
Apple ने MacBook और iPad की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की, AI डेटा सेंटर की मांग बनी वजह
कंपनी ने वैश्विक स्तर पर मेमोरी चिप की कमी और AI इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण लागत बढ़ने का हवाला देते हुए कीमतें 15-25% तक बढ़ा दीं, भारत में कुछ मॉडलों पर एक लाख रुपये तक का उछाल आया।
Apple ने गुरुवार को MacBook और iPad की पूरी रेंज की कीमतों में तत्काल प्रभाव से वैश्विक वृद्धि कर दी, जिससे भारत में MacBook Pro के बेस मॉडल की कीमत 1,69,900 रुपये से सीधे 2,39,900 रुपये पर पहुंच गई — 70,000 रुपये का उछाल। MacBook Air 13-इंच 30,000 रुपये महंगा होकर 1,49,900 रुपये का हो गया, जबकि iPad Air 11-इंच की कीमत 64,900 से बढ़कर 89,900 रुपये हो गई। अमेरिकी बाजार में MacBook Neo 599 डॉलर से 699 डॉलर और iPad Air 599 डॉलर से 749 डॉलर पर पहुंच गया। कंपनी ने iPhone, Apple Watch और AirPods की कीमतों में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया है, हालांकि भविष्य में और उत्पादों पर वृद्धि के संकेत दिए गए हैं।
इस अभूतपूर्व मूल्यवृद्धि के पीछे AI डेटा सेंटरों के तेज़ विस्तार से उपजी मेमोरी और स्टोरेज चिप की भारी मांग है। Counterpoint Research के अनुसार, पिछले तीन तिमाहियों में मेमोरी कीमतें चार गुना तक बढ़ चुकी हैं, और 2026 की पहली तिमाही में अनुबंध कीमतों में 80-90% का उछाल दर्ज किया गया। Apple ने बयान में कहा, “हमने कभी किसी कंपोनेंट की कीमत में इतनी बड़ी और इतनी तेज़ वृद्धि नहीं देखी।” मुख्य कार्यकारी टिम कुक ने इसे “सौ साल की बाढ़” करार देते हुए कहा कि स्थिति अस्थिर हो गई है और मूल्यवृद्धि “अनिवार्य” थी।
वैश्विक स्तर पर, AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर केंद्रित निवेश ने मेमोरी निर्माताओं जैसे Micron और SK Hynix को उच्च-मार्जिन वाले डेटा सेंटर ग्राहकों को प्राथमिकता देने पर मजबूर कर दिया है, जिससे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए आपूर्ति सीमित हो गई है। Morgan Stanley ने इस घटना को “चिपफ्लेशन” नाम दिया है। इसका असर केवल Apple तक सीमित नहीं है — Microsoft, Dell, HP, Lenovo, Sony और Nintendo भी पहले ही अपने उत्पादों की कीमतें बढ़ा चुके हैं। Apple के शेयर में गुरुवार को 5.3% तक की गिरावट आई, जो चार महीनों में सबसे बड़ी इंट्राडे गिरावट थी।
भारतीय बाजार में यह वृद्धि खासतौर पर चौंकाने वाली है, क्योंकि MacBook Pro के M5 Max वेरिएंट पर एक लाख रुपये तक का अंतर आया है। Apple इंडिया की वेबसाइट पर संशोधित कीमतें तुरंत लागू कर दी गईं, जबकि कुछ तृतीय-पक्ष विक्रेताओं पर पुरानी कीमतें अभी भी दिख रही थीं। कंपनी ने कहा कि वह “अथक रूप से समाधान खोजने में जुटी है”, लेकिन अभी ग्राहकों को बोझ उठाना पड़ेगा।
अगला ध्यान सितंबर में अपेक्षित iPhone 18 सीरीज़ पर होगा। Counterpoint Research के अनुमानों के अनुसार, चिप लागत के चलते iPhone की कीमतों में 150-200 डॉलर तक की वृद्धि संभव है। इसके अलावा, 1 सितंबर को टिम कुक के स्थान पर जॉन टर्नस के CEO बनने के बाद कंपनी की आपूर्ति श्रृंखला रणनीति पर भी नज़र रहेगी। विश्लेषकों का मानना है कि मेमोरी की कमी कम से कम 2027 तक बनी रह सकती है, जिससे उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों पर दबाव जारी रहेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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एप्पल ने मैकबुक और आईपैड की कीमतों में लगभग 20% की वृद्धि की है, और इस वृद्धि को सीधे तौर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उछाल से प्रेरित मेमोरी चिप की लागत में वृद्धि से जोड़ा है। यह पहली बार है जब किसी बड़ी उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी ने मूल्य वृद्धि का सीधा कारण एआई से संबंधित मांग को बताया है, जो इस बात का संकेत है कि प्रौद्योगिकी का प्रभाव अब आम खरीदारों तक पहुँच रहा है।
मैकबुक और आईपैड अभी-अभी काफी महंगे हो गए हैं, कीमतों में 300 डॉलर तक की वृद्धि हुई है, क्योंकि एआई उछाल मेमोरी चिप की लागत बढ़ा रहा है। सीईओ टिम कुक ने चेतावनी दी कि ये वृद्धि 'अपरिहार्य' थी, और सीधे एआई उछाल को दोषी ठहराया। उपभोक्ता अब एआई क्रांति की वित्तीय चपेट में आ रहे हैं।
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