
विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में राजकोषीय दबाव: व्यापार घाटा और बजट लक्ष्यों की चुनौती
इंडोनेशिया, भारत, मोरक्को, कोलंबिया और ब्राज़ील से आए आंकड़े बताते हैं कि बाहरी और आंतरिक संतुलन एक साथ बिगड़ रहे हैं, जिससे नीतिगत विकल्प सीमित हो रहे हैं।
मई 2026 में इंडोनेशिया का व्यापार संतुलन छह वर्षों में पहली बार घाटे में गया, जबकि भारत का राजकोषीय घाटा अप्रैल-मई में ही वार्षिक लक्ष्य के 9.6 प्रतिशत तक पहुंच गया। मोरक्को में पहले पांच महीनों का व्यापार घाटा 20.8 प्रतिशत बढ़कर 159 अरब दिरहम पार कर गया। लैटिन अमेरिका में कोलंबिया के बजट का 54.5 प्रतिशत वित्तपोषण अभी भी लंबित है, और ब्राज़ील के राष्ट्रीय राजकोष ने चेतावनी दी है कि बिना अतिरिक्त उपायों के 2028 से 2030 तक राजकोषीय लक्ष्य की निचली सीमा भी हासिल नहीं होगी।
इन घाटों के पीछे साझा कारक हैं: आयात में तेज़ वृद्धि, विशेष रूप से ऊर्जा और कच्चे माल में, तथा सरकारी व्यय का राजस्व से अधिक तेज़ी से बढ़ना। इंडोनेशिया में तेल और गैस व्यापार घाटा 3.76 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जबकि गैर-तेल निर्यात चीन, अमेरिका और भारत को होने वाले खनिज ईंधन व निकल निर्यात के बूते अधिशेष में रहा। भारत में पेट्रोल और डीज़ल पर उत्पाद शुल्क में कटौती के बाद अप्रैल-मई में उत्पाद शुल्क संग्रह लगभग 20 प्रतिशत गिर गया, जबकि कुल व्यय 18 प्रतिशत बढ़ा। मोरक्को में ऊर्जा और तैयार उपकरणों के आयात में क्रमशः 20.7 और 18.7 प्रतिशत की वृद्धि ने व्यापार अंतर को चौड़ा किया।
संस्थागत प्रतिक्रियाएं क्षेत्र के अनुसार भिन्न हैं। इंडोनेशिया का केंद्रीय बैंक रुपिए को स्थिर करने के लिए विदेशी मुद्रा और बॉन्ड बाज़ार में हस्तक्षेप कर रहा है, साथ ही निर्यात आय को घरेलू वित्तीय प्रणाली में रखने और स्थानीय मुद्रा में व्यापार निपटान को बढ़ावा दे रहा है। ब्राज़ील में राजकोष का आकलन है कि 2028 से 2030 के बीच सालाना औसतन 0.4 प्रतिशत जीडीपी के व्यय अवरोध के बावजूद लक्ष्य पूरा नहीं होगा; रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी प्राप्तियां 16 प्रतिशत बढ़ी हैं जबकि व्यय में 22 प्रतिशत की वास्तविक वृद्धि हुई है। कोलंबिया के नियंत्रक कार्यालय ने संकेत दिया कि कर संग्रह लक्ष्य से 32 अरब पेसो कम है, जिससे सार्वजनिक व्यय में लगभग 27.18 अरब पेसो की कटौती की आवश्यकता हो सकती है।
दक्षिण एशिया के लिए, भारत का राजकोषीय घाटा रिकॉर्ड 2.8 लाख करोड़ रुपये के आरबीआई अधिशेष हस्तांतरण के बावजूद बढ़ा, क्योंकि राजस्व प्राप्तियां पिछले वर्ष के 7 लाख करोड़ से घटकर 6.9 लाख करोड़ रुपये रह गईं। पूंजीगत व्यय पर जोर जारी रहा, जो पहले दो महीनों में ही वार्षिक लक्ष्य का 21 प्रतिशत पार कर गया। इससे यह संकेत मिलता है कि क्षेत्र की सरकारें विकास को गति देने के लिए व्यय बढ़ा रही हैं, लेकिन राजस्व संग्रह में सुस्ती और बाहरी दबाव उनकी गुंजाइश को सीमित कर रहे हैं।
अगला ध्यान देने योग्य मील का पत्थर इन देशों में आगामी बजट समीक्षा और चुनावी चक्र होंगे। ब्राज़ील और कोलंबिया में 2026 के राष्ट्रपति चुनावों के बाद नई सरकारों को राजकोषीय सुधार के ठोस रोडमैप प्रस्तुत करने होंगे। भारत में पूर्ण बजट की प्रस्तुति से यह स्पष्ट होगा कि सरकार व्यय प्राथमिकताओं और राजस्व बढ़ाने के उपायों के बीच कैसे संतुलन साधती है।
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | +0.40 | aligned |
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| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
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