
इराक में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान: बगदाद के ग्रीन ज़ोन में छापे, कई नेता गिरफ़्तार
प्रधानमंत्री अली अल-जैदी के आदेश पर सुरक्षा बलों ने सांसदों और पूर्व मंत्रियों को हिरासत में लिया, तेल तस्करी के आरोपों पर अमेरिकी दबाव की पृष्ठभूमि में
इराकी सुरक्षा बलों ने रविवार तड़के बगदाद के अति-सुरक्षित ग्रीन ज़ोन में बड़े पैमाने पर छापेमारी कर पांच सांसदों समेत कम से कम आठ राजनेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों को गिरफ़्तार किया। इराकी सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के मामलों में जारी न्यायिक वारंट के आधार पर की गई, जिसमें मुख्य गवाही पूर्व उप-तेल मंत्री अदनान अल-जुमैली ने दी थी, जो स्वयं पिछले माह हिरासत में लिए गए थे। ऑपरेशन में आतंकवाद-रोधी सेवा (सीटीएस) और विशेष बलों ने भाग लिया, और पूरे ग्रीन ज़ोन के प्रवेश द्वार बंद कर टैंक व बख्तरबंद गाड़ियां तैनात की गईं। गिरफ़्तार किए गए लोगों में मौजूदा और पूर्व सांसद, कारोबारी, और सुरक्षा अधिकारी शामिल हैं; कुछ रिपोर्टों में एक प्रमुख राजनीतिक नेता के भी पकड़े जाने का दावा है, हालांकि सरकार की ओर से अभी आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है।
प्रधानमंत्री अली अल-जैदी, जो मई में एक व्यवसायी से राजनेता बने और पारंपरिक दलों से इतर उभरे, ने भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ ज़ीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है। इराकी न्यायिक सूत्रों का कहना है कि अल-जुमैली के बयानों ने तेल तस्करी और वित्तीय अनियमितताओं के एक व्यापक नेटवर्क की ओर इशारा किया, जिसमें ईरानी तेल की अवैध ढुलाई और डॉलर की हेराफेरी शामिल है। अमेरिकी अधिकारियों ने निजी तौर पर इस कार्रवाई का स्वागत किया है और इसे ईरान समर्थित गुटों पर लगाम कसने की दिशा में एक क़दम बताया है। दूसरी ओर, ईरान से संबद्ध इराकी धड़ों और उनके मीडिया आउटलेटों ने चेतावनी दी है कि चुनिंदा निशाना साधने से राजनीतिक प्रक्रिया अस्थिर हो सकती है और यह बाहरी दबाव में उठाया गया क़दम हो सकता है।
यह ऑपरेशन ऐसे समय में हुआ है जब अल-जैदी जुलाई में वॉशिंगटन की महत्वपूर्ण यात्रा की तैयारी कर रहे हैं, जिसका लक्ष्य इराक-अमेरिका संबंधों को सैन्य साझेदारी से आर्थिक और विकास साझेदारी में बदलना है। साथ ही, फ़ारस की खाड़ी में ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी का इराकी अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि गिरफ़्तारियों से सत्ता संतुलन प्रभावित हो सकता है, क्योंकि हिरासत में लिए गए कुछ लोग पूर्व प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया अल-सुदानी और ईरान समर्थक ‘स्टेट ऑफ़ लॉ’ गठबंधन के करीबी माने जाते हैं। विशेष बात यह भी है कि संसद के ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान सांसदों की उन्मुक्ति समाप्त करने की प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल हो गई है, जिससे ये गिरफ़्तारियां संभव हुईं।
अभियान आने वाले दिनों में जारी रहने की संभावना है, और अधिक गिरफ़्तारियों के संकेत हैं। इराकी सरकार ने कहा है कि वह भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ लड़ाई में कोई कोताही नहीं बरतेगी, लेकिन अभी तक औपचारिक बयान जारी नहीं हुआ है। अगले क़दमों में न्यायिक जांच को आगे बढ़ाना और गिरफ़्तार लोगों को अदालतों में पेश करना शामिल होगा। यह देखना बाकी है कि क्या यह कार्रवाई संस्थागत सुधारों की शुरुआत बनती है या राजनीतिक दबाव के कारण चुनिंदा मामलों तक सीमित रह जाती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ
Iranian media highlight the confrontational aspect of the operation, with gunfire and escape attempts, emphasizing the arrest of high-ranking political figures. The narrative frames the event as a drastic action that could trigger a political crisis. The tone is alarmed and critical, suggesting instability.
Continental European media, such as AFP, describe the operation as a targeted anti-corruption raid with army support, without dramatization. They focus on legal aspects and the presence of special forces, maintaining a neutral and detached tone.
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