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विज्ञान और स्वास्थ्यमंगलवार, 23 जून 2026

रात की हल्की रोशनी भी दिमाग के लिए खतरा: नींद, अल्जाइमर और उच्च रक्तचाप से जुड़े नए सबूत

वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि सोते समय टीवी या नाइट लैंप की रोशनी मेलाटोनिन घटाकर नींद की गुणवत्ता बिगाड़ती है और अल्जाइमर व उच्च रक्तचाप का जोखिम बढ़ा सकती है।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ केंटकी के शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर के पशु मॉडलों पर पाया कि रात में हल्की रोशनी भी शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी (सर्केडियन रिदम) को बिगाड़ देती है, जिससे नींद-जागने का चक्र अस्थिर होता है और मस्तिष्क में एमिलॉइड प्लाक का जमाव थोड़ा बढ़ जाता है। दूसरे अध्ययन में यह भी सामने आया कि नींद की गड़बड़ी याददाश्त की दिक्कतों से पहले ही शुरू हो जाती है और इसमें मस्तिष्क की सूजन की अहम भूमिका हो सकती है। जब वैज्ञानिकों ने एक प्रायोगिक दवा MW151 से अत्यधिक सूजन के संकेतों को दबाया, तो एमिलॉइड का स्तर कम हुए बिना भी नींद की गुणवत्ता सुधर गई। यह संकेत देता है कि खराब नींद अल्जाइमर का सिर्फ लक्षण नहीं, बल्कि इसके विकास का एक कारक भी हो सकती है।

इसी कड़ी में पेन स्टेट यूनिवर्सिटी और एथेंस विश्वविद्यालय के चिकित्सकों ने 1,700 से अधिक वयस्कों के आंकड़ों का विश्लेषण कर पाया कि दिन में अत्यधिक नींद आने की शिकायत करने वालों में उच्च रक्तचाप होने की संभावना 52 प्रतिशत और भविष्य में इसके विकसित होने की आशंका 74 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। जिन लोगों को रात में सोने में 30 मिनट या उससे अधिक लगते हैं, उनमें यह जोखिम दोगुना से तिगुना तक पाया गया। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ बताते हैं कि सोते समय टीवी या लैंप की रोशनी मेलाटोनिन के उत्पादन को घटाकर गहरी नींद में बाधा डालती है और हृदय गति व चयापचय से जुड़ी शारीरिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है।

सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में 2,000 से अधिक वयस्कों पर दर्ज किया गया कि जागने के बाद औसतन 15.8 मिनट तक धुंधलापन (स्लीप इनर्शिया) बना रहता है, जो ध्यान और निर्णय क्षमता को प्रभावित करता है। मैक्सिको की UNAM की क्रोनोबायोलॉजी प्रयोगशाला के अनुसार, सुबह प्राकृतिक रोशनी मेलाटोनिन को रोककर कॉर्टिसोल अवेकनिंग रिस्पॉन्स (CAR) को सक्रिय करती है, जो मस्तिष्क की भावनात्मक और संज्ञानात्मक नेटवर्क को पुनर्व्यवस्थित करता है। मनोवैज्ञानिक नूरिया रूरे इसी आधार पर सुबह के पहले 30 मिनट स्क्रीन से दूर रहने, एक घंटे के भीतर नाश्ता करने और जागने का समय नियमित रखने की सलाह देती हैं, ताकि सर्केडियन घड़ी ठीक से सेट हो और रात की नींद पर असर न पड़े।

स्क्रीन के व्यापक प्रभावों पर अन्य अध्ययन भी इशारा करते हैं। 'टेक नेक' पर शोध बताते हैं कि स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग और गर्दन दर्द के बीच संबंध तो है, लेकिन असली समस्या घंटों एक ही मुद्रा में बैठे रहना और शारीरिक गतिविधि की कमी है, न कि केवल सिर झुकाना। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से, टीवी देखते हुए फोन चलाना ध्यान के बिखराव और निरंतर उत्तेजना की आदत को दर्शाता है, जबकि बच्चों के विकास के लिए विशेषज्ञ नियमित नींद, सीमित स्क्रीन समय, शारीरिक गतिविधि और भावनात्मक सुरक्षा को आवश्यक मानते हैं।

अभी तक MW151 जैसे सूजन-रोधी उपाय पशु परीक्षण के चरण में हैं और मनुष्यों पर इनके प्रभाव की पुष्टि बाकी है। फिलहाल, केंटकी, हार्वर्ड और एथेंस के शोधकर्ता शाम के समय अतिरिक्त या तेज रोशनी से बचने, सोने-जागने का नियमित समय रखने और रात में पूर्ण अंधेरे की स्थिति बनाने की सरल आदतों की सिफारिश करते हैं। अगला ठोस पड़ाव अल्जाइमर में सूजन को लक्षित करने वाली दवाओं के मानव परीक्षण और रोशनी के संपर्क पर सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का विकास होगा।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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24%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
रूसी और सीआईएस प्रेसलैटिन अमेरिकी प्रेस
रूसी और सीआईएस प्रेस
चेतावनीअत्यावश्यकता

सोने से पहले रात की रोशनी या स्क्रीन का उपयोग जैसी सामान्य आदत को अल्जाइमर रोग से जोड़ा गया है। शोध से पता चलता है कि मंद प्रकाश भी सर्कैडियन लय और नींद की गुणवत्ता को बाधित करता है, जिससे न्यूरोडीजेनेरेशन का खतरा बढ़ जाता है। वैज्ञानिक रात के समय प्रकाश के संपर्क पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हैं।

लैटिन अमेरिकी प्रेस/ बाज़ार
व्यावहारिकतासंदेह

डिजिटल जीवनशैली शरीर और मन को नया आकार दे रही है: 'टेक नेक' दर्द से लेकर सोते समय चुप्पी सहन न कर पाने तक। मनोविज्ञान बताता है कि स्क्रीन मल्टीटास्किंग ध्यान को खंडित करती है, जबकि सुबह की सुस्ती एक शारीरिक अवस्था है जिसे विशिष्ट दिनचर्या से दूर किया जा सकता है। दृष्टिकोण व्यावहारिक है, जिसमें व्यावहारिक सुझाव और पृष्ठभूमि शोर की मनोवैज्ञानिक आवश्यकता को समझना शामिल है।

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हॉर्मुज शुल्क विवाद: ट्रंप ने ईरान के आश्वासन पर उठाए सवाल, वार्ता समाप्ति की दी धमकी·इंग्लैंड का दबदबा बेअसर: घाना की दीवार ने 79% कब्जे के बावजूद गोलरहित ड्रॉ कराया·विश्व कप 2026: ग्रुप सी की अहम टक्कर में ब्राजील आज स्कॉटलैंड से खेलेगा, नेमार की वापसी पर निगाहें·जब समंदर सुनता है: खोने, रफ़्तार और साक्षी के इस दौर की कहानियाँ·रोनाल्डो के दो गोल, पुर्तगाल की 5-0 से जीत; मेस्सी से भिड़ंत पर बोले 'शानदार होगा'·वेनेजुएला का 240 अरब डॉलर का ऋण: इतिहास की सबसे बड़ी संप्रभु ऋण पुनर्संरचना की तैयारी·जर्मनी में रेल संचार प्रणाली ठप, दो घंटे तक पूरा ट्रेन नेटवर्क रुका·ग्रुप ए का आखिरी दिन: मेक्सिको का इतिहास रचने का मौका, बाकी तीन की जंग·हॉर्मुज शुल्क विवाद: ट्रंप ने ईरान के आश्वासन पर उठाए सवाल, वार्ता समाप्ति की दी धमकी·इंग्लैंड का दबदबा बेअसर: घाना की दीवार ने 79% कब्जे के बावजूद गोलरहित ड्रॉ कराया·विश्व कप 2026: ग्रुप सी की अहम टक्कर में ब्राजील आज स्कॉटलैंड से खेलेगा, नेमार की वापसी पर निगाहें·जब समंदर सुनता है: खोने, रफ़्तार और साक्षी के इस दौर की कहानियाँ·रोनाल्डो के दो गोल, पुर्तगाल की 5-0 से जीत; मेस्सी से भिड़ंत पर बोले 'शानदार होगा'·वेनेजुएला का 240 अरब डॉलर का ऋण: इतिहास की सबसे बड़ी संप्रभु ऋण पुनर्संरचना की तैयारी·जर्मनी में रेल संचार प्रणाली ठप, दो घंटे तक पूरा ट्रेन नेटवर्क रुका·ग्रुप ए का आखिरी दिन: मेक्सिको का इतिहास रचने का मौका, बाकी तीन की जंग·
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मंगलवार, 23 जून 2026

रात की हल्की रोशनी भी दिमाग के लिए खतरा: नींद, अल्जाइमर और उच्च रक्तचाप से जुड़े नए सबूत

वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि सोते समय टीवी या नाइट लैंप की रोशनी मेलाटोनिन घटाकर नींद की गुणवत्ता बिगाड़ती है और अल्जाइमर व उच्च रक्तचाप का जोखिम बढ़ा सकती है।

अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ केंटकी के शोधकर्ताओं ने अल्जाइमर के पशु मॉडलों पर पाया कि रात में हल्की रोशनी भी शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी (सर्केडियन रिदम) को बिगाड़ देती है, जिससे नींद-जागने का चक्र अस्थिर होता है और मस्तिष्क में एमिलॉइड प्लाक का जमाव थोड़ा बढ़ जाता है। दूसरे अध्ययन में यह भी सामने आया कि नींद की गड़बड़ी याददाश्त की दिक्कतों से पहले ही शुरू हो जाती है और इसमें मस्तिष्क की सूजन की अहम भूमिका हो सकती है। जब वैज्ञानिकों ने एक प्रायोगिक दवा MW151 से अत्यधिक सूजन के संकेतों को दबाया, तो एमिलॉइड का स्तर कम हुए बिना भी नींद की गुणवत्ता सुधर गई। यह संकेत देता है कि खराब नींद अल्जाइमर का सिर्फ लक्षण नहीं, बल्कि इसके विकास का एक कारक भी हो सकती है।

इसी कड़ी में पेन स्टेट यूनिवर्सिटी और एथेंस विश्वविद्यालय के चिकित्सकों ने 1,700 से अधिक वयस्कों के आंकड़ों का विश्लेषण कर पाया कि दिन में अत्यधिक नींद आने की शिकायत करने वालों में उच्च रक्तचाप होने की संभावना 52 प्रतिशत और भविष्य में इसके विकसित होने की आशंका 74 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। जिन लोगों को रात में सोने में 30 मिनट या उससे अधिक लगते हैं, उनमें यह जोखिम दोगुना से तिगुना तक पाया गया। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञ बताते हैं कि सोते समय टीवी या लैंप की रोशनी मेलाटोनिन के उत्पादन को घटाकर गहरी नींद में बाधा डालती है और हृदय गति व चयापचय से जुड़ी शारीरिक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है।

सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन में 2,000 से अधिक वयस्कों पर दर्ज किया गया कि जागने के बाद औसतन 15.8 मिनट तक धुंधलापन (स्लीप इनर्शिया) बना रहता है, जो ध्यान और निर्णय क्षमता को प्रभावित करता है। मैक्सिको की UNAM की क्रोनोबायोलॉजी प्रयोगशाला के अनुसार, सुबह प्राकृतिक रोशनी मेलाटोनिन को रोककर कॉर्टिसोल अवेकनिंग रिस्पॉन्स (CAR) को सक्रिय करती है, जो मस्तिष्क की भावनात्मक और संज्ञानात्मक नेटवर्क को पुनर्व्यवस्थित करता है। मनोवैज्ञानिक नूरिया रूरे इसी आधार पर सुबह के पहले 30 मिनट स्क्रीन से दूर रहने, एक घंटे के भीतर नाश्ता करने और जागने का समय नियमित रखने की सलाह देती हैं, ताकि सर्केडियन घड़ी ठीक से सेट हो और रात की नींद पर असर न पड़े।

स्क्रीन के व्यापक प्रभावों पर अन्य अध्ययन भी इशारा करते हैं। 'टेक नेक' पर शोध बताते हैं कि स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग और गर्दन दर्द के बीच संबंध तो है, लेकिन असली समस्या घंटों एक ही मुद्रा में बैठे रहना और शारीरिक गतिविधि की कमी है, न कि केवल सिर झुकाना। मनोवैज्ञानिक दृष्टि से, टीवी देखते हुए फोन चलाना ध्यान के बिखराव और निरंतर उत्तेजना की आदत को दर्शाता है, जबकि बच्चों के विकास के लिए विशेषज्ञ नियमित नींद, सीमित स्क्रीन समय, शारीरिक गतिविधि और भावनात्मक सुरक्षा को आवश्यक मानते हैं।

अभी तक MW151 जैसे सूजन-रोधी उपाय पशु परीक्षण के चरण में हैं और मनुष्यों पर इनके प्रभाव की पुष्टि बाकी है। फिलहाल, केंटकी, हार्वर्ड और एथेंस के शोधकर्ता शाम के समय अतिरिक्त या तेज रोशनी से बचने, सोने-जागने का नियमित समय रखने और रात में पूर्ण अंधेरे की स्थिति बनाने की सरल आदतों की सिफारिश करते हैं। अगला ठोस पड़ाव अल्जाइमर में सूजन को लक्षित करने वाली दवाओं के मानव परीक्षण और रोशनी के संपर्क पर सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशानिर्देशों का विकास होगा।

स्रोतों में मतभेद

विज्ञान और स्वास्थ्य · 5 स्रोत · 2 भाषाएँ

24%कम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र86%
निंदक14%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 2 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
रूसी और सीआईएस प्रेसलैटिन अमेरिकी प्रेस
रूसी और सीआईएस प्रेस
चेतावनीअत्यावश्यकता

सोने से पहले रात की रोशनी या स्क्रीन का उपयोग जैसी सामान्य आदत को अल्जाइमर रोग से जोड़ा गया है। शोध से पता चलता है कि मंद प्रकाश भी सर्कैडियन लय और नींद की गुणवत्ता को बाधित करता है, जिससे न्यूरोडीजेनेरेशन का खतरा बढ़ जाता है। वैज्ञानिक रात के समय प्रकाश के संपर्क पर पुनर्विचार करने का आग्रह करते हैं।

लैटिन अमेरिकी प्रेस/ बाज़ार
व्यावहारिकतासंदेह

डिजिटल जीवनशैली शरीर और मन को नया आकार दे रही है: 'टेक नेक' दर्द से लेकर सोते समय चुप्पी सहन न कर पाने तक। मनोविज्ञान बताता है कि स्क्रीन मल्टीटास्किंग ध्यान को खंडित करती है, जबकि सुबह की सुस्ती एक शारीरिक अवस्था है जिसे विशिष्ट दिनचर्या से दूर किया जा सकता है। दृष्टिकोण व्यावहारिक है, जिसमें व्यावहारिक सुझाव और पृष्ठभूमि शोर की मनोवैज्ञानिक आवश्यकता को समझना शामिल है।

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