
ईयू की रिपोर्ट: चीन दीर्घकालिक चुनौती, वैश्विक गठबंधनों में बदलाव के संकेत
यूरोपीय संघ की नई रणनीतिक रिपोर्ट, मोरक्को की ऊर्जा कूटनीति, मिस्र-तुर्की सैन्य सहयोग और तुर्की-अमेरिका हथियार वार्ता से बहुध्रुवीय विश्व की तस्वीर उभरती है।
यूरोपीय संघ की विदेश मामलों की परिषद ने सोमवार को एक रणनीतिक पर्यावरण रिपोर्ट को मंजूरी दी, जिसमें चीन को यूरोप की सुरक्षा के लिए “दीर्घकालिक रणनीतिक चुनौती” बताया गया। रिपोर्ट के अनुसार, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन का बढ़ता दबदबा, दक्षिण और पूर्वी चीन सागर तथा ताइवान जलडमरूमध्य में उसकी गतिविधियाँ यूरोपीय और वैश्विक सुरक्षा को प्रभावित कर सकती हैं। ताइवान के विदेश मंत्रालय ने इस रिपोर्ट का स्वागत करते हुए कहा कि चीन की सैन्य और आर्थिक कार्रवाइयों ने नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को कमजोर किया है।
इस बीच, दक्षिण-पूर्व एशिया में आसियान और चीन के बीच दक्षिण चीन सागर में आचार संहिता (सीओसी) पर बातचीत तेज करने की मांग उठी है। दक्षिण चीन सागर परिषद के सदस्य आनाक अगुंग बान्यु पेरविता के अनुसार, पिछले एक दशक में तनाव कम होने के बजाय बढ़ा है और समुद्री घटनाओं में वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए कानूनी विवादों से हटकर सीओसी को शीघ्र पूरा करना, संकट प्रबंधन तंत्र को मजबूत करना और आसियान की केंद्रीयता बनाए रखना अधिक व्यावहारिक कदम है।
भूमध्यसागरीय क्षेत्र में मोरक्को की रणनीतिक अहमियत उभर रही है। स्पेनिश इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (आईईईई) की एक रिपोर्ट के अनुसार, मोरक्को ऊर्जा, बंदरगाहों, प्रौद्योगिकी और समुद्री सुरक्षा के चौराहे पर स्थित है, जहाँ चीन का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। 2023 में चीन और अरब देशों के बीच व्यापार लगभग 393.75 अरब डॉलर तक पहुँच गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि मोरक्को ने यूक्रेन पर रूसी आक्रमण की निंदा करने वाले संयुक्त राष्ट्र प्रस्ताव पर मतदान से परहेज करके कूटनीतिक स्वायत्तता का परिचय दिया। वहीं, मिस्र और तुर्की के बीच सैन्य और सुरक्षा सहयोग गहरा रहा है। गाजा युद्ध और ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमलों के बाद उपजी क्षेत्रीय अस्थिरता ने दोनों देशों को करीब लाया है। मिस्र के पूर्व सैन्य अधिकारी मेजर जनरल समीर फरज के अनुसार, दोनों देशों के बीच सूचना साझेदारी और संयुक्त प्रशिक्षण से सैन्य तालमेल बढ़ेगा, जिससे इजरायल को चिंता हो सकती है। तुर्की के शोधकर्ता मुराद असलान का कहना है कि इजरायल के विस्तारवादी रवैये को देखते हुए रक्षा उद्योग में आपसी निर्भरता दोनों देशों के लिए अनिवार्य है।
तुर्की के साथ अमेरिकी संबंधों में भी नया मोड़ आया है। तुर्की स्थित अंतरराष्ट्रीय संबंधों के विशेषज्ञ समीर सालेहा के अनुसार, अमेरिका द्वारा तुर्की को एफ-35 लड़ाकू विमानों की आपूर्ति की संभावना महज हथियार सौदा नहीं है, बल्कि यह यूक्रेन युद्ध, काला सागर की सुरक्षा और नाटो की एकजुटता जैसे व्यापक कारणों से प्रेरित है। हालाँकि, तुर्की रूस से एस-400 मिसाइल प्रणाली खरीदने के कारण लगे प्रतिबंधों के बावजूद अपनी स्वतंत्र रक्षा नीति और मास्को के साथ ऊर्जा-व्यापार संबंधों को बनाए रखना चाहता है। इजरायल इस घटनाक्रम को क्षेत्रीय शक्ति संतुलन के लिए चुनौती के रूप में देख रहा है, क्योंकि इससे उसकी सैन्य श्रेष्ठता प्रभावित हो सकती है।
इन घटनाक्रमों से वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव के संकेत मिलते हैं। यूरोपीय संघ की रिपोर्ट आने वाले महीनों में चीन के प्रति सख्त नीतियों का आधार बन सकती है। दक्षिण चीन सागर में सीओसी वार्ता जारी रहने की उम्मीद है, जबकि मिस्र-तुर्की सैन्य अभ्यास और रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर हो चुके हैं। तुर्की-अमेरिका रक्षा वार्ता का परिणाम आगामी नाटो बैठकों में स्पष्ट हो सकता है। मोरक्को की ऊर्जा कूटनीति और चीनी निवेश पर क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा भी तेज होने की संभावना है।
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
Regional powers in the Mediterranean and Middle East redefine their alliances, while the EU's focus on China is just one piece of a larger mosaic.
The mechanism shifts focus from the global China-EU confrontation to regional dynamics, presenting the EU report as one element among many in a complex reorganization.
The bloc omits mentioning that the EU report is specifically about China, not about regional dynamics, to avoid prioritizing the European narrative.
ASEAN and China must focus on a procedural agreement to manage disputes, while the EU's alarm about China is secondary to regional stability.
The mechanism reduces the Chinese threat to a matter of negotiation and rules, shifting focus from condemnation to seeking practical solutions.
The bloc omits mentioning that the EU report criticizes China as a systemic challenge, preferring to frame China as a partner to negotiate with.
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