
हूती विद्रोहियों का लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों पर हमला, ईरान-अमेरिका संघर्ष में नया मोर्चा
यमन के ईरान समर्थित हूती लड़ाकों ने दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमला कर बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को खतरे में डाल दिया, जिससे वैश्विक तेल कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों ‘एन्सीलिया’ और ‘लेयला’ पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से हमला करने का दावा किया है। सऊदी अरब की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, एन्सीलिया पर हमले से जहाज के अगले हिस्से में आग लग गई, हालांकि सभी चालक दल सुरक्षित हैं और कोई हताहत नहीं हुआ। लेयला पर हमले की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। इस घटना के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत क्षणिक रूप से 100 डॉलर प्रति बैरल के पार चली गई, जो लगभग दो महीने का उच्चतम स्तर है।
हूती विद्रोहियों के बयान के अनुसार, यह हमला सऊदी अरब के खिलाफ घोषित समुद्री नाकेबंदी का हिस्सा है, जिसे उन्होंने यमन पर वर्षों से जारी सऊदी नाकेबंदी और हाल ही में सना हवाई अड्डे पर हुए हमले का जवाब बताया है। दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को जिम्मेदार ठहराते हुए चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी हमले पर हूती और ईरान दोनों को “बड़ी सैन्य सजा” दी जाएगी। अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) के अनुसार, अमेरिकी सेना ने लगातार बारहवीं रात ईरानी समुद्री क्षमताओं, मिसाइल भंडारण स्थलों और वायु रक्षा परिसंपत्तियों पर हमले किए। ईरानी सेना के प्रवक्ता के अनुसार, जब तक अमेरिकी हमले जारी रहेंगे, ईरान की जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी; ईरान ने कुवैत और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमलों का दावा भी किया है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार विशेषेषज्ञों के अनुसार, हूती हमले ने होर्मुज जलडमरूमध्य के लगभग पूर्ण बंद होने के साथ ही बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को भी खतरे में डाल दिया है, जिससे विश्व व्यापार के लगभग 12 प्रतिशत और वैश्विक कंटेनर यातायात के एक-चौथाई हिस्से का मार्ग प्रभावित हो सकता है। सऊदी अरब ने होर्मुज से बचने के लिए लाखों बैरल तेल प्रतिदिन पाइपलाइन के जरिए लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह की ओर मोड़ रखा था, लेकिन अब यह वैकल्पिक निर्यात मार्ग भी संकट में है। यूरोपीय केंद्रीय बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड ने चेतावनी दी कि इस ऊर्जा झटके से मुद्रास्फीति और बढ़ सकती है। दक्षिण एशियाई आर्थिक विश्लेषकों के अनुसार, भारत जैसे प्रमुख तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें आयात बिल, चालू खाता घाटा और घरेलू ईंधन मूल्यों पर दबाव डालेंगी, साथ ही लंबे शिपिंग मार्गों से आपूर्ति श्रृंखला की लागत भी बढ़ेगी।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के अनुसार, स्थिति “नियंत्रण से बाहर” होती जा रही है और एक संकट दूसरे को जन्म दे रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ईरान ने हूती विद्रोहियों को लाल सागर में हमलों के लिए “फंसा” लिया है और ईरान हर रात अधिक कीमत चुकाएगा। वहीं, ओमान के मध्यस्थता प्रयासों के अनुसार, वह हूती और सऊदी अरब के बीच बातचीत फिर से शुरू करने का प्रयास कर रहा है, लेकिन अभी तक किसी युद्धविराम की संभावना नहीं दिखी। अमेरिकी हमले लगातार जारी हैं और ईरान ने जवाबी कार्रवाई जारी रखने की घोषणा की है, जिससे निकट भविष्य में इस दोहरे समुद्री संकट के और गहराने की आशंका है।
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| इज़राइली प्रेस | −0.10 | neutral |
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | −0.50 | critical |
India and South Asia record the events with detachment, giving space to both narratives.
Including Iran's counter-claim of hitting US bases in Kuwait alongside the US strikes creates an impression of balanced reporting, implying that both sides are engaged in mutual escalation.
Does not mention civilian casualties from US strikes, which are reported by sub-Saharan African press.
Israel warns that the Houthi attack creates a new oil chokepoint, expanding the threat to global security.
By framing the Houthi attack as a new chokepoint alongside the Strait of Hormuz, the bloc elevates the strategic stakes, making the conflict appear as a direct threat to global energy supplies and justifying a more aggressive response.
Does not mention casualties from US strikes or Iran's claim of hitting bases in Kuwait, focusing only on the oil threat.
Sub-Saharan Africa denounces the human cost of US strikes, highlighting civilian casualties and questioning military justifications.
By reporting the number of killed and wounded from US strikes, the bloc shifts the focus from strategic narratives to human suffering, undermining the legitimacy of the US campaign.
Does not mention the strategic oil threat or Iran's claim, focusing only on the human consequences of US strikes.
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