
होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान ने सेवा शुल्क की घोषणा की, मित्र देशों को वरीयता; पश्चिमी देशों से तनाव बढ़ा
तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन के लिए शुल्क लगाने और चीन जैसे मित्र देशों को रियायत देने की योजना बनाई है, जबकि अमेरिका और यूरोपीय देश इसका विरोध कर रहे हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध विराम के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिख रहा है। ईरान के चीन में राजदूत अब्दोलरेज़ा रहमानी फ़ज़ली ने बीजिंग में विश्व शांति मंच पर शनिवार को घोषणा की कि तेहरान, ओमान के साथ मिलकर, इस रणनीतिक जलमार्ग से गुज़रने वाले वाणिज्यिक जहाज़ों पर सेवा शुल्क लगाने जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई 'टोल' नहीं, बल्कि सुरक्षा, निगरानी और पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए लिया जाने वाला शुल्क है। सबसे अहम बात यह कि ईरान ने "उन देशों को विशेष व्यवहार" देने का वादा किया है जो "कठिन समय में हमारे साथ खड़े रहे।" यह बयान उस मोड़ पर आया है जब ईरान-अमेरिका के बीच 60 दिनों की अस्थायी समझौते के तहत मुफ़्त आवाजाही की अवधि समाप्त होने वाली है और भविष्य की व्यवस्था पर अनिश्चितता बनी हुई है।
पश्चिमी देशों ने इस घोषणा का कड़ा विरोध किया है। वाशिंगटन और अधिकांश अरब खाड़ी देश शुल्क के पक्ष में नहीं हैं; अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले दावा किया था कि ईरान ने कोई शुल्क न लेने का वादा किया है और ऐसा होने पर बातचीत ख़त्म करने की चेतावनी दी थी। दूसरी ओर, लंदन और पेरिस ने जलडमरूमध्य में नौवहन सुरक्षा बहाल करने के लिए बहुराष्ट्रीय प्रयासों की अगुआई करते हुए ओमान के साथ सहयोग का दावा किया है, और फ्रांस ने अपने दो माइनस्वीपर, दो फ्रिगेट और एक गश्ती विमान क्षेत्र में भेजे हैं। मगर तेहरान ने इसे "सैन्य प्रदर्शन" करार देते हुए खारिज कर दिया है और कहा है कि सुरक्षा की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ ईरान और ओमान की है। उसने यह भी स्पष्ट किया कि जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें हटाने का काम केवल ईरानी सेनाएँ ही करेंगी। फ़िलहाल ओमान ने पश्चिमी देशों के साथ किसी समझौते की पुष्टि नहीं की है, जबकि ईरान लगातार ओमान के साथ घनिष्ठ समन्वय की बात कर रहा है।
चीन ने शुक्रवार को होर्मुज में अबाधित नौवहन और सुरक्षा की तत्काल बहाली की मांग की, लेकिन व्यापक रूप से यह माना जा रहा है कि बीजिंग को ईरान की नई नीति से विशेष लाभ मिलेगा। सैन्य इतिहासकार डॉ. लिनेट नसबाकर के अनुसार, तेहरान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि अमेरिकी और यूरोपीय जहाज़ों के मुकाबले चीनी और अन्य मित्र देशों के जहाज़ों को कम खर्च और प्राथमिकता मिले। इससे वैश्विक आपूर्ति शृंखला और ऊर्जा बाज़ार में एक नया असंतुलन पैदा हो सकता है। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (यूएनसीएलओएस) के तहत जलडमरूमध्य से गुज़रने पर टोल लेना प्रतिबंधित है, लेकिन सेवा शुल्क की गुंजाइश हो सकती है। ईरान इसी अंतर का फ़ायदा उठाते हुए अपने कदम को कानूनी जामा पहनाने की कोशिश कर रहा है।
समुद्री परिवहन पर पड़ने वाला असर पहले से ही दिखने लगा है। ईरान के नियंत्रण के चलते लगभग 600 जहाज़ और 11,000 चालक दल सदस्य अब भी फँसे हुए हैं। इससे पहले, अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) की पहल पर जहाज़ों को निकालने का प्रयास कुछ ही घंटों में ढह गया था जब तेहरान ने बिना अनुमति निकलने वालों पर हमले की धमकी दी थी। दोहा में हाल की वार्ता भी बिना किसी सहमति के समाप्त हुई; ईरान की जमी हुई संपत्तियों को जारी करने पर सहमति नहीं बन पाई और तेहरान ने सुरंगें नहीं हटाईं। जानकारों के अनुसार, अमेरिकी कूटनीति इस धारणा पर टिकी थी कि एक मज़बूत, दीर्घकालिक समझौता पहले से मौजूद है, लेकिन असलियत में ईरान अपनी परमाणु और प्रॉक्सी नीतियों पर लगाम लगाने के लिए दबाव महसूस नहीं कर रहा है और वह अब पहले से कहीं अधिक मज़बूती से इस रणनीतिक मार्ग को बंद करने में सक्षम है।
फ़िलहाल, अगला कदम 60 दिन की अस्थायी अवधि की समाप्ति पर निर्भर करेगा। ईरान ने संकेत दिया है कि वह ओमान के साथ "नई व्यवस्था" लागू करेगा, जिसमें शुल्क शामिल होंगे। अमेरिकी पक्ष के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि युद्ध-पूर्व के जो भी लक्ष्य थे, उनकी प्राप्ति असंभव दिखती है। इस बीच, भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों को स्थिति पर करीबी नज़र रखनी होगी, क्योंकि खाड़ी से आने वाले कच्चे तेल की लागत और आपूर्ति सीधे प्रभावित हो सकती है। अगले कुछ सप्ताह में देखना होगा कि क्या कोई नई राजनयिक पहल होती है या ईरान एकतरफा ढंग से अपनी घोषणा को लागू करता है।
| चीनी प्रेस | +0.10 | neutral |
|---|---|---|
| इज़राइली प्रेस | −0.80 | critical |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.30 | critical |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
Iran's regulatory role in the Strait of Hormuz is a fact that the international community must accommodate.
Presents Iran's actions as a matter of sovereignty and regional management, using passive constructions and quoting analysts to normalize the fee plan.
The Chinese narrative omits Trump's assertion that Iran had promised him no fees would be imposed, which would question Iran's credibility.
Iran is once again breaking its word and escalating tensions; the international community must not reward such behavior.
Uses the contradiction between Trump's public statement and Iran's subsequent announcement to frame Iran as untrustworthy, relying on direct quotes and a tone of betrayal.
The Israeli narrative omits the fact that Iran and Oman are jointly responsible for security in the strait, and that Iran sees the fee as a legitimate sovereign right.
The situation calls for a multilateral solution that preserves freedom of navigation while engaging all parties diplomatically.
Emphasizes European diplomatic efforts and multilateralism, portraying the fee plan as a problem to be solved through cooperation, not confrontation.
The European narrative omits the Iranian perspective that the fee is compensation for security services provided by Tehran.
India will monitor the situation closely and safeguard its energy interests through balanced diplomacy.
Adopts a factual, detached tone that avoids judgment, citing official sources and focusing on practical implications for shipping and energy supplies.
The Indian narrative omits Trump's previous claim that Iran had committed to no fees, which could undercut the announcement.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
सैमसंग का मुनाफा 19 गुना बढ़ा, फिर भी शेयरों में भारी गिरावट: एआई बूम की स्थिरता पर सवाल
9 भाषाएँ · 18 स्रोत
Technology सेव्हाट्सएप का यूजरनेम फीचर भारत में अटका, सरकार ने सुरक्षा आकलन तक रोक लगाई
3 भाषाएँ · 5 स्रोत
Science & Health सेहफ्ते में दो बार कसरत, दिल के दौरे का खतरा आधा: रोज़मर्रा की आदतें कैसे बदल सकती हैं सेहत
5 भाषाएँ · 11 स्रोत