
युद्धविराम के बाद ईरानी तेल-उड़ान: भारत को छूट, रूस-अमीरात मार्ग खुले
अमेरिकी-ईरान युद्धविराम के बाद तेल व्यापार और विमानन क्षेत्र में ईरान सक्रिय: भारत को 3-4 डॉलर प्रति बैरल छूट का प्रस्ताव, वहीं रूस-यूएई-तुर्की उड़ानें बहाल।
पश्चिम एशिया में अमेरिकी-ईरान युद्धविराम के बाद विमानन प्रतिबंधों में ढील से हवाई संपर्क तेज़ी से बहाल हो रहा है। ईरानी एयरलाइन पौया एयर ने 28 जून से रश्त-अस्त्राखान (रूस) के बीच सप्ताह में दो उड़ानें शुरू कर दी हैं, जबकि एअरोफ़्लोत ने एक जून से मॉस्को-दुबई सेवा फिर से चालू कर दी है। इसके साथ ही, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच सीधी उड़ानों की बिक्री शुरू हो गई है, जिनका किराया इकोनॉमी में 2 करोड़ रियाल (लगभग 20 लाख तोमान) से लेकर बिज़नेस क्लास में 4.8 करोड़ रियाल तक है।
यह बहाली चरणबद्ध कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम है। पहले चरण में ईरानी वाहक—जैसे माहान, वरेश, और ईरान एयर टूर—अमीरात के लिए उड़ानें शुरू कर रहे हैं; बाद में फ्लाई दुबई जैसी अमीराती कंपनियाँ वापसी करेंगी। ईरानी विमानन प्राधिकरण के अनुसार, तुर्की एयरलाइनों की वापसी भी शीघ्र होगी, और लुफ़्थांसा ने अक्टूबर-नवंबर से शीतकालीन उड़ानों की योजना बनाई है, बशर्ते राजनीतिक स्थिरता बनी रहे।
उधर तेल बाज़ार में, ईरान ने भारतीय रिफ़ाइनरियों को 3-4 डॉलर प्रति बैरल की छूट का प्रस्ताव दिया है—यह पेशकश दुबई और सिंगापुर स्थित मध्यस्थ कंपनियों के माध्यम से आई। यह क़दम तब उठाया गया जब चीन, ईरान का सबसे बड़ा कच्चा तेल ख़रीदार, होर्मुज़ अवरोध और ऊँची क़ीमतों के कारण अपना आयात 40 प्रतिशत से अधिक घटाकर 1.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन पर ले आया। ब्रेंट क्रूड 72 डॉलर से नीचे आ गया, जो युद्ध-पूर्व स्तर है। भारत की सीमित तत्काल क्षमता—अगस्त अंत तक अधिकांश रिफ़ाइनरियों की ज़रूरतें पूरी होने—के बावज़ूद, नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी को वरीयता दिए जाने के संकेत हैं।
एयर इंडिया भी मौजूदा हालात का लाभ उठाने की तैयारी में है। आंतरिक ज्ञापन में सीईओ कैम्पबेल विल्सन ने कहा कि हिंसा कम होने और ईंधन की क़ीमतें घटने से यूरोप-अमेरिका के रद्द किए गए मार्गों को बहाल किया जा सकता है। कंपनी इस वर्ष अपने बेड़े में आठ नए या नवीनीकृत चौड़े ढाँचे के विमान शामिल करेगी और नवी मुंबई से अबू धाबी के लिए सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ान शुरू करेगी।
आगे की कड़ी में ईरान-खाड़ी देशों के बीच उड़ानों का विस्तार और लुफ़्थांसा की शीतकालीन अनुसूची पर नज़र रहेगी। तेल व्यापार में भारत द्वारा छूट का लाभ उठाने की ठोस ख़रीदारी अगला वास्तविक पड़ाव होगा, पर यह अमेरिकी छूट की अवधि और वैश्विक माँग की बहाली पर निर्भर करेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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तेहरान-दुबई उड़ानों का फिर से शुरू होना एक राजनयिक सफलता है, जो हवाई यात्रा को सामान्य बनाती है। ईरानी एयरलाइंस धीरे-धीरे अंतरराष्ट्रीय सेवाएं फिर से शुरू कर रही हैं, टिकट की बिक्री शुरू हो चुकी है, जो व्यापार और पर्यटन की वापसी का संकेत है।
तेल की गिरती कीमतों और चीनी मांग में कमी का सामना करते हुए, ईरान भारतीय खरीदारों को लुभाने के लिए भारी छूट दे रहा है। दुबई और सिंगापुर में दलाल अमेरिकी छूट के तहत इन सौदों की सुविधा प्रदान कर रहे हैं, जो तेल निर्यात को बनाए रखने के एक हताश प्रयास को दर्शाता है।
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