
तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी मुद्रास्फीति की आशंका से सोना दो सप्ताह के निचले स्तर पर
अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चे तेल में तेज़ी और फेडरल रिज़र्व की सख्ती की बढ़ती संभावनाओं के बीच सोने की चमक फीकी पड़ गई।
सोने की हाज़िर कीमत मंगलवार को 0.2 प्रतिशत गिरकर 3,993.83 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, जो दो सप्ताह का न्यूनतम स्तर है। इससे पिछले सत्र में कीमती धातु ने लगभग 3 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की थी, जो एक महीने से अधिक समय में सबसे बड़ी दैनिक प्रतिशत हानि है। अमेरिकी वायदा बाज़ार में अगस्त डिलीवरी का सोना 4,000.70 डॉलर पर स्थिर रहा।
यह दबाव मुख्य रूप से कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल से उपजा है। अमेरिकी सेना ने लगातार तीसरी रात ईरान पर हमले किए और होर्मुज़ जलडमरूमध्य में दो टैंकरों पर गोलीबारी की घटनाओं के बाद तेल वायदा जून के मध्य के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, जो पिछले सत्र में लगभग 9 प्रतिशत चढ़ा था। ऊर्जा की बढ़ती लागत ने वैश्विक मुद्रास्फीति के दबाव की चिंता को बल दिया, जिससे निवेशकों को उम्मीद है कि अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों में और वृद्धि कर सकता है।
फेडरल रिज़र्व के गवर्नर क्रिस्टोफर वॉलर ने सोमवार को कहा कि यदि आगामी आँकड़े मुद्रास्फीति को 2 प्रतिशत के लक्ष्य से काफ़ी ऊपर दिखाते हैं तो ब्याज दरों में 'निकट भविष्य में' बढ़ोतरी की ज़रूरत पड़ सकती है। इस बयान के बाद सितंबर में दर वृद्धि की संभावना सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार एक सप्ताह पहले के 57 प्रतिशत से बढ़कर 76-78 प्रतिशत तक पहुँच गई। ऊँची ब्याज दरें ब्याज-रहित सोने की अपेक्षा बॉन्ड जैसी आय-उत्पादक परिसंपत्तियों को अधिक आकर्षक बनाती हैं, जिससे सोने पर दबाव बनता है।
वैश्विक बाज़ारों की निगाहें अब उसी दिन जारी होने वाले जून के अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर टिकी हैं। इसके अलावा उत्पादक मूल्य सूचकांक (पीपीआई) और फेड चेयर केविन वॉर्श की कांग्रेस के समक्ष पहली अर्धवार्षिक गवाही भी इस सप्ताह केंद्र में रहेगी। टेस्टीलाइव के वैश्विक मैक्रो प्रमुख इल्या स्पिवाक के अनुसार, बाज़ार फ़िलहाल कोई स्पष्ट दिशा पकड़ने को तैयार नहीं हैं, क्योंकि सामने मध्य-पूर्व की सुर्खियों के अतिरिक्त सीपीआई और वॉर्श की गवाही जैसी बड़ी घटनाएँ हैं।
अन्य कीमती धातुओं में भी गिरावट रही: चाँदी 1.2 प्रतिशत गिरकर 56.98 डॉलर प्रति औंस पर आ गई, प्लैटिनम 1 प्रतिशत टूटकर 1,589.35 डॉलर पर और पैलेडियम 0.4 प्रतिशत फिसलकर 1,242.54 डॉलर पर आ गया। मुद्रा बाज़ार में डॉलर सूचकांक 0.09 प्रतिशत गिरकर 101.18 पर रहा, जबकि यूरो और पाउंड में मामूली बढ़त दर्ज हुई। अगला तथ्यात्मक पड़ाव अमेरिकी सीपीआई आँकड़ों का जारी होना और फेड चेयर की कांग्रेसी गवाही है, जो निकट अवधि में ब्याज दर की दिशा को स्पष्ट कर सकते हैं।
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.40 | critical |
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