
30 जून को 'स्ट्रॉबेरी माइक्रोमून' का दुर्लभ संयोग, 2043 तक नहीं दिखेगा ऐसा नज़ारा
जून की पूर्णिमा इस बार पृथ्वी से सबसे दूर बिंदु पर होने के कारण सामान्य से छोटी और धुंधली दिखेगी, और उत्तरी गोलार्ध में यह दो दशकों में सबसे नीचे रहने वाला चंद्रमा होगा।
30 जून, 2026 को आकाश में एक ऐसा खगोलीय संयोग बन रहा है जो अगले 17 वर्षों तक दोबारा नहीं दिखेगा। इस रात पूर्णिमा का चंद्रमा अपनी कक्षा में पृथ्वी से सबसे दूर स्थित बिंदु 'अपोजी' के निकट होगा, जिसे 'माइक्रोमून' कहा जाता है। यह सुपरमून के विपरीत स्थिति है, जिसमें चंद्रमा पृथ्वी के सबसे करीब होता है। परिणामस्वरूप, चंद्रमा सामान्य पूर्णिमा की तुलना में थोड़ा छोटा और कम चमकीला प्रतीत होगा। लेकिन इससे भी अधिक उल्लेखनीय इसकी आकाशीय पथ है: उत्तरी गोलार्ध में यह चंद्रमा क्षितिज के बेहद नीचे से गुज़रेगा, जो 18.6 वर्षीय चक्र के चरम बिंदु पर होने के कारण 2043 तक का सबसे निचला पूर्ण चंद्रमा होगा।
इस खगोलीय घटना के पीछे चंद्रमा का धनु राशि के तारामंडल से गुज़रना है, जहाँ आकाशगंगा का केंद्र स्थित है। इस दिशा में देखने पर प्रेक्षक वास्तव में हमारी मंदाकिनी के हृदय की ओर निहार रहे होंगे। चंद्रोदय और चंद्रास्त के समय वायुमंडलीय प्रकीर्णन के कारण चंद्रमा नारंगी या सुनहरे रंग का दिख सकता है, लेकिन 'स्ट्रॉबेरी मून' नाम का रंग से कोई संबंध नहीं है। यह नाम उत्तरी अमेरिका की अल्गोंक्विन जनजातियों की परंपरा से आया है, जो जून की पूर्णिमा को जंगली स्ट्रॉबेरी की फ़सल के मौसम की शुरुआत के रूप में चिह्नित करती थीं।
विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में यह घटना अलग-अलग रूपों में अनुभव की जाएगी। संयुक्त अरब अमीरात में दुबई एस्ट्रोनॉमी ग्रुप के अनुसार चंद्रमा 30 जून को शाम 7:49 बजे उदय होगा और अगली सुबह 6:25 बजे अस्त होगा, जिसे नंगी आँखों से देखा जा सकेगा। अर्जेंटीना और दक्षिणी गोलार्ध के अन्य देशों में यह पूर्णिमा, जो 21 जून के शीतकालीन संक्रांति के बाद पहली है, आकाश में सामान्य से काफ़ी ऊँचाई पर दिखाई देगी। वहीं जर्मनी और ब्रिटेन जैसे उत्तरी यूरोपीय देशों में यह क्षितिज के बेहद करीब रहेगा, जिससे 'मून इल्यूज़न' नामक दृष्टिभ्रम के कारण यह वास्तविक आकार से बड़ा प्रतीत हो सकता है।
यह तिथि एक और वैश्विक जागरूकता अभियान 'अंतर्राष्ट्रीय क्षुद्रग्रह दिवस' के साथ भी मेल खाती है, जो 1908 की साइबेरियाई टंगुस्का घटना की वर्षगांठ पर मनाया जाता है। दुबई में इस अवसर पर एक सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है जिसमें उल्कापिंड प्रदर्शनी, क्षुद्रग्रह विज्ञान पर वार्ता और दूरबीन से बृहस्पति जैसे ग्रहों का अवलोकन शामिल है। म्यूनिख के टॉलवुड समर फेस्टिवल में ब्रिटिश कलाकार ल्यूक जेराम की 7 मीटर व्यास वाली 'म्यूज़ियम ऑफ़ द मून' नामक चंद्रमा की विशाल प्रतिकृति प्रदर्शित की जा रही है, जो कला और खगोल विज्ञान का संगम प्रस्तुत करती है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस माइक्रोमून का पृथ्वी के ज्वार-भाटे, मौसम या भूकंपीय गतिविधियों पर कोई सार्थक प्रभाव नहीं पड़ता। सर्वोत्तम दृश्य के लिए शहर की रोशनी से दूर, खुले क्षितिज वाले स्थान पर चंद्रोदय के तुरंत बाद का समय उपयुक्त रहेगा। अगली बार इतना नीचा पूर्ण चंद्रमा देखने के लिए प्रेक्षकों को 2043 तक प्रतीक्षा करनी होगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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जून की पूर्णिमा 2043 तक आकाश में सबसे नीचे होगी, जो क्षितिज के पास एक आकर्षक चंद्र भ्रम पैदा करेगी। यह दुर्लभ खगोलीय संरेखण एक अनूठा अवलोकन अवसर प्रदान करता है, जिसे एक दीर्घकालिक खगोलीय घटना के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
30 जून को तथाकथित स्ट्रॉबेरी मून विशेष रूप से चार राशियों को प्रभावित करेगा, जिससे तीव्र भावनाएं और बेचैन रातें आएंगी। हालांकि इसका नाम रोमांटिक लगता है, लेकिन चंद्रमा वास्तव में लाल नहीं होगा, और ज्योतिषीय व्याख्याएं संदेह के स्पर्श के साथ प्रस्तुत की गई हैं।
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