
यूरोप में ऐतिहासिक गर्मी: फ्रांस में 48 डूबने से मौतें, ब्रिटेन में जून का रिकॉर्ड टूटा
पश्चिमी यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ तापमान और ओमेगा ब्लॉक के कारण भीषण गर्मी से फ्रांस में कम से कम 48 लोगों की डूबने से मौत, स्कूल-रेल सेवाएं ठप।
पश्चिमी यूरोप में भीषण गर्मी की लहर ने पिछले कुछ दिनों में कई देशों में तापमान के ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और फ्रांस में कम से कम 48 लोगों की जान ले ली है। फ्रांस के प्रधानमंत्री सेबास्तियां लेकोर्नू के अनुसार, 18 जून से अब तक अधिकतर युवा लोग गर्मी से राहत पाने के लिए नदियों और नहरों में तैरते समय डूब गए। स्पेन में दो बुजुर्गों की हीटस्ट्रोक से मौत की पुष्टि हुई है, जबकि इटली में कई शहरों में गर्मी से बेहोशी और मौत की अलग-अलग खबरें हैं, जिनकी अभी आधिकारिक पुष्टि बाकी है।
फ्रांस की राष्ट्रीय मौसम सेवा मेटियो-फ्रांस ने बताया कि मंगलवार को देश का औसत तापमान 29.8°C रहा, जो 1947 में मापन शुरू होने के बाद सबसे अधिक था, और बुधवार को यह बढ़कर 30°C हो गया। दक्षिण-पश्चिम के पिसोस में पारा 44.3°C तक पहुंचा। ब्रिटेन के मौसम विभाग ने बुधवार को जून का सबसे गर्म दिन दर्ज किया—वेस्ट ससेक्स के विगनहोल्ट में 35.8°C—और इंग्लैंड व वेल्स के बड़े हिस्से में दुर्लभ रेड अलर्ट जारी किया। इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय ने रोम, मिलान, फ्लोरेंस समेत 16 शहरों को रेड अलर्ट पर रखा और स्पेन की मौसम एजेंसी ने अंडालूसिया व कांताब्रिया में अधिकतम चेतावनी जारी की।
डूबने से हुई मौतों का आंकड़ा विभिन्न सरकारी बयानों में 40 से 48 के बीच रहा है; फ्रांसीसी अधिकारियों ने पहले 40, फिर 42 और बाद में 48 की पुष्टि की। ब्रिटेन में अभी तक गर्मी से सीधे मौत की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए चेतावनी जारी की है। फ्रांस के ब्रिटनी क्षेत्र में एक ट्रांसफार्मर खराब होने से 68,000 घरों की बिजली गुल रही, जिसे स्थानीय प्रशासन ने “उच्च तापमान से जुड़ा” बताया; परमाणु संयंत्रों ने ठंडे पानी की कमी के कारण उत्पादन घटाया।
मौसम वैज्ञानिक इस गर्मी की लहर को “ओमेगा ब्लॉक” नामक दुर्लभ वायुमंडलीय पैटर्न से जोड़ रहे हैं, जो उत्तरी अफ्रीका से आई गर्म हवा को पश्चिमी यूरोप पर रोके हुए है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे “स्वास्थ्य आपातकाल” करार दिया और कहा कि यूरोप वैश्विक औसत से दोगुनी तेजी से गर्म हो रहा है। जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के बिना यह लहर 2-4°C कम तीव्र होती। यही रुझान दक्षिण एशिया में भी देखा जा रहा है, जहां हाल के वर्षों में घातक गर्मी की घटनाएं बढ़ी हैं और शहरों को अनुकूलन के लिए मजबूर होना पड़ा है।
फ्रांस में 58 विभाग रेड अलर्ट पर हैं और एफिल टॉवर, लूव्र संग्रहालय जैसे स्मारक दोपहर में ही बंद किए जा रहे हैं। ब्रिटेन में रेल कंपनियों ने यात्रियों से केवल आवश्यक यात्रा करने को कहा है और एक हजार से अधिक स्कूल बंद हैं। अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं; मौसम पूर्वानुमान के अनुसार सप्ताहांत तक तापमान में थोड़ी गिरावट संभव है, लेकिन अभी राहत की पुष्टि नहीं हुई है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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यूरोप एक असाधारण गर्मी की चपेट में है। इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय ने 16 शहरों को रेड अलर्ट पर रखा है, जो स्वास्थ्य के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है, और कल 17 होने की संभावना है। फ्रांस में 1947 के बाद सबसे गर्म दिन दर्ज किया गया, पाँच दिनों में 40 लोग डूब गए, और WHO इसे स्वास्थ्य आपातकाल बता रहा है।
यूरोप एक अभूतपूर्व गर्मी की लहर के नीचे 'जल रहा है'। फ्रांस ने अपना अब तक का सबसे गर्म दिन अनुभव किया, 40 लोग डूब गए, जबकि एफिल टॉवर और लूव्र जल्दी बंद हो गए। कुछ लातिन अमेरिकी मीडिया ने व्यंग्यात्मक ढंग से कहा कि 'बैगेट भून रही हैं', और इस घटना को जलवायु परिवर्तन से जोड़ा।
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