
ब्रिटेन ने ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स पर लगाया प्रतिबंध, समर्थन पर 14 साल तक की कैद का प्रावधान
नए कानून के तहत ब्रिटेन ने आईआरजीसी, एक ईरान-समर्थित समूह और रूसी जीआरयू वालंटियर कोर को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा घोषित किया।
ब्रिटिश सरकार ने सोमवार को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) पर प्रतिबंध लगाने की योजना की घोषणा की, जिसके तहत इस बल को समर्थन देना या सहायता करना आपराधिक अपराध होगा और दोषी पाए जाने पर 14 वर्ष तक की जेल हो सकती है। गृह मंत्री शबाना महमूद ने संसद में लिखित बयान में बताया कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा (राज्य खतरे) अधिनियम 2026 के तहत उठाया गया है, जो विदेशी राज्य-समर्थित खतरों से निपटने के लिए नई शक्तियाँ प्रदान करता है। इसी कानून के तहत ईरान से जुड़े ‘इस्लामिक मूवमेंट ऑफ कम्पैनियंस ऑफ द राइट’ (आईएमसीआर) और रूस की सैन्य खुफिया एजेंसी जीआरयू की स्वयंसेवी कोर को भी प्रतिबंधित किया गया है।
ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार, आईआरजीसी ने ब्रिटेन की धरती पर जान से मारने की धमकियों और धमकाने की गतिविधियों को अंजाम दिया है, और उसने यहूदी तथा इजरायली समुदायों से जुड़े स्थानों पर सात हमलों की जिम्मेदारी लेने वाले आईएमसीआर को लगभग निश्चित रूप से निर्देशित किया। इन हमलों में लंदन के गोल्डर्स ग्रीन इलाके में यहूदी एम्बुलेंसों को आग लगाना शामिल है। गृह कार्यालय ने कहा कि नई शक्तियाँ अभियोजकों को हर मामले में विदेशी शक्ति से सीधा संबंध साबित करने की बाध्यता से मुक्त करेंगी, जिससे मुकदमा चलाना आसान हो जाएगा।
तेहरान से जुड़े मीडिया ने इस कदम को ‘ईरान विरोधी’ बताया है, जबकि ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने अपेक्षाकृत सतर्क भाषा में इसे ‘प्रतिबंधित संस्थाओं की सूची में डालने’ जैसा बताया। ईरानी विशेषज्ञ मीडिया ने स्पष्ट किया कि यह आतंकवाद अधिनियम 2000 के तहत पारंपरिक प्रतिबंध नहीं है, बल्कि एक नई कानूनी प्रक्रिया है जो राज्य-समर्थित समूहों पर लक्षित है, हालांकि इसके दंडात्मक परिणाम समान या अधिक कठोर हैं। ब्रिटेन ने ईरानी राजदूत को भी तलब किया और कहा कि वह ‘शत्रुतापूर्ण गतिविधियों’ को बर्दाश्त नहीं करेगा।
यह निर्णय ऐसे समय आया है जब अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ पहले ही आईआरजीसी को आतंकवादी संगठन घोषित कर चुके हैं। ब्रिटेन ने अब तक कानूनी अड़चनों के कारण यह कदम नहीं उठाया था, क्योंकि आईआरजीसी एक सरकारी सैन्य बल है। नए कानून ने इस अंतर को पाट दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि इससे ईरान के साथ राजनयिक तनाव बढ़ेगा और पश्चिमी देशों के बीच ईरान की प्रॉक्सी नेटवर्क को बाधित करने के प्रयासों में समन्वय दिखता है। दक्षिण एशिया के संदर्भ में, यह घटनाक्रम भारत जैसे देशों के लिए रणनीतिक महत्व रखता है, जो चाबहार बंदरगाह और ऊर्जा सहयोग के जरिए ईरान के साथ संबंध संतुलित कर रहे हैं, हालांकि भारत ने इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन कभी भी उन राज्यों का खेल का मैदान नहीं बनने देगा जो उसकी सड़कों पर भय, विभाजन और हिंसा फैलाना चाहते हैं। संसद से इस सप्ताह के अंत तक नियमों को मंजूरी मिलने की उम्मीद है, जिसके बाद 17 जुलाई से प्रतिबंध प्रभावी हो जाएगा। इसके अतिरिक्त, ब्रिटेन ने जीआरयू के वरिष्ठ अधिकारियों सहित 24 रूसी व्यक्तियों और संस्थाओं पर नए प्रतिबंध भी लगाए हैं।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.90 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.60 | aligned |
| इज़राइली प्रेस | +0.80 | aligned |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.20 | neutral |
Iran rejects the UK decision as a hostile and unfounded act, accusing London of blindly following US policies and targeting a legitimate state institution.
The Iranian narrative delegitimizes the UK measure by labeling it a 'claimed' terrorist listing and emphasizing the lack of legal basis, thereby reducing its credibility and impact.
The Iranian bloc omits specific evidence of threats to life and antisemitic attacks that motivated the UK decision, focusing instead on the alleged political nature of the ban.
The UK government asserts that banning the IRGC is a necessary measure to protect national security and counter state-backed threats, linking the decision to concrete attacks and intimidation on British soil.
The Atlantic bloc frames the ban as a logical response to clear evidence of threats, using the language of 'proscription' and 'terrorist organization' to invoke legal and moral authority.
The Atlantic bloc omits the Iranian perspective that the IRGC is a legitimate state institution, and downplays any potential overreach of the new powers.
Israel welcomes the UK decision as a significant step that joins the US and EU in designating the IRGC as a terrorist organization, reinforcing the international front against Iranian aggression.
The Israeli narrative amplifies the significance of the UK move by placing it within a broader Western consensus and linking it to recent Iranian attacks, thereby legitimizing further sanctions.
The Israeli bloc omits the nuance that the UK measure is not a traditional terrorist designation but a new state threats power, presenting it as a straightforward addition to the terror list.
Russia notes the UK ban on the IRGC and the GRU volunteer corps, highlighting the inclusion of a Russian-linked group and implicitly criticizing the UK's broad targeting.
The Russian narrative maintains a factual tone but subtly emphasizes the dual targeting of Iran and Russia, suggesting a geopolitical motive behind the UK's new powers.
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