
पोलैंड के राष्ट्रपति ने समलैंगिक नागरिक संघ विधेयक पर लगाई रोक, सरकार और यूरोपीय संघ में मतभेद
राष्ट्रपति कारोल नावरोत्स्की ने संविधान के हवाले से विधेयक को वीटो कर दिया, जबकि प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क की सरकार इसे नागरिक अधिकारों का विस्तार बता रही है।
पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नावरोत्स्की ने शुक्रवार को दो विधेयकों पर वीटो लगा दिया, जो अविवाहित जोड़ों—जिनमें समलैंगिक जोड़े भी शामिल हैं—को विवाह जैसे कानूनी अधिकार प्रदान करते। इन विधेयकों में ‘निकटतम व्यक्ति का दर्जा’ और ‘सहवास समझौता’ शामिल थे, जिनके तहत दो वयस्क नोटरीकृत अनुबंध के माध्यम से संयुक्त संपत्ति, विरासत, चिकित्सा जानकारी तक पहुंच और अंत्येष्टि अधिकार जैसे लाभ प्राप्त कर सकते थे। राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, यह निर्णय संविधान के अनुच्छेद 18 के अनुरूप है, जो विवाह को केवल ‘एक पुरुष और एक महिला के मिलन’ के रूप में परिभाषित करता है।
राष्ट्रपति नावरोत्स्की, जो रूढ़िवादी खेमे से जुड़े हैं, ने कहा कि संविधान के संरक्षक के रूप में वे ऐसे किसी समाधान को स्वीकार नहीं कर सकते जो विवाह की विशेष स्थिति को कमजोर करता हो। उन्होंने परिवार को ‘राष्ट्र के अस्तित्व का आधार’ बताया। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क के नेतृत्व वाली केंद्रवादी सरकार ने इस वीटो को ‘लोगों और उनके सुख के अधिकार के प्रति अवमानना’ करार दिया। सरकार का तर्क है कि यह कानून उन लाखों नागरिकों को बुनियादी कानूनी सुरक्षा देता जो पारंपरिक विवाह के दायरे से बाहर हैं।
यूरोपीय संघ के संदर्भ में, पोलैंड बुल्गारिया, रोमानिया और स्लोवाकिया के साथ उन अंतिम सदस्य देशों में शामिल है जहां समलैंगिक विवाह या नागरिक संघ को कानूनी मान्यता नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय समलैंगिक, समलैंगिक, उभयलिंगी, ट्रांस और इंटरसेक्स एसोसिएशन (आईएलजीए) की रैंकिंग में पोलैंड लगातार यूरोप में एलजीबीटीआईक्यूए+ अधिकारों के मामले में सबसे निचले पायदान पर रहा है। हालांकि, यूरोपीय संघ के शीर्ष न्यायालय के एक फैसले के बाद पोलैंड विदेश में संपन्न समलैंगिक विवाहों को मान्यता देने लगा है, लेकिन घरेलू स्तर पर ऐसे संबंधों को कानूनी आधार नहीं मिला है।
रूसी राज्य मीडिया के अनुसार, रूस ने भी 2020 में अपने संविधान में संशोधन कर विवाह को केवल स्त्री-पुरुष के मिलन के रूप में परिभाषित किया था और 2021 में यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय के समलैंगिक विवाह को मान्यता देने के आदेश को मानने से इनकार कर दिया था। रूसी संसद ने तब संविधान के अनुच्छेद 79 का हवाला देते हुए कहा था कि अंतरराष्ट्रीय अदालतों के वे फैसले लागू नहीं होंगे जो मूल कानून के विपरीत हों। यह कदम मध्य और पूर्वी यूरोप के कुछ हिस्सों में पारिवारिक कानून को लेकर व्यापक रूढ़िवादी रुख को दर्शाता है।
पोलैंड में समानता मामलों की अधिकारी कातारजीना कोतुला ने संकेत दिया है कि सरकार अब ऐसे जोड़ों के लिए वैकल्पिक कानूनी रास्ते तलाशेगी। हालांकि, सत्तारूढ़ गठबंधन में ही रूढ़िवादी सहयोगी शामिल हैं, जिससे सामाजिक मुद्दों पर आम सहमति बनाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। फिलहाल, राष्ट्रपति के वीटो के बाद विधेयक का भविष्य अनिश्चित है और इसे पुनः संसद में लाने के लिए व्यापक राजनीतिक समर्थन की आवश्यकता होगी।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | +0.90 | aligned |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.20 | neutral |
La Russia celebra il veto del presidente polacco come un atto di difesa della famiglia tradizionale e della sovranità nazionale contro le pressioni liberali dell'UE.
La Russia personifica lo stato polacco nel presidente, presentandolo come un eroe che protegge la costituzione, e demonizza la legge come una minaccia esistenziale per l'istituto del matrimonio.
La Russia omette che la legge era stata proposta dal governo centrista di Tusk per allinearsi agli standard europei e che riguardava tutte le coppie non sposate, non solo quelle omosessuali.
L'America Latina riporta il fatto senza prendere posizione, descrivendo il veto come un atto del presidente conservatore contro una proposta del governo centrista.
L'America Latina adotta un tono distaccato e fattuale, elencando le parti in causa senza giudizio, il che rende la notizia un semplice resoconto di cronaca.
L'America Latina omette il contesto europeo e le pressioni dell'UE per l'adozione di leggi sui diritti LGBT, nonché le reazioni del governo polacco.
L'Europa continentale critica il veto come un ostacolo ai diritti civili e sottolinea l'isolamento della Polonia in materia di riconoscimento delle coppie omosessuali.
L'Europa continentale universalizza la questione inserendola nel quadro dei diritti umani europei, facendo leva sul confronto con altri paesi per evidenziare l'arretratezza della Polonia.
L'Europa continentale omette la giustificazione costituzionale dettagliata del presidente e il fatto che la legge non introduceva il matrimonio ma solo unioni civili.
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