
अंटार्कटिका में 40 साल बाद डायनासोर जीवाश्म की पहचान, दुनिया भर के संग्रहालयों में नई सोच
एक भूला हुआ जीवाश्म अंटार्कटिका के डायनासोर इतिहास को उजागर करता है, जबकि स्टॉकहोम, कैनबरा और वाशिंगटन में संग्रहालय अतीत की खोजों को नए सिरे से प्रस्तुत कर रहे हैं।
1985 में अंटार्कटिका की जेम्स रॉस द्वीप पर एक अभियान के दौरान मिला जीवाश्म लगभग चार दशकों तक ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वेक्षण के संग्रह में अज्ञात पड़ा रहा। अब शोधकर्ताओं ने इसकी पहचान टाइटानोसोर नामक शाकाहारी डायनासोर की पूंछ की हड्डी के रूप में की है, जो अंटार्कटिका से पहचाना गया पहला डायनासोर जीवाश्म है। ‘एक्टा पैलियोन्टोलॉजिका पोलोनिका’ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, लगभग 10 सेंटीमीटर चौड़ा यह कशेरुक खंड लगभग 8.2 करोड़ वर्ष पुराना है और संभवतः सात मीटर लंबे एक अपरिपक्व या अपेक्षाकृत छोटे कद के वयस्क डायनासोर का था। यह खोज अंटार्कटिका के उस दौर की पारिस्थितिकी को समझने में सहायक है जब वहाँ घने वन थे।
यह वैज्ञानिक उपलब्धि एक व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है जिसमें संग्रहालय अपने ऐतिहासिक संग्रहों की पुनर्व्याख्या कर रहे हैं। स्टॉकहोम के एथनोग्राफिक संग्रहालय में ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी समुदाय जिरबाल की तीन महिलाओं ने उन वस्तुओं का अध्ययन किया जिन्हें 1910 के दशक में स्वीडिश वैज्ञानिक एरिक म्योबर्ग उनके पूर्वजों से ले गया था। यह सहयोग दिसंबर में खुलने वाली स्वीडन के औपनिवेशिक इतिहास पर एक नई प्रदर्शनी की तैयारी का हिस्सा है। महिलाओं ने बताया कि कई वस्तुएं संभवतः चुराई गई थीं, लेकिन अब वे दुर्लभ रूप से अच्छी स्थिति में संरक्षित हैं, जिससे विलुप्त होती शिल्पकला और भाषा को पुनर्जीवित करने की उम्मीद जगी है।
कैनबरा में ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय संग्रहालय ने ‘अंटार्कटिका’ प्रदर्शनी शुरू की है, जिसमें ऑस्ट्रेलियाई अंटार्कटिक प्रभाग द्वारा दान की गई 200 से अधिक कलाकृतियाँ पहली बार प्रदर्शित की गई हैं। इनमें 1975 का मोल मिंक वाहन, 1955 की बार्ज कारवां, 8.5 टन का ट्रैक्टर, स्लेज कुत्तों के टैक्सिडर्मी नमूने और 1969 में अंटार्कटिका में बनी बीयर की बोतल शामिल हैं। वरिष्ठ क्यूरेटर लौरा कुक के अनुसार, यह संग्रह दुनिया के सबसे बड़े अंटार्कटिक संग्रहों में से एक है और यह महाद्वीप पर मानवीय प्रयासों की कहानी कहता है।
वाशिंगटन डीसी में 26 जून को खुले नेशनल ज्योग्राफिक म्यूजियम ऑफ एक्सप्लोरेशन ने 138 वर्षों की खोज यात्राओं को इंटरैक्टिव तकनीक से जीवंत किया है। 30 करोड़ डॉलर की लागत से बने इस संग्रहालय में 270-डिग्री थिएटर, 18,000 से अधिक प्रजातियों की तस्वीरों वाली फोटो आर्क गैलरी और पर्वतारोहण से लेकर गहरे समुद्र तक के अनुभव दर्शकों को एक खोजकर्ता की भूमिका में डालते हैं। इसका उद्देश्य विज्ञान और संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
भारत के अपने अंटार्कटिक अनुसंधान केंद्र और समृद्ध संग्रहालय परंपरा के संदर्भ में ये वैश्विक पहल प्रासंगिक हैं। भारतीय संस्थान औपनिवेशिक काल के संग्रहों के पुनर्मूल्यांकन और विज्ञान संचार में इन मॉडलों से सीख सकते हैं। अगला ठोस पड़ाव स्टॉकहोम प्रदर्शनी का दिसंबर में उद्घाटन और कैनबरा प्रदर्शनी का 11 अक्टूबर तक चलना है, जबकि अंटार्कटिक जीवाश्म पर आगे के अध्ययन से इस डायनासोर की प्रजाति की सटीक पहचान हो सकती है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ
यूरोपीय नृवंशविज्ञान संग्रहालय अपने औपनिवेशिक अतीत का सामना बेचैनी और व्यावहारिकता के मिश्रण से कर रहे हैं। स्टॉकहोम में एक नई प्रदर्शनी, जिसे ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी प्रतिनिधियों के सहयोग से विकसित किया गया है, औपनिवेशिक युग के दौरान एकत्रित विवादास्पद वस्तुओं पर प्रकाश डालने का प्रयास करती है। यह पहल दर्शाती है कि सांस्कृतिक संस्थानों का उपनिवेशवाद से मुक्त होना कितना जटिल और पीड़ादायक है।
अंटार्कटिका को अन्वेषण और मानवीय सहनशक्ति की विरासत के रूप में मनाया जा रहा है, जिसकी अब तक की सबसे बड़ी संग्रहों में से एक ऑस्ट्रेलिया में प्रदर्शित की गई है। यह प्रदर्शनी एक सदी से अधिक के अंटार्कटिक अभियानों को उजागर करती है, सैकड़ों कलाकृतियों को पहली बार जनता के सामने लाती है। जोर सामूहिक प्रयास और वैज्ञानिक विरासत पर है, औपनिवेशिक विवादों का कोई उल्लेख नहीं है।
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
नॉर्ड स्ट्रीम तोड़फोड़: जर्मनी ने यूक्रेनी अधिकारियों को सीधे जिम्मेदार ठहराया
11 भाषाएँ · 18 स्रोत
Economy & Markets सेOpenAI ने अमेरिकी सरकार को 5% हिस्सेदारी देने का प्रस्ताव रखा
10 भाषाएँ · 22 स्रोत
Technology सेभारत ने व्हाट्सएप का यूजरनेम फीचर रोका, टेलीग्राम और सिग्नल पर भी शिकंजा
4 भाषाएँ · 21 स्रोत