
इज़राइल-लेबनान के बीच अमेरिकी मध्यस्थता में ढांचागत समझौता, हिज़्बुल्लाह ने खारिज किया
वाशिंगटन में हस्ताक्षरित त्रिपक्षीय समझौता दक्षिणी लेबनान से इज़राइली सेना की आंशिक वापसी और हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया का खाका पेश करता है, लेकिन हिज़्बुल्लाह ने इसे गृहयुद्ध की चेतावनी देते हुए अस्वीकार कर दिया।
अमेरिका, इज़राइल और लेबनान ने शुक्रवार को वाशिंगटन में पाँच दौर की वार्ता के बाद एक त्रिपक्षीय ढांचागत समझौते पर हस्ताक्षर किए। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इसे स्थायी शांति और सुरक्षा की दिशा में पहला कदम बताया। समझौते के तहत हिज़्बुल्लाह के निरस्त्रीकरण और उसके बुनियादी ढाँचे को खत्म करने की एक संरचित प्रक्रिया तय की गई है, साथ ही दक्षिणी लेबनान के दो पायलट क्षेत्रों से इज़राइली सेना की वापसी और वहाँ लेबनानी सेना की तैनाती का प्रावधान है। अमेरिका ने 10 करोड़ डॉलर की मानवीय सहायता और लेबनानी सेना को 3 करोड़ डॉलर की प्रतिपूर्ति की घोषणा की, तथा कार्यान्वयन के लिए एक सैन्य समन्वय समूह के गठन की बात कही।
विभिन्न पक्षों की प्रतिक्रियाएँ इस समझौते की जटिलता को रेखांकित करती हैं। इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इसे ईरान के लिए एक बड़ा झटका बताते हुए कहा कि इज़राइल दो क्षेत्रों से हटेगा, लेकिन जब तक हिज़्बुल्लाह पूरी तरह निरस्त्र नहीं हो जाता, तब तक सुरक्षा क्षेत्र में उसकी सेनाएँ बनी रहेंगी। लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन ने इसे संप्रभुता बहाली और विस्थापितों की वापसी का पहला कदम बताया। वहीं, हिज़्बुल्लाह के सांसद हसन फदलल्लाह ने समझौते को सिरे से खारिज करते हुए चेतावनी दी कि इसे लागू करने की कोशिश गृहयुद्ध को जन्म दे सकती है और संगठन अपने हथियार नहीं छोड़ेगा। हिज़्बुल्लाह इन वार्ताओं में शामिल नहीं था।
यह समझौता अमेरिका-ईरान के बीच हुए अंतरिम युद्धविराम समझौते से अलग है, हालाँकि तेहरान ने लेबनान के मुद्दे को अपनी वार्ता से जोड़ने पर जोर दिया था। लेबनानी सरकार ने ईरानी मध्यस्थता पर भरोसा जताने के बजाय इज़राइल के साथ सीधी बातचीत का रास्ता चुना। यह संघर्ष मार्च में ईरान के सर्वोच्च नेता की अमेरिकी-इज़राइली हमले में मौत के बाद हिज़्बुल्लाह के रॉकेट हमलों से शुरू हुआ था, जिसके जवाब में इज़राइल ने हवाई हमले और जमीनी कार्रवाई की। लेबनानी अधिकारियों के अनुसार अब तक 4,200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और दस लाख से अधिक विस्थापित हुए हैं।
समझौते के कार्यान्वयन की राह आसान नहीं है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अनुसार, एक सैन्य समन्वय समूह निगरानी करेगा और लेबनानी सेना को पायलट क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। हालाँकि, हिज़्बुल्लाह के विरोध और निरस्त्रीकरण की शर्त पर इज़राइली पूर्ण वापसी की अनिवार्यता को देखते हुए, जमीनी स्तर पर प्रगति अनिश्चित बनी हुई है। अगले चरण में पायलट क्षेत्रों से इज़राइली वापसी और लेबनानी सेना की तैनाती की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है, जिसकी सफलता पर व्यापक समझौते की दिशा तय होगी।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.40 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.30 | aligned |
France and Italy propose a multinational alliance for Lebanon, an initiative that effectively excludes the role of the United States and Israel.
The article presents the initiative as a European solution, emphasizing cooperation between Paris and Rome and omitting any reference to the role of the United States or Israel, suggesting that Europe can act independently.
The framework agreement between the US, Israel, and Lebanon is not mentioned; the article focuses on a separate European initiative.
The memorandum with Iran is only a first step, not a final agreement; the United States proceeds cautiously and requires verification.
The article uses Rubio's statement to downplay expectations, presenting the agreement as provisional and subject to checks, reinforcing the image of a careful and not naive American administration.
No mention of the US-Israel-Lebanon framework agreement; the article is about a different memorandum with Iran, but the rhetorical structure is similar to how a Lebanon agreement would be treated.
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