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विज्ञान और स्वास्थ्यशनिवार, 27 जून 2026

दर्द निवारक दवाओं पर नए शोध: गर्भावस्था में सुरक्षा की पुष्टि, मासिक धर्म में इबुप्रोफेन अधिक प्रभावी

इज़राइली अध्ययन ने 2.64 लाख गर्भधारण के आंकड़ों से साबित किया कि सामान्य दर्दनिवारक जन्म दोषों का जोखिम नहीं बढ़ाते, जबकि मासिक धर्म के दर्द में पैरासिटामोल की तुलना में इबुप्रोफेन कहीं अधिक कारगर पाया गया।

बीयरशेबा स्थित बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी और क्लैलिट हेल्थ सर्विसेज़ के एक व्यापक अध्ययन ने गर्भावस्था के दौरान दर्द निवारक दवाओं के उपयोग को लेकर वर्षों से चली आ रही आशंकाओं को काफी हद तक दूर कर दिया है। 1998 से 2018 के बीच सोरोका यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में दर्ज 2,64,000 से अधिक गर्भधारण के आंकड़ों पर आधारित इस पूर्वव्यापी अध्ययन में पाया गया कि पहली तिमाही में इबुप्रोफेन जैसी नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं (NSAIDs) और पूरी गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल के सेवन से प्रमुख जन्मजात विकृतियों, मृत जन्म या नवजात की गुर्दे की विफलता का कोई स्वतंत्र जोखिम नहीं जुड़ा। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि कच्चे आंकड़ों में दिखने वाला मामूली बढ़ा हुआ जोखिम वास्तव में मां की अंतर्निहित बीमारी, जैसे तेज़ बुखार या संक्रमण, से जुड़ा था, न कि दवाओं से।

यह स्पष्टता ऐसे समय में आई है जब मासिक धर्म के दर्द के प्रबंधन में भी साक्ष्य और उपभोक्ता व्यवहार के बीच बड़ा अंतर देखा जा रहा है। तीस लाख से अधिक खरीदारों के सुपरमार्केट लेन-देन के विश्लेषण से पता चला कि मासिक धर्म की ऐंठन के लिए सबसे अधिक खरीदी जाने वाली दवा पैरासिटामोल है, जबकि 80 अध्ययनों और 5,800 महिलाओं पर आधारित एक समीक्षा के अनुसार NSAIDs कहीं अधिक प्रभावी हैं। इसकी वजह क्रियाविधि में अंतर है: इबुप्रोफेन प्रोस्टाग्लैंडीन के उत्पादन को रोककर दर्द के मूल कारण पर सीधा प्रहार करता है, जबकि पैरासिटामोल मुख्यतः मस्तिष्क में दर्द की अनुभूति को कम करता है और इसमें सूजनरोधी प्रभाव नगण्य होता है।

हार्मोनल मुँहासे और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) जैसी स्थितियों से जूझ रही महिलाओं के बीच इनोसिटोल नामक पूरक की चर्चा तेज़ी से बढ़ी है। सोशल मीडिया पर हज़ारों वीडियो और व्यक्तिगत अनुभवों के बावजूद, विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर देते हैं कि इसके लाभों पर अभी बड़े पैमाने पर नैदानिक परीक्षणों का अभाव है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, मरीज़ अब पहले से कहीं अधिक जागरूक होकर क्लिनिक आते हैं और अक्सर पहले से ही इनोसिटोल ले रहे होते हैं या इसके बारे में पूछते हैं। यह रुझान हार्मोनल स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती सामूहिक चेतना को दर्शाता है, जिसमें ‘कोर्टिसोल स्तर’, ‘इंसुलिन प्रतिरोध’ और ‘साइकिल सिंकिंग’ जैसी अवधारणाएँ रोज़मर्रा की ऑनलाइन बातचीत का हिस्सा बन गई हैं।

दृश्य त्वचा रोगों और पुरानी बीमारियों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी उतना ही गहरा है। जर्मनी से एक व्यक्तिगत विवरण बताता है कि कैसे पाँच वर्षों से चली आ रही मुँहासे ने लेखिका के आत्मसम्मान और दैनिक जीवन को प्रभावित किया, जहाँ दर्पण में देखना एक चुनौती बन गया। इसी तरह, अमेरिकी मॉडल बेला हदीद ने लाइम रोग के एक नए ‘फ्लेयर-अप’ के दौरान लगातार शारीरिक दर्द, अत्यधिक थकान, मानसिक कोहरा और गंभीर अवसाद का अनुभव साझा किया। एक अन्य मामले में, इन्फ्लुएंसर ब्रांडी ग्लैनविल ने चेहरे की विकृति के पीछे संभावित रूप से एक सौम्य ट्यूमर या टूटे हुए सिलिकॉन इम्प्लांट को कारण बताया, जिसके निदान में तीन वर्ष लग गए।

ये सभी मामले एक साझा सबक की ओर इशारा करते हैं: महिलाओं के स्वास्थ्य में अंतर्निहित स्थिति का उपचार और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण ही केंद्रीय होना चाहिए। इज़राइली अध्ययन के निष्कर्षों ने इस बात पर बल दिया कि दवाओं के डर से इलाज टालने के बजाय, चिकित्सकीय रूप से ज़रूरी होने पर अंतर्निहित बीमारी के उपचार पर ध्यान देना चाहिए। अगला महत्वपूर्ण कदम इनोसिटोल जैसे लोकप्रिय पूरकों के लिए कठोर परीक्षणों का होगा, ताकि ऑनलाइन दावों को वैज्ञानिक पुष्टि या खंडन से परखा जा सके।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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50%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
इज़राइली प्रेसदक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
इज़राइली प्रेस/ सुरक्षा
व्यावहारिकतासंरक्षणवाद

एक इज़राइली अध्ययन पुष्टि करता है कि सामान्य दर्द निवारक गर्भावस्था में सुरक्षित हैं और जन्म दोषों का जोखिम नहीं बढ़ाते। यह खोज उस पारंपरिक चिकित्सकीय सावधानी को चुनौती देती है जो गर्भवती महिलाओं को सभी दर्दनाशकों से बचने की सलाह देती थी। इसे प्रसव पीड़ा को बाइबिल का आदेश मानने वाली सांस्कृतिक कथा के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है, जिसे अब आधुनिक चिकित्सा ने कम कर दिया है।

दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
व्यावहारिकताउदासीनता

शोध से पता चलता है कि इबुप्रोफेन और अन्य NSAID मासिक धर्म के दर्द के लिए पैरासिटामोल से अधिक प्रभावी हैं। ये दवाएं प्रोस्टाग्लैंडीन को रोककर काम करती हैं, जो गर्भाशय की ऐंठन पैदा करते हैं। महिलाओं को गर्म सेंक या TENS उपकरणों का उपयोग करने और दर्द गंभीर या बिगड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की भी सलाह दी जाती है।

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शनिवार, 27 जून 2026

दर्द निवारक दवाओं पर नए शोध: गर्भावस्था में सुरक्षा की पुष्टि, मासिक धर्म में इबुप्रोफेन अधिक प्रभावी

इज़राइली अध्ययन ने 2.64 लाख गर्भधारण के आंकड़ों से साबित किया कि सामान्य दर्दनिवारक जन्म दोषों का जोखिम नहीं बढ़ाते, जबकि मासिक धर्म के दर्द में पैरासिटामोल की तुलना में इबुप्रोफेन कहीं अधिक कारगर पाया गया।

बीयरशेबा स्थित बेन-गुरियन यूनिवर्सिटी और क्लैलिट हेल्थ सर्विसेज़ के एक व्यापक अध्ययन ने गर्भावस्था के दौरान दर्द निवारक दवाओं के उपयोग को लेकर वर्षों से चली आ रही आशंकाओं को काफी हद तक दूर कर दिया है। 1998 से 2018 के बीच सोरोका यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में दर्ज 2,64,000 से अधिक गर्भधारण के आंकड़ों पर आधारित इस पूर्वव्यापी अध्ययन में पाया गया कि पहली तिमाही में इबुप्रोफेन जैसी नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाओं (NSAIDs) और पूरी गर्भावस्था के दौरान पैरासिटामोल के सेवन से प्रमुख जन्मजात विकृतियों, मृत जन्म या नवजात की गुर्दे की विफलता का कोई स्वतंत्र जोखिम नहीं जुड़ा। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि कच्चे आंकड़ों में दिखने वाला मामूली बढ़ा हुआ जोखिम वास्तव में मां की अंतर्निहित बीमारी, जैसे तेज़ बुखार या संक्रमण, से जुड़ा था, न कि दवाओं से।

यह स्पष्टता ऐसे समय में आई है जब मासिक धर्म के दर्द के प्रबंधन में भी साक्ष्य और उपभोक्ता व्यवहार के बीच बड़ा अंतर देखा जा रहा है। तीस लाख से अधिक खरीदारों के सुपरमार्केट लेन-देन के विश्लेषण से पता चला कि मासिक धर्म की ऐंठन के लिए सबसे अधिक खरीदी जाने वाली दवा पैरासिटामोल है, जबकि 80 अध्ययनों और 5,800 महिलाओं पर आधारित एक समीक्षा के अनुसार NSAIDs कहीं अधिक प्रभावी हैं। इसकी वजह क्रियाविधि में अंतर है: इबुप्रोफेन प्रोस्टाग्लैंडीन के उत्पादन को रोककर दर्द के मूल कारण पर सीधा प्रहार करता है, जबकि पैरासिटामोल मुख्यतः मस्तिष्क में दर्द की अनुभूति को कम करता है और इसमें सूजनरोधी प्रभाव नगण्य होता है।

हार्मोनल मुँहासे और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) जैसी स्थितियों से जूझ रही महिलाओं के बीच इनोसिटोल नामक पूरक की चर्चा तेज़ी से बढ़ी है। सोशल मीडिया पर हज़ारों वीडियो और व्यक्तिगत अनुभवों के बावजूद, विशेषज्ञ इस बात पर ज़ोर देते हैं कि इसके लाभों पर अभी बड़े पैमाने पर नैदानिक परीक्षणों का अभाव है। त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार, मरीज़ अब पहले से कहीं अधिक जागरूक होकर क्लिनिक आते हैं और अक्सर पहले से ही इनोसिटोल ले रहे होते हैं या इसके बारे में पूछते हैं। यह रुझान हार्मोनल स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती सामूहिक चेतना को दर्शाता है, जिसमें ‘कोर्टिसोल स्तर’, ‘इंसुलिन प्रतिरोध’ और ‘साइकिल सिंकिंग’ जैसी अवधारणाएँ रोज़मर्रा की ऑनलाइन बातचीत का हिस्सा बन गई हैं।

दृश्य त्वचा रोगों और पुरानी बीमारियों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी उतना ही गहरा है। जर्मनी से एक व्यक्तिगत विवरण बताता है कि कैसे पाँच वर्षों से चली आ रही मुँहासे ने लेखिका के आत्मसम्मान और दैनिक जीवन को प्रभावित किया, जहाँ दर्पण में देखना एक चुनौती बन गया। इसी तरह, अमेरिकी मॉडल बेला हदीद ने लाइम रोग के एक नए ‘फ्लेयर-अप’ के दौरान लगातार शारीरिक दर्द, अत्यधिक थकान, मानसिक कोहरा और गंभीर अवसाद का अनुभव साझा किया। एक अन्य मामले में, इन्फ्लुएंसर ब्रांडी ग्लैनविल ने चेहरे की विकृति के पीछे संभावित रूप से एक सौम्य ट्यूमर या टूटे हुए सिलिकॉन इम्प्लांट को कारण बताया, जिसके निदान में तीन वर्ष लग गए।

ये सभी मामले एक साझा सबक की ओर इशारा करते हैं: महिलाओं के स्वास्थ्य में अंतर्निहित स्थिति का उपचार और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण ही केंद्रीय होना चाहिए। इज़राइली अध्ययन के निष्कर्षों ने इस बात पर बल दिया कि दवाओं के डर से इलाज टालने के बजाय, चिकित्सकीय रूप से ज़रूरी होने पर अंतर्निहित बीमारी के उपचार पर ध्यान देना चाहिए। अगला महत्वपूर्ण कदम इनोसिटोल जैसे लोकप्रिय पूरकों के लिए कठोर परीक्षणों का होगा, ताकि ऑनलाइन दावों को वैज्ञानिक पुष्टि या खंडन से परखा जा सके।

स्रोतों में मतभेद

विज्ञान और स्वास्थ्य · 4 स्रोत · 3 भाषाएँ

50%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक50%
न्यूनत्र50%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
इज़राइली प्रेसदक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
इज़राइली प्रेस/ सुरक्षा
व्यावहारिकतासंरक्षणवाद

एक इज़राइली अध्ययन पुष्टि करता है कि सामान्य दर्द निवारक गर्भावस्था में सुरक्षित हैं और जन्म दोषों का जोखिम नहीं बढ़ाते। यह खोज उस पारंपरिक चिकित्सकीय सावधानी को चुनौती देती है जो गर्भवती महिलाओं को सभी दर्दनाशकों से बचने की सलाह देती थी। इसे प्रसव पीड़ा को बाइबिल का आदेश मानने वाली सांस्कृतिक कथा के संदर्भ में प्रस्तुत किया गया है, जिसे अब आधुनिक चिकित्सा ने कम कर दिया है।

दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस
व्यावहारिकताउदासीनता

शोध से पता चलता है कि इबुप्रोफेन और अन्य NSAID मासिक धर्म के दर्द के लिए पैरासिटामोल से अधिक प्रभावी हैं। ये दवाएं प्रोस्टाग्लैंडीन को रोककर काम करती हैं, जो गर्भाशय की ऐंठन पैदा करते हैं। महिलाओं को गर्म सेंक या TENS उपकरणों का उपयोग करने और दर्द गंभीर या बिगड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने की भी सलाह दी जाती है।

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