
यूरोपीय संघ के 21वें प्रतिबंध पैकेज पर गतिरोध: ग्रीस की आपत्ति से बढ़ा समय का दबाव
रूसी तेल मूल्य सीमा की समयसीमा नजदीक आने के बीच, यूरोपीय संघ के 21वें प्रतिबंध पैकेज पर ग्रीस के विरोध ने सहमति की राह रोक दी है।
यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के राजदूत बुधवार को रूस के खिलाफ 21वें प्रतिबंध पैकेज पर सहमति बनाने के लिए बैठक कर रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब रूसी कच्चे तेल की मूल्य सीमा को लेकर गुरुवार की समयसीमा सिर पर है। यदि कोई समझौता नहीं होता है तो मौजूदा 44 डॉलर प्रति बैरल की सीमा स्वतः बढ़कर 58 डॉलर हो सकती है, जिससे मास्को को आर्थिक लाभ होगा। पिछले सप्ताह यह वार्ता विफल हो गई थी, जिसके बाद समयसीमा एक सप्ताह के लिए टाल दी गई थी।
यूरोपीय संघ के राजनयिक सूत्रों के अनुसार, गतिरोध का मुख्य कारण ग्रीस का विरोध है। ग्रीक सरकार का तर्क है कि रूसी तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) के परिवहन पर प्रस्तावित प्रतिबंधों से यूरोपीय शिपिंग कंपनियों का कारोबार गैर-यूरोपीय प्रतिस्पर्धियों के हाथ में चला जाएगा, जबकि रूस की आय पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ग्रीस वैश्विक एलएनजी वाहक बेड़े का एक बड़ा संचालक है। इसके अलावा, जर्मनी और पुर्तगाल ने रूसी मछली के आयात पर प्रतिबंध का विरोध किया है, फ्रांस और इटली रूसी सैन्यकर्मियों पर वीजा प्रतिबंधों में ढील चाहते हैं, और ऑस्ट्रिया राइफाइजन बैंक पर लगे जुर्माने की भरपाई के लिए रूसी परिसंपत्तियों को अनफ्रीज करने की मांग कर रहा है। राजनयिकों को उम्मीद थी कि हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन के हटने के बाद प्रतिबंधों पर सहमति आसान होगी, लेकिन नए मतभेद सामने आ गए हैं।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इन घटनाक्रमों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यूरोपीय संघ के प्रतिबंध अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से अवैध हैं और इनकी कोई सीमा नहीं है, ठीक वैसे ही जैसे “पागलपन की कोई सीमा नहीं होती।” उन्होंने जोर देकर कहा कि अब तक के प्रतिबंध अप्रत्यक्ष रूप से यूरोपीय करदाताओं और कारोबारों को अरबों डॉलर का नुकसान पहुंचा चुके हैं, लेकिन नए प्रस्तावित कदम सीधे यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के हितों पर चोट करेंगे और यह “कहीं अधिक दर्दनाक” होगा। पेस्कोव ने यूक्रेन के सैन्य नेतृत्व में फेरबदल को कीव शासन की आंतरिक अस्थिरता का संकेत भी बताया।
यह प्रतिबंध पैकेज रूसी बैंकिंग क्षेत्र को निशाना बनाता है, जिसमें लगभग 94 वित्तीय संस्थाओं सहित 215 व्यक्तियों और संस्थाओं को सूची में शामिल किया जाना है। यूरोपीय आयोग का उद्देश्य तीसरे देशों को इन बैंकों के साथ लेन-देन से हतोत्साहित करना है, हालांकि इन बैंकों के यूरोपीय संघ से मौजूदा संबंध न्यूनतम हैं। दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के लिए, जो रूसी तेल का बड़ा आयातक है, मूल्य सीमा का स्तर सीधे आयात लागत को प्रभावित करता है। साथ ही, एलएनजी परिवहन प्रतिबंधों से वैश्विक शिपिंग बाजार का स्वरूप बदल सकता है, जिसका असर भारतीय ऊर्जा कंपनियों पर भी पड़ सकता है। यूरोपीय संघ के राजनयिक सूत्रों के अनुसार, गतिरोध से निकलने के लिए तीन विकल्पों पर विचार हो रहा है: 24 महीने की संक्रमण अवधि देना, एलएनजी खंड को पूरी तरह हटाना, या पूरा पैकेज रद्द करना। राजदूतों की बैठक में बुधवार को निर्णय होने की संभावना है, जबकि तेल मूल्य सीमा पर अंतिम फैसला गुरुवार तक अपेक्षित है।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.80 | critical |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
Russia denounces EU sanctions as illegal and self-harming, and highlights the bloc's impotence in the face of internal divisions.
Russian rhetoric uses the metaphor of 'madness' to delegitimize sanctions, and cites national resistance as proof of the failure of the European strategy.
The context of Russia's invasion of Ukraine as the cause of sanctions is omitted, as is the support of the majority of EU states for the measures.
The EU seeks a technical compromise to approve the 21st package, but Greece blocks measures on LNG and the oil price cap.
The account focuses on deadlines and procedural obstacles, presenting sanctions as a matter of negotiation between national interests, not as a geopolitical confrontation.
The role of Russia as aggressor and the moral dimension of sanctions are omitted, reducing the issue to a problem of internal coordination.
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The context of the Russian invasion and the position of the majority of EU countries in favor of sanctions are omitted, emphasizing only the dissenting voices.
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