
नए शैक्षणिक सत्र में इंडोनेशिया के सरकारी स्कूलों में छात्रों की भारी कमी, सरकार ने मूल्यांकन शुरू किया
2026-27 सत्र के पहले सप्ताह में कई क्षेत्रों से एक से पाँच नए छात्र ही आने की खबरें आईं, जबकि सरकार ने स्कूल रूपांतरण और शिक्षा बजट पर जोर दिया।
इंडोनेशिया में 13 जुलाई 2026 से शुरू हुए नए शैक्षणिक सत्र के साथ ही एक विरोधाभासी तस्वीर उभरी: जहाँ लाखों छात्रों ने स्कूल में कदम रखा, वहीं दर्जनों सरकारी प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालयों में नए दाखिलों की संख्या एक से पाँच के बीच रही। मध्य जावा के सेमारंग स्थित एसडीएन पुरवोयोसो 01 में केवल तीन नए छात्र आए, जबकि बांदा लाम्पुंग के एक विद्यालय में दो और बेंग्कुलू प्रांत के रेजांग लेबोंग जिले के कई स्कूलों में शून्य से पाँच तक नामांकन हुआ। स्थानीय शिक्षा अधिकारियों के अनुसार, यह प्रवृत्ति मुख्यतः ग्रामीण और शहरी किनारों पर स्थित विद्यालयों में देखी गई, जहाँ जनसंख्या घनत्व कम है या निजी स्कूलों की ओर रुझान बढ़ा है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री अब्दुल मु’ती ने पुष्टि की कि डेटा पोकोक पेंडिडिकन (दापोदिक) के माध्यम से 60 से कम छात्रों वाले स्कूलों की पहचान की गई है और गृह मंत्रालय के साथ मिलकर नीति तैयार की जाएगी। संसद अध्यक्ष पुआन महारानी ने सरकार से मांग की कि वह राष्ट्रीय स्तर पर स्कूलों की आवश्यकता का मानचित्रण करे, जिसमें जन्म दर, प्रवासन और बस्तियों के विकास को शामिल किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि एकसमान नीति के बजाय क्षेत्रीय विशेषताओं के अनुसार विलय, पुनरोद्धार या रणनीतिक रूप से बनाए रखने का निर्णय लिया जाना चाहिए।
इस बीच, सरकार ने ‘सेकोलाह रक्यात’ (जन विद्यालय) कार्यक्रम के तहत 20 नए भवनों का निर्माण पूरा कर लिया है, जो सुलावेसी, सुमात्रा, जावा और मालुकु में फैले हैं। लोक निर्माण मंत्री डोडी हांग्गोदो ने इसे मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण की प्रतिबद्धता बताया, जबकि सामाजिक मामलों के मंत्री सैफुल्लाह यूसुफ ने बताया कि इस वर्ष 45 हजार छात्रों के लिए लगभग 4 खरब रुपिये का परिचालन बजट रखा गया है, जिसमें प्रति छात्र मासिक खर्च 30 से 40 लाख रुपिये अनुमानित है। ये विद्यालय विशेष रूप से अत्यंत गरीब परिवारों के बच्चों के लिए हैं और प्रवेश प्रक्रिया में डेटा सत्यापन की कई परतें लगाई गई हैं।
वैश्विक संदर्भ में, स्वीडन और अर्जेंटीना की रिपोर्टें बताती हैं कि शिक्षा प्रणालियों में संरचनात्मक चुनौतियाँ समान हैं: स्वीडन में पूर्व-प्राथमिक समूहों का आकार बढ़ने और शिक्षकों की कमी पर बहस तेज है, जबकि अर्जेंटीना में माध्यमिक स्तर पर केवल 10 प्रतिशत छात्र ही समय पर स्नातक हो पाते हैं। मलेशिया ने 2026-2035 की शिक्षा योजना में लचीलापन और स्थिरता को नए स्तंभों के रूप में शामिल किया है। इंडोनेशिया में मनोवैज्ञानिकों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे नए वातावरण में बच्चों की चिंता के लक्षणों—जैसे पेट दर्द, अत्यधिक रोना या स्कूल जाने से इनकार—को पहचानें और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ सहायता लें।
फिलहाल, शिक्षा मंत्रालय ने स्कूलों में गैजेट के उपयोग को सीमित करने के लिए परिपत्र जारी किया है और ‘एमपीएलएस रामाह’ (सौहार्दपूर्ण परिचय अवधि) के तहत समावेशी गतिविधियों पर जोर दिया है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, अभी तक 28,478 छात्र सेकोलाह रक्यात में दाखिला ले चुके हैं, जबकि लक्ष्य 43,346 है। नीति-निर्माण की प्रक्रिया जारी है और अधिकारियों का कहना है कि अंतिम निर्णय स्थानीय सरकारों के साथ विचार-विमर्श के बाद ही लिया जाएगा।
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | +0.20 | neutral |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.60 | critical |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.50 | critical |
The Indonesian government and schools promote MPLS as a success, while acknowledging the enrollment crisis and launching corrective measures.
By highlighting government initiatives and positive stories, an image of controlled progress is created, dampening criticism with data and concrete actions.
The deeper structural causes of declining enrollment, such as urbanization and competition from private schools, are omitted, as they would undermine the narrative of a manageable problem.
Teacher unions and experts denounce the systemic failure of education, demanding urgent intervention and radical reform.
By generalizing the Indonesian problem to a global education failure, the urgency is amplified and the demand for immediate structural change is legitimized.
Specific details of the Indonesian context, such as government efforts and local initiatives, are omitted, as they would soften the scale of the crisis.
Finance ministries and analysts warn that educational promises must confront budget constraints and real priorities.
By using fiscal data and international comparisons, a pragmatic skepticism is legitimized, scaling down expectations and shifting the debate to economic sustainability.
The positive aspects of MPLS and community involvement are omitted, as they would offer a more optimistic view of local management.
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