतिम संस्कार के दौरान प्रदर्शनकारियों ने 'ट्रंप को मारो' के नारे लगाए और ट्रंप समेत कई पश्चिमी हस्तियों के चेहरों पर निशाना साधने वाले पोस्टर लहराए। इस बीच, सैन्य संघर्ष जारी है—अमेरिकी सेना ने दक्षिणी ईरान में पुलों पर हमले किए, जबकि ईरान ने कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमले और सीरिया में अल-तन्फ़ बेस पर हमले का दावा किया। फिलहाल, किसी ठोस अगले कदम की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन वार्ता और सैन्य कार्रवाई के दोहरे रास्ते पर स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.30 | critical |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.40 | critical |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.80 | critical |
हम सवाल उठाते हैं कि क्या यह मुरल वास्तविक खतरे का संकेत है या सिर्फ प्रचार, पाठक को संदेह में छोड़ते हुए।
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हम मुल्लाओं के बेस्वाद प्रचार की निंदा करते हैं जो ट्रंप को ताबूत में दिखाता है, इसे खतरनाक बढ़ोतरी बताते हुए।
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