
एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट से डिमेंशिया का खतरा 29% तक कम: 15 साल का स्वीडिश अध्ययन
करोलिंस्का इंस्टीट्यूट के शोध में 1,865 वृद्धों पर नजर रखी गई; सूजनरोधी भोजन ने मस्तिष्क में बीमारी के शुरुआती चिह्नों के बावजूद जोखिम घटाया।
जामा नेटवर्क ओपन में प्रकाशित एक अवलोकनात्मक अध्ययन के अनुसार, सूजनरोधी आहार अपनाने वाले वृद्धों में डिमेंशिया का जोखिम 29 प्रतिशत तक कम पाया गया। स्वीडन के करोलिंस्का इंस्टीट्यूट ने 1,865 प्रतिभागियों पर 15 वर्षों तक निगरानी रखी। अध्ययन की प्रमुख लेखिका अंजा मरहर ने बताया कि आहार की गुणवत्ता उन लोगों में भी जोखिम घटाने में सहायक रही जिनके रक्त में अल्जाइमर से जुड़े जैवचिह्नक पहले से मौजूद थे।
इस संरक्षण के पीछे कारण पुरानी सूजन को माना जा रहा है। अधिक शर्करा, परिष्कृत कार्बोहाइड्रेट और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के सेवन से रक्त में सूजनकारी अणु सक्रिय होते हैं, जो मस्तिष्क की रक्षा-दीवार पार कर तंत्रिका ऊतकों को क्षति पहुँचाते हैं और बीटा-एमिलॉइड व टाउ प्रोटीन के जमाव को तेज करते हैं। इसके विपरीत, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, रंगीन फल, मेवे, साबुत अनाज, जैतून का तेल और ओमेगा-3 युक्त खाद्य पदार्थ इस सूजन को शांत करते हैं। विशेषज्ञ इसे भूमध्यसागरीय आहार पैटर्न जैसा बताते हैं, जिसमें किसी एक जादुई भोजन के बजाय समग्र खान-पान पर जोर दिया जाता है।
लैटिन अमेरिका में पैन अमेरिकन हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (ओपीएस) ने स्पष्ट किया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड उत्पाद पोषण का आधार नहीं हो सकते, क्योंकि वे शर्करा, वसा और सोडियम की अनुशंसित सीमाओं को पार कर जाते हैं। अर्जेंटीना जैसे देशों में पैकेट पर लगाए जाने वाले हेक्सागोनल चेतावनी चिह्न उपभोक्ताओं को जागरूक कर रहे हैं। वहीं, एक अन्य हालिया अध्ययन में दैनिक तेज रोशनी, विशेषकर सुबह की धूप, को भी डिमेंशिया से बचाव का सरल उपाय बताया गया है। यह मस्तिष्क की मुख्य घड़ी को सक्रिय कर नींद की गुणवत्ता सुधारती है और विषैले प्रोटीन की सफाई में मदद करती है।
ये सभी निष्कर्ष अवलोकनात्मक अध्ययनों पर आधारित हैं, इसलिए कारण-कार्य संबंध स्थापित नहीं हुआ है। फिर भी, यह बढ़ते प्रमाणों में इजाफा करते हैं कि जीवनशैली में बदलाव मस्तिष्क स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। अगला वैज्ञानिक पड़ाव इन प्रभावों की पुष्टि के लिए यादृच्छिक नियंत्रित परीक्षण होंगे। तब तक, सार्वजनिक स्वास्थ्य दिशानिर्देशों में आहार पैटर्न और प्रकाश संपर्क जैसे कारकों को अधिक महत्व मिलने की संभावना है।
| उप-सहारा अफ़्रीकी प्रेस | +0.20 | neutral |
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| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
The sub-Saharan African community adopts the Swedish experts' advice as confirmation of its traditional dietary recommendations, promoting natural and moderate eating.
The scientific result is presented as a validation of existing local dietary practices, making the message more familiar and acceptable.
Southeast Asia sounds an alarm: the Swedish study shows that junk food is a silent enemy of the mind, and only an anti-inflammatory diet can save us.
The risk of dementia is directly linked to processed food consumption, creating a sense of urgency and fear to drive action.
Latin America adopts a cautious approach: the Swedish study is interesting, but one must not forget that each person has different needs and that fruit, though healthy, must be portioned.
The scientific result is subjected to critical examination based on specific medical conditions, limiting its universal scope.
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