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जब एक मूंगफली का छिलका बन गया डर का प्रतीकवैश्विक अर्थव्यवस्था में निवेश की मजबूती और डिजिटल वित्तीय जोखिमों का दबावईरान के सर्वोच्च नेता ने ट्रंप के हस्ताक्षर को 'बेकार' बताया, अमेरिका को 'अविस्मरणीय सबक' की चेतावनीजोश केर ने 27 साल बाद तोड़ा मील का विश्व रिकॉर्ड, 3:42.66 में रचा इतिहासतेहरान में ट्रंप विरोधी होर्डिंग्स और आंतरिक सत्ता संघर्ष: युद्धविराम टूटने के बाद बढ़ा तनावशंघाई में WAICO की स्थापना: ग्लोबल साउथ के लिए AI में समान पहुंच की नई पहलजॉर्डन में ईरानी हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत, एक लापता; युद्धविराम की उम्मीदें ध्वस्तस्पेन, मोरक्को और अल्जीरिया में भीषण ताप लहर, पारा 49 डिग्री तक पहुंचने की चेतावनीजब एक मूंगफली का छिलका बन गया डर का प्रतीकवैश्विक अर्थव्यवस्था में निवेश की मजबूती और डिजिटल वित्तीय जोखिमों का दबावईरान के सर्वोच्च नेता ने ट्रंप के हस्ताक्षर को 'बेकार' बताया, अमेरिका को 'अविस्मरणीय सबक' की चेतावनीजोश केर ने 27 साल बाद तोड़ा मील का विश्व रिकॉर्ड, 3:42.66 में रचा इतिहासतेहरान में ट्रंप विरोधी होर्डिंग्स और आंतरिक सत्ता संघर्ष: युद्धविराम टूटने के बाद बढ़ा तनावशंघाई में WAICO की स्थापना: ग्लोबल साउथ के लिए AI में समान पहुंच की नई पहलजॉर्डन में ईरानी हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत, एक लापता; युद्धविराम की उम्मीदें ध्वस्तस्पेन, मोरक्को और अल्जीरिया में भीषण ताप लहर, पारा 49 डिग्री तक पहुंचने की चेतावनी
मीडिया और मनोरंजनगुरुवार, 9 जुलाई 2026

हाउते कॉउचर में भारत की बढ़ती मौजूदगी: बिरकिन से मल्होत्रा तक

पेरिस के सबसे विशिष्ट फैशन मंच पर इस बार भारतीय डिज़ाइनरों, कारीगरी और विरासत ने नए आयाम छुए, जहाँ इशा अंबानी का दो मिलियन डॉलर का बैग और मनीष मल्होत्रा का भावनात्मक संग्रह चर्चा में रहा।

राहुल मिश्रा के शो की अगली कतार में एक छोटा-सा बैग चुपचाप सबकी निगाहें खींच रहा था। सफ़ेद सोने पर हज़ारों हीरों से जड़ा हर्मेस बिरकिन सैक बीजू—क़रीब दो मिलियन डॉलर की एक मुट्ठी भर चमक—इशा अंबानी के हाथों में उतना ही सहज लग रहा था जितना कोई साधारण क्लच। ग्रे स्ट्रैपलेस गाउन और डायमंड नेकलेस के साथ वह पेरिस हाउते कॉउचर वीक के उस पल में भारतीय लक्ज़री की एक जीवित तस्वीर बन गईं, जहाँ परंपरा और अतिवाद एक साथ साँस लेते हैं।

यह दृश्य महज़ एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं था। इसी सप्ताह मनीष मल्होत्रा ने अपनी माँ को समर्पित ‘माँ’ संग्रह के साथ पेरिस के आधिकारिक कैलेंडर में क़दम रखा। शुरुआती आउटफिट में एक लंबा कोट था जिस पर एक लड़के और उसकी माँ के जीवन के अलग-अलग चरणों की मूर्तियाँ उकेरी गई थीं; एक और ड्रेस में कट-आउट आकृतियाँ मॉडल के चलने पर गले मिलती दिखती थीं। मल्होत्रा ने एएफ़पी से कहा, “मुझे लगता है यह बहुत पहले हो जाना चाहिए था।” उनके साथ राहुल मिश्रा, गौरव गुप्ता और वैशाली एस पहले ही इस मंच पर भारतीय कारीगरी की मिसाल बन चुके थे।

यूरोपीय मीडिया ने इस बदलाव को एक ऐतिहासिक सुधार की तरह देखा। फ़्रेंच फ़ेडरेशन ऑफ़ हाउते कॉउचर एंड फ़ैशन सक्रिय रूप से ग़ैर-पश्चिमी लेबलों को आमंत्रित कर रहा है, और भारतीय डिज़ाइनरों की मौजूदगी अब किसी अपवाद की नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति की बानगी है। मल्होत्रा का कहना था कि भारत की बुनावट, कशीदाकारी और शाही विरासत इतनी समृद्ध है कि यह मंच उसका स्वाभाविक विस्तार है। दूसरी ओर, हर्मेस ने घोषणा की कि वह जनवरी 2027 में अपना पहला हाउते कॉउचर संग्रह पेश करेगा—एक ऐसा क़दम जो दशकों से बिरकिन और केली बैगों के लिए मशहूर इस घराने को परिधान की सबसे ऊँची श्रेणी में ले जाएगा।

इस पूरे सप्ताह नवाचार और विरासत के बीच एक नाज़ुक संतुलन दिखा। बालेंसियागा में पियरपाओलो पिक्कियोली ने 1958 के गाज़ार कपड़े को नियो गाज़ार के रूप में पुनर्जीवित किया और साथ ही बायो-इंजीनियर्ड सिल्क का इस्तेमाल कर यह साबित किया कि तकनीक और परंपरा एक ही सिलाई में बँध सकती हैं। चैनल में मैथ्यू ब्लेज़ी ने परियों की कहानियों से प्रेरित होकर फूलों, तितलियों और पक्षियों जैसे आकारों वाले जूते-बैग पेश किए, जिन्हें लैटिन अमेरिकी दर्शकों ने ख़ासा सराहा। मेक्सिकन गायिका डाना ने रॉबर्ट वुन के शो में चॉकलेट ब्राउन सैटिन गाउन पहनकर अपने “कॉउचर सपने” को जीया और इंस्टाग्राम पर लिखा कि वह बरसों से इस पल का इंतज़ार कर रही थीं।

इन सबके बीच, सबसे स्थायी छवि शायद वह है जो न तो किसी रनवे पर चली और न ही किसी फ़्रंट रो में बैठी—वह है भारतीय कारीगरों की वह ख़ामोश उपस्थिति, जिनकी कढ़ाई और बुनाई यूरोपीय घरानों की शान बनी हुई है। मनीष मल्होत्रा का भावुक संग्रह और इशा अंबानी का हीरों भरा बिरकिन दोनों एक ही सच्चाई की ओर इशारा करते हैं: हाउते कॉउचर अब सिर्फ़ पेरिस की बपौती नहीं रहा, बल्कि एक ऐसी भाषा बन गया है जिसे भारत अपनी लय में बोलने लगा है।

विचलन — कौन इसे कैसे बताता है
अक्ष: Relevance vs. Emotion
33%मध्यम
3 ब्लॉक · स्थिति 0.00 से +0.80 तक
skeptical neutralityemotional celebration
ATLINDGLF
प्रेस ब्लॉकों के बीच विचलन
अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस+0.30aligned
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस+0.80aligned
अरब खाड़ी प्रेस0.00neutral
अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस+0.30
स्वर

हाउते कूटूर सप्ताह सितारों से भरे शो और चिलचिलाती गर्मी के साथ चकाचौंध करता है, फैशन की मोहित करने की शक्ति साबित करता है।

तंत्रspettacolarizzazione

विशिष्टता, सेलिब्रिटी उपस्थिति और शिल्प कौशल के घंटों की संख्या पर जोर देकर, कवरेज इस आयोजन को आकांक्षी और अभेद्य दोनों बनाता है।

चूक

कवरेज भारतीय डिजाइनर मनीष मल्होत्रा की शुरुआत को छोड़ देता है, जिनका भावनात्मक संग्रह 'माँ' दक्षिण एशियाई दर्शकों के लिए एक मुख्य आकर्षण था, इस प्रकार एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कथा को खो देता है जो पश्चिमी ब्रांडों पर इसके ध्यान को जटिल बना देगा।

विजयव्यावहारिकता
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस+0.80
स्वर

पेरिस कूटूर सप्ताह में मनीष मल्होत्रा की शुरुआत प्यार और स्मृति की विजय है, एक बेटे की अपनी माँ के अटूट विश्वास को श्रद्धांजलि जिसने उसके सपनों को संभव बनाया।

तंत्रemotivizzazione

बचपन की यादों और मातृ बलिदान की गहरी व्यक्तिगत कथा बुनकर, कवरेज एक फैशन शुरुआत को पारिवारिक प्रेम और दृढ़ता की एक सार्वभौमिक कहानी में बदल देता है, जिससे उपलब्धि अंतरंग और संबंधित हो जाती है।

चूक

कवरेज गर्मी की लहर और अन्य प्रमुख डिजाइनरों के शो के व्यापक संदर्भ को छोड़ देता है, विशेष रूप से मल्होत्रा की भावनात्मक कहानी पर ध्यान केंद्रित करता है, जिसे संकीर्ण और कार्यक्रम की प्रतिस्पर्धी प्रकृति को अनदेखा करने के रूप में देखा जा सकता है।

विजयव्यावहारिकता
अरब खाड़ी प्रेस0.00
स्वर

कूटूर सप्ताह की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया जाता है, लेकिन प्रदर्शित कलात्मकता संदेह करने वालों को चुप करा देती है, क्योंकि नए डिजाइनर ताजा दृष्टि लाते हैं जो सामान्य बहसों से परे है।

तंत्रdialettica dello scetticismo

पहले हाउते कूटूर की मानक आलोचनाओं को उठाकर और फिर यह देखते हुए कि डिजाइनर स्वयं उनसे जुड़ नहीं रहे हैं, कवरेज कलात्मकता को स्वयं-स्पष्ट और क्षुद्र चिंताओं से ऊपर रखता है, इस प्रकार बचावात्मक तर्क के बिना कार्यक्रम को मान्य करता है।

चूक

कवरेज लैटिन अमेरिकी कवरेज द्वारा उजागर किए गए सेलिब्रिटी उपस्थिति और चंचल, विलक्षण सहायक उपकरणों को छोड़ देता है, साथ ही मनीष मल्होत्रा जैसी भावनात्मक व्यक्तिगत कहानियों को भी, इसके बजाय कलात्मक योग्यता और उद्योग की आंतरिक बहसों पर ध्यान केंद्रित करता है।

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जब एक मूंगफली का छिलका बन गया डर का प्रतीक·वैश्विक अर्थव्यवस्था में निवेश की मजबूती और डिजिटल वित्तीय जोखिमों का दबाव·ईरान के सर्वोच्च नेता ने ट्रंप के हस्ताक्षर को 'बेकार' बताया, अमेरिका को 'अविस्मरणीय सबक' की चेतावनी·जोश केर ने 27 साल बाद तोड़ा मील का विश्व रिकॉर्ड, 3:42.66 में रचा इतिहास·तेहरान में ट्रंप विरोधी होर्डिंग्स और आंतरिक सत्ता संघर्ष: युद्धविराम टूटने के बाद बढ़ा तनाव·शंघाई में WAICO की स्थापना: ग्लोबल साउथ के लिए AI में समान पहुंच की नई पहल·जॉर्डन में ईरानी हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत, एक लापता; युद्धविराम की उम्मीदें ध्वस्त·स्पेन, मोरक्को और अल्जीरिया में भीषण ताप लहर, पारा 49 डिग्री तक पहुंचने की चेतावनी·जब एक मूंगफली का छिलका बन गया डर का प्रतीक·वैश्विक अर्थव्यवस्था में निवेश की मजबूती और डिजिटल वित्तीय जोखिमों का दबाव·ईरान के सर्वोच्च नेता ने ट्रंप के हस्ताक्षर को 'बेकार' बताया, अमेरिका को 'अविस्मरणीय सबक' की चेतावनी·जोश केर ने 27 साल बाद तोड़ा मील का विश्व रिकॉर्ड, 3:42.66 में रचा इतिहास·तेहरान में ट्रंप विरोधी होर्डिंग्स और आंतरिक सत्ता संघर्ष: युद्धविराम टूटने के बाद बढ़ा तनाव·शंघाई में WAICO की स्थापना: ग्लोबल साउथ के लिए AI में समान पहुंच की नई पहल·जॉर्डन में ईरानी हमले में दो अमेरिकी सैनिकों की मौत, एक लापता; युद्धविराम की उम्मीदें ध्वस्त·स्पेन, मोरक्को और अल्जीरिया में भीषण ताप लहर, पारा 49 डिग्री तक पहुंचने की चेतावनी·
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गुरुवार, 9 जुलाई 2026

हाउते कॉउचर में भारत की बढ़ती मौजूदगी: बिरकिन से मल्होत्रा तक

पेरिस के सबसे विशिष्ट फैशन मंच पर इस बार भारतीय डिज़ाइनरों, कारीगरी और विरासत ने नए आयाम छुए, जहाँ इशा अंबानी का दो मिलियन डॉलर का बैग और मनीष मल्होत्रा का भावनात्मक संग्रह चर्चा में रहा।

राहुल मिश्रा के शो की अगली कतार में एक छोटा-सा बैग चुपचाप सबकी निगाहें खींच रहा था। सफ़ेद सोने पर हज़ारों हीरों से जड़ा हर्मेस बिरकिन सैक बीजू—क़रीब दो मिलियन डॉलर की एक मुट्ठी भर चमक—इशा अंबानी के हाथों में उतना ही सहज लग रहा था जितना कोई साधारण क्लच। ग्रे स्ट्रैपलेस गाउन और डायमंड नेकलेस के साथ वह पेरिस हाउते कॉउचर वीक के उस पल में भारतीय लक्ज़री की एक जीवित तस्वीर बन गईं, जहाँ परंपरा और अतिवाद एक साथ साँस लेते हैं।

यह दृश्य महज़ एक सोशल मीडिया पोस्ट नहीं था। इसी सप्ताह मनीष मल्होत्रा ने अपनी माँ को समर्पित ‘माँ’ संग्रह के साथ पेरिस के आधिकारिक कैलेंडर में क़दम रखा। शुरुआती आउटफिट में एक लंबा कोट था जिस पर एक लड़के और उसकी माँ के जीवन के अलग-अलग चरणों की मूर्तियाँ उकेरी गई थीं; एक और ड्रेस में कट-आउट आकृतियाँ मॉडल के चलने पर गले मिलती दिखती थीं। मल्होत्रा ने एएफ़पी से कहा, “मुझे लगता है यह बहुत पहले हो जाना चाहिए था।” उनके साथ राहुल मिश्रा, गौरव गुप्ता और वैशाली एस पहले ही इस मंच पर भारतीय कारीगरी की मिसाल बन चुके थे।

यूरोपीय मीडिया ने इस बदलाव को एक ऐतिहासिक सुधार की तरह देखा। फ़्रेंच फ़ेडरेशन ऑफ़ हाउते कॉउचर एंड फ़ैशन सक्रिय रूप से ग़ैर-पश्चिमी लेबलों को आमंत्रित कर रहा है, और भारतीय डिज़ाइनरों की मौजूदगी अब किसी अपवाद की नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति की बानगी है। मल्होत्रा का कहना था कि भारत की बुनावट, कशीदाकारी और शाही विरासत इतनी समृद्ध है कि यह मंच उसका स्वाभाविक विस्तार है। दूसरी ओर, हर्मेस ने घोषणा की कि वह जनवरी 2027 में अपना पहला हाउते कॉउचर संग्रह पेश करेगा—एक ऐसा क़दम जो दशकों से बिरकिन और केली बैगों के लिए मशहूर इस घराने को परिधान की सबसे ऊँची श्रेणी में ले जाएगा।

इस पूरे सप्ताह नवाचार और विरासत के बीच एक नाज़ुक संतुलन दिखा। बालेंसियागा में पियरपाओलो पिक्कियोली ने 1958 के गाज़ार कपड़े को नियो गाज़ार के रूप में पुनर्जीवित किया और साथ ही बायो-इंजीनियर्ड सिल्क का इस्तेमाल कर यह साबित किया कि तकनीक और परंपरा एक ही सिलाई में बँध सकती हैं। चैनल में मैथ्यू ब्लेज़ी ने परियों की कहानियों से प्रेरित होकर फूलों, तितलियों और पक्षियों जैसे आकारों वाले जूते-बैग पेश किए, जिन्हें लैटिन अमेरिकी दर्शकों ने ख़ासा सराहा। मेक्सिकन गायिका डाना ने रॉबर्ट वुन के शो में चॉकलेट ब्राउन सैटिन गाउन पहनकर अपने “कॉउचर सपने” को जीया और इंस्टाग्राम पर लिखा कि वह बरसों से इस पल का इंतज़ार कर रही थीं।

इन सबके बीच, सबसे स्थायी छवि शायद वह है जो न तो किसी रनवे पर चली और न ही किसी फ़्रंट रो में बैठी—वह है भारतीय कारीगरों की वह ख़ामोश उपस्थिति, जिनकी कढ़ाई और बुनाई यूरोपीय घरानों की शान बनी हुई है। मनीष मल्होत्रा का भावुक संग्रह और इशा अंबानी का हीरों भरा बिरकिन दोनों एक ही सच्चाई की ओर इशारा करते हैं: हाउते कॉउचर अब सिर्फ़ पेरिस की बपौती नहीं रहा, बल्कि एक ऐसी भाषा बन गया है जिसे भारत अपनी लय में बोलने लगा है।

विचलन — कौन इसे कैसे बताता है
अक्ष: Relevance vs. Emotion
33%मध्यम
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skeptical neutralityemotional celebration
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प्रेस ब्लॉकों के बीच विचलन
अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस+0.30aligned
भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस+0.80aligned
अरब खाड़ी प्रेस0.00neutral
अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस+0.30
स्वर

हाउते कूटूर सप्ताह सितारों से भरे शो और चिलचिलाती गर्मी के साथ चकाचौंध करता है, फैशन की मोहित करने की शक्ति साबित करता है।

तंत्रspettacolarizzazione

विशिष्टता, सेलिब्रिटी उपस्थिति और शिल्प कौशल के घंटों की संख्या पर जोर देकर, कवरेज इस आयोजन को आकांक्षी और अभेद्य दोनों बनाता है।

चूक

कवरेज भारतीय डिजाइनर मनीष मल्होत्रा की शुरुआत को छोड़ देता है, जिनका भावनात्मक संग्रह 'माँ' दक्षिण एशियाई दर्शकों के लिए एक मुख्य आकर्षण था, इस प्रकार एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक कथा को खो देता है जो पश्चिमी ब्रांडों पर इसके ध्यान को जटिल बना देगा।

विजयव्यावहारिकता
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पेरिस कूटूर सप्ताह में मनीष मल्होत्रा की शुरुआत प्यार और स्मृति की विजय है, एक बेटे की अपनी माँ के अटूट विश्वास को श्रद्धांजलि जिसने उसके सपनों को संभव बनाया।

तंत्रemotivizzazione

बचपन की यादों और मातृ बलिदान की गहरी व्यक्तिगत कथा बुनकर, कवरेज एक फैशन शुरुआत को पारिवारिक प्रेम और दृढ़ता की एक सार्वभौमिक कहानी में बदल देता है, जिससे उपलब्धि अंतरंग और संबंधित हो जाती है।

चूक

कवरेज गर्मी की लहर और अन्य प्रमुख डिजाइनरों के शो के व्यापक संदर्भ को छोड़ देता है, विशेष रूप से मल्होत्रा की भावनात्मक कहानी पर ध्यान केंद्रित करता है, जिसे संकीर्ण और कार्यक्रम की प्रतिस्पर्धी प्रकृति को अनदेखा करने के रूप में देखा जा सकता है।

विजयव्यावहारिकता
अरब खाड़ी प्रेस0.00
स्वर

कूटूर सप्ताह की प्रासंगिकता पर सवाल उठाया जाता है, लेकिन प्रदर्शित कलात्मकता संदेह करने वालों को चुप करा देती है, क्योंकि नए डिजाइनर ताजा दृष्टि लाते हैं जो सामान्य बहसों से परे है।

तंत्रdialettica dello scetticismo

पहले हाउते कूटूर की मानक आलोचनाओं को उठाकर और फिर यह देखते हुए कि डिजाइनर स्वयं उनसे जुड़ नहीं रहे हैं, कवरेज कलात्मकता को स्वयं-स्पष्ट और क्षुद्र चिंताओं से ऊपर रखता है, इस प्रकार बचावात्मक तर्क के बिना कार्यक्रम को मान्य करता है।

चूक

कवरेज लैटिन अमेरिकी कवरेज द्वारा उजागर किए गए सेलिब्रिटी उपस्थिति और चंचल, विलक्षण सहायक उपकरणों को छोड़ देता है, साथ ही मनीष मल्होत्रा जैसी भावनात्मक व्यक्तिगत कहानियों को भी, इसके बजाय कलात्मक योग्यता और उद्योग की आंतरिक बहसों पर ध्यान केंद्रित करता है।

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