
गाजा के 'सुरक्षित क्षेत्र' पर इजरायली हमला, मां-बेटी समेत आठ की मौत; युद्धविराम उल्लंघनों का सिलसिला जारी
अल-मवासी शिविर पर हवाई हमले में एक मां और उसकी शिशु बेटी की मौत के बाद हमास ने अंतरराष्ट्रीय चुप्पी पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।
गाजा पट्टी के दक्षिणी हिस्से में स्थित अल-मवासी क्षेत्र में सोमवार रात इजरायली हवाई हमले में एक मां और उसकी एक वर्षीय बेटी की मौत हो गई। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में विस्थापितों के तंबू वाले शिविर को निशाना बनाया गया, जिससे कम से कम 100 तंबू आग में जलकर नष्ट हो गए। स्थानीय संवाददाताओं ने बताया कि पिछले 24 घंटों में खान यूनिस और मध्य गाजा के दीर अल-बलाह सहित विभिन्न स्थानों पर हुए अलग-अलग हमलों में कुल आठ फिलिस्तीनी मारे गए और कई अन्य घायल हुए।
हमास के प्रवक्ता हाज़ेम कासिम ने इन हमलों पर प्रतिक्रिया देते हुए क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की चुप्पी पर तीखा सवाल उठाया। टेलीग्राम पर जारी एक बयान में उन्होंने कहा कि अरब लीग, उसकी संसदें, विद्वान और अभिजात वर्ग “जो कुछ हो रहा है, उसे सुन और देख रहे हैं, फिर भी कुछ नहीं कर रहे।” उन्होंने रामल्लाह स्थित फिलिस्तीनी प्राधिकरण पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वह सब कुछ ऐसे देख रहा है “मानो यह किसी दूसरी दुनिया में हो रहा हो।” कासिम ने इन सभी संस्थाओं को “ईश्वर के समक्ष इस बच्ची का विरोधी” करार दिया।
गाजा के सरकारी मीडिया कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष अक्टूबर में युद्धविराम लागू होने के बाद से अब तक समझौते के 3,465 उल्लंघन दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें 1,045 फिलिस्तीनी मारे गए और 3,380 घायल हुए हैं। इसी अवधि में 113 लोगों को हिरासत में लिया गया है। फिलिस्तीनी स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 से अब तक गाजा में कुल मृतकों की संख्या 73,058 तक पहुंच गई है, जबकि 1,73,488 से अधिक लोग घायल हुए हैं। मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि भारी संख्या में शव अब भी मलबे के नीचे दबे हैं या सड़कों पर पड़े हैं, क्योंकि बचाव दल सुरक्षा स्थिति के कारण उन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।
इंडोनेशियाई मीडिया में प्रकाशित विश्लेषणों के अनुसार, गाजा की मानवीय त्रासदी अब अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव की वैश्विक सुर्खियों के पीछे दबती जा रही है। रिपोर्टों में इसे ‘मुद्दा-ध्यान चक्र’ का नाम दिया गया है, जिसमें नए भू-राजनीतिक संकट के सामने आने पर पुराना संघर्ष जनता की स्मृति से ओझल होने लगता है। स्वीडिश मीडिया ने भी इस ओर ध्यान खींचा कि अल-मवासी वही क्षेत्र है जिसे इजरायल ने युद्ध के दौरान ‘मानवीय क्षेत्र’ घोषित किया था। इजरायली सेना की ओर से इन ताजा हमलों पर अभी तक कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं आई है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब क्षेत्रीय शक्तियों का ध्यान बड़े पैमाने पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम और संभावित व्यापक युद्ध पर केंद्रित है। गाजा में युद्धविराम तकनीकी रूप से लागू है, लेकिन जमीनी स्तर पर हिंसा और मौतों का सिलसिला जारी है। अगले कुछ दिनों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में युद्धविराम उल्लंघनों पर एक नई रिपोर्ट पेश होने की संभावना है, जबकि मानवीय संगठन लगातार पीड़ितों तक पहुंच बनाने की मांग कर रहे हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ईरान ने डेना विध्वंसक पर हमले को युद्ध अपराध बताते हुए अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन और प्रतिक्रिया की आवश्यकता पर जोर दिया। कथा ईरानी पीड़ा और रक्षा की वैधता पर केंद्रित है, गाजा में नागरिक हताहतों को छोड़कर।
लेबनानी और ईरानी प्रतिरोध को इज़राइली आक्रमण के खिलाफ एकमात्र बाधा के रूप में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें लेबनान में इज़राइली उल्लंघनों का विवरण है। कथा गाजा से लेबनानी मोर्चे पर ध्यान केंद्रित करती है, सामूहिक रक्षा की आवश्यकता पर जोर देती है।
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