
तेल की कीमतें युद्ध-पूर्व स्तर पर: होर्मुज वार्ता में प्रगति और आपूर्ति बहाली से ब्रेंट 70 डॉलर के पार
अमेरिका-ईरान अप्रत्यक्ष वार्ता के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से टैंकर आवाजाही बढ़ने और ओपेक+ उत्पादन वृद्धि की संभावना से कच्चे तेल में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज हुई।
वैश्विक तेल बाजार में गुरुवार को ब्रेंट क्रूड 1.1 प्रतिशत गिरकर 70.80 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो फरवरी के अंतिम सप्ताह के बाद का सबसे निचला स्तर है। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) भी 1.2 प्रतिशत की गिरावट के साथ 67.74 डॉलर पर बंद हुआ। यह गिरावट कतर की राजधानी दोहा में हुई अमेरिका-ईरान अप्रत्यक्ष वार्ता में ‘सकारात्मक प्रगति’ की घोषणा के तुरंत बाद आई, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक नौवहन बहाली पर सहमति बनी।
मूल्य में इस तेज गिरावट के पीछे आपूर्ति पक्ष के कई कारक सक्रिय हैं। संयुक्त अरब अमीरात ने अपना कच्चे तेल का निर्यात युद्ध-पूर्व स्तर 3.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन से ऊपर पहुंचा दिया है, जबकि सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों को स्पॉट बिक्री तेज कर दी है। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, होर्मुज से होकर गुजरने वाली तेल आपूर्ति 10 मिलियन बैरल प्रतिदिन के पार चली गई है। दूसरी ओर, चीन का कच्चे तेल का आयात पिछले महीनों में 40 प्रतिशत तक गिरा है, जिससे मांग में कमजोरी बनी हुई है। ईरान के पास समुद्र और स्थल पर लगभग 140 मिलियन बैरल भंडार है, जो बाजार में आने को तैयार है।
वित्तीय संस्थानों ने अपने मूल्य अनुमान घटा दिए हैं। स्विस बैंक यूबीएस ने ब्रेंट के लिए सितंबर तिमाही का औसत पूर्वानुमान 25 डॉलर घटाकर 80 डॉलर प्रति बैरल कर दिया, हालांकि उसने चेताया कि फारस की खाड़ी में आने वाले टैंकरों की संख्या अभी भी बाहर जाने वालों से कम है, इसलिए पूर्ण सामान्यीकरण मान लेना जल्दबाजी होगी। सिंगापुर स्थित ओसीबीसी बैंक ने भी तीसरी तिमाही के अनुमान को 85 से घटाकर 75 डॉलर कर दिया। ब्रेंट का वायदा बाजार अब कंटैंगो संरचना में कारोबार कर रहा है, जो अल्पकालिक अतिरिक्त आपूर्ति का संकेत है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता का दावा करते हुए अगस्त के मध्य से वाणिज्यिक जहाजों पर पारगमन शुल्क लगाने की बात दोहरा रहा है, जबकि अमेरिका मुक्त नौवहन पर जोर देता है। परमाणु कार्यक्रम और निरीक्षण को लेकर मतभेद बरकरार हैं। अगले दौर की वार्ता ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद निर्धारित होगी, जो 4 जुलाई से शुरू होने वाले हैं।
अब सबकी निगाहें रविवार को होने वाली ओपेक+ की बैठक पर हैं, जहां अगस्त के लिए उत्पादन लक्ष्य में लगभग 188,000 बैरल प्रतिदिन की और वृद्धि की संभावना है। भारत जैसे प्रमुख आयातक देशों के लिए कीमतों में यह नरमी चालू खाता घाटे और मुद्रास्फीति के दबाव को कम कर सकती है, बशर्ते भू-राजनीतिक तनाव दोबारा न भड़के।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| अरब खाड़ी प्रेस | 0.00 | neutral |
Domestic security and economic sovereignty are absolute priorities; oil price fluctuations are external events that do not deserve attention.
The omission of the news reinforces the image of a country immune to global turbulence, focusing on control and internal stability.
The drop in oil price is not reported, an event that could signal economic vulnerability for a major exporter like Russia.
Economic development and regional stability are central; oil market volatility is a managed variable, not an event to highlight.
The absence of the news is normalized by presenting a positive agenda of projects and partnerships, suggesting that price fluctuations do not undermine economic confidence.
The Brent drop is not mentioned, which could indicate reduced revenues for Gulf countries, but a serene economic landscape is preferred.
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