
जर्मनी की जीत पर टिकी मिस्र की निगाहें, ईरान से भिड़ंत से पहले ही तय हो सकता है इतिहास
मिस्र को पहली बार विश्व कप नॉकआउट में पहुंचने के लिए ईरान के खिलाफ मैदान में उतरने की भी जरूरत नहीं पड़ सकती, बशर्ते जर्मनी इक्वाडोर को हरा दे।
काहिरा से सियोल तक फुटबॉल प्रेमियों की निगाहें शुक्रवार रात जर्मनी और इक्वाडोर के मुकाबले पर टिकी हैं, क्योंकि इसका सीधा असर ‘फराओं’ की किस्मत पर पड़ेगा। अगर जर्मनी ने इक्वाडोर को हराया या मैच ड्रॉ रहा, तो मिस्र की टीम शनिवार सुबह ईरान के खिलाफ उतरने से पहले ही 2026 विश्व कप के 32 के दौर में अपनी जगह पक्की कर लेगी। यह पहली बार होगा जब मिस्र ग्रुप चरण की दीवार लांघकर नॉकआउट में प्रवेश करेगा।
मिस्र ने ग्रुप जी में अब तक का सफर यादगार बनाया है। हुसाम हसन की टीम ने पहले मैच में बेल्जियम से 1-1 की बराबरी की, फिर न्यूजीलैंड को 3-1 से रौंदकर विश्व कप में अपनी पहली जीत दर्ज की। चार अंकों के साथ टीम ग्रुप में शीर्ष पर है, जबकि ईरान और बेल्जियम के दो-दो अंक हैं। मिस्र के स्टार विंगर मुस्तफा जीको ने ईरान को बेल्जियम और न्यूजीलैंड से भी ‘कठिन प्रतिद्वंद्वी’ बताया है, लेकिन उनकी टीम को सीधे भिड़ंत से पहले ही जश्न का मौका मिल सकता है।
इसकी वजह 48 टीमों वाले नए प्रारूप में छिपी है, जहां हर ग्रुप की शीर्ष दो टीमों के अलावा आठ सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीमें भी अगले दौर में जाती हैं। मिस्र के चार अंक पहले ही तीन अन्य ग्रुप की तीसरी टीमों से बेहतर हैं: ग्रुप ए का दक्षिण कोरिया (3 अंक), ग्रुप सी का स्कॉटलैंड (3 अंक) और ग्रुप I की तीसरी टीम (सेनेगल या इराक, अधिकतम 3 अंक)। अब अगर जर्मनी के हाथों इक्वाडोर चार अंक तक नहीं पहुंच पाता और आइवरी कोस्ट कुराकाओ को हराने या ड्रॉ खेलने में सफल रहता है, तो कुराकाओ भी चार अंक की दहलीज से दूर रहेगा। ऐसे में मिस्र कम से कम चार तीसरी टीमों से ऊपर रहकर नॉकआउट का टिकट कटा लेगा।
अरब जगत में इस ऐतिहासिक संभावना को लेकर जबरदस्त उत्साह है। मोरक्को पहले ही 32 के दौर में पहुंच चुका है, जबकि अल्जीरिया और सऊदी अरब भी दावेदारी में बने हुए हैं। एशियाई फुटबॉल के लिए यह ग्रुप निर्णायक रहने वाला है, क्योंकि ईरान को भी आगे बढ़ने के लिए मिस्र के खिलाफ कम से कम एक अंक की दरकार होगी। ईरानी मीडिया ने भी इस समीकरण को विस्तार से रेखांकित किया है कि कैसे ‘फराओं’ का भाग्य उनके मैच से पहले ही सील हो सकता है।
शनिवार सुबह सिएटल में होने वाली मिस्र-ईरान भिड़ंत अब सिर्फ ग्रुप विजेता का फैसला कर सकती है, बशर्ते जर्मनी अपना काम कर दे। मिस्र के लिए यह मैच इतिहास रचने का औपचारिक मौका बन जाएगा, जबकि ईरान के सामने जीत के अलावा बेल्जियम-न्यूजीलैंड मुकाबले पर निर्भरता का जटिल समीकरण होगा। पूरे अरब और एशियाई फुटबॉल प्रेमियों की निगाहें अब बर्लिन की उस रात पर हैं, जो सिएटल की सुबह से पहले मिस्र का सपना सच कर सकती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ईरानी मीडिया इस बात पर जोर देता है कि अगर जर्मनी ने इक्वाडोर को हरा दिया तो मिस्र ईरान से भिड़ने से पहले ही नॉकआउट चरण के लिए क्वालीफाई कर सकता है। मिस्र के एक खिलाड़ी के हवाले से कहा गया है कि ईरान बेल्जियम और न्यूज़ीलैंड से ज़्यादा कठिन प्रतिद्वंद्वी है, जिससे उस मुक़ाबले का रोमांच बढ़ गया है जो शायद मिस्र की क़िस्मत तय होने के बाद खेला जाए। रिपोर्टिंग व्यावहारिक और संयमित है, जो ग्रुप की गणितीय संभावनाओं पर केंद्रित है।
खाड़ी अरब मीडिया क्षेत्रीय फ़ुटबॉल के लिए एक ऐतिहासिक पल का जश्न मना रहा है: मोरक्को पहले ही क्वालीफाई कर चुका है, मिस्र कगार पर है और अल्जीरिया व सऊदी अरब के पास अब भी मौक़ा है। ज़ोर सामूहिक गर्व और नॉकआउट चरण में रिकॉर्ड अरब मौजूदगी की संभावना पर है। कहानी विजयी लहज़े को बाक़ी बची योग्यता राहों पर व्यावहारिक नज़रिए के साथ मिलाती है।
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