
64 टीमों वाला विश्व कप? इन्फेंटिनो ने 2030 के लिए खोला विस्तार का रास्ता
फीफा अध्यक्ष ने कहा कि 2026 विश्व कप के बाद 64 टीमों के प्रारूप पर चर्चा होगी, जिससे छोटे देशों को मौका मिलेगा और एशियाई कोटा बढ़ सकता है।
फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो ने रविवार को स्विस मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि 2030 विश्व कप में 64 टीमों को शामिल करने का प्रस्ताव मौजूदा टूर्नामेंट की समाप्ति के बाद संबंधित समितियों में जांचा और बहस किया जाएगा। उन्होंने कहा, 'यह निश्चित रूप से एक ऐसा मुद्दा है जिसकी जांच और चर्चा इस विश्व कप के बाद होगी।' इन्फेंटिनो ने 48 टीमों वाले मौजूदा प्रारूप को 'सौ प्रतिशत सफलता' बताते हुए तर्क दिया कि हर देश को विश्व कप में भाग लेने का सपना देखने का अधिकार है और छोटे देशों को मौका न मिलने पर उनके सुधार का प्रोत्साहन खत्म हो जाएगा। उन्होंने अफ्रीकी टीमों के प्रदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि दस में से नौ अफ्रीकी टीमें नॉकआउट चरण में पहुंचीं, जो विस्तार के लाभ को दर्शाता है।
यह प्रस्ताव पहली बार मार्च 2025 में उरुग्वे फुटबॉल संघ के अध्यक्ष इग्नासियो अलोंसो ने फीफा काउंसिल की बैठक में रखा था, जिसे बाद में कोनमेबोल अध्यक्ष एलेजांद्रो डोमिंगेज ने 'दुनिया को एक बार जोड़ने वाला सपना' बताकर समर्थन दिया। 2030 का विश्व कप पहले ही छह देशों—स्पेन, पुर्तगाल, मोरक्को, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पैराग्वे—में खेला जाना तय है, जिसमें दक्षिण अमेरिकी मेज़बान केवल एक-एक उद्घाटन मैच की मेज़बानी करेंगे। 64 टीमों के प्रारूप में इन तीनों देशों को पूरे ग्रुप चरण के मैच आयोजित करने का अवसर मिल सकता है, जिससे उनकी भागीदारी बढ़ेगी।
हालांकि, इस विस्तार को लेकर वैश्विक महाद्वीपीय संघों में मतभेद हैं। यूरोपीय संघ (यूईएफए) के अध्यक्ष अलेक्सांदर चेफेरिन ने इसे 'बुरा विचार' करार दिया, जबकि एशियाई फुटबॉल परिसंघ (एएफसी) के अध्यक्ष शेख सलमान बिन इब्राहिम अल खलीफा ने चेतावनी दी कि इससे 'अराजकता' फैल सकती है। उत्तरी अमेरिकी संघ (कनकाकाफ) के अध्यक्ष विक्टर मोंटाग्लियानी ने भी कहा कि यह 'अच्छा विचार नहीं' है और इससे पूरे फुटबॉल पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान होगा। दूसरी ओर, अफ्रीकी संघ (सीएएफ) और एएफसी ने इन्फेंटिनो के 2027 के पुनर्निर्वाचन अभियान का समर्थन किया है, जिससे इस प्रस्ताव को राजनीतिक बल मिल सकता है। व्हाइट हाउस की विश्व कप कार्यबल के कार्यकारी निदेशक एंड्रयू जुलियानी ने कहा कि अमेरिका 2038 में 64 टीमों के टूर्नामेंट की मेज़बानी कर सकता है।
दक्षिण एशिया और भारत के लिए यह प्रस्ताव विशेष महत्व रखता है। वर्तमान 48 टीमों के प्रारूप में एशिया को 8.5 स्थान मिले हैं, लेकिन 64 टीमों के विस्तार से यह कोटा बढ़कर संभवतः 12 या अधिक हो सकता है, जिससे भारत जैसे देशों के लिए पहली बार क्वालीफाई करने की राह आसान होगी। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) ने 2030 विश्व कप के लिए क्वालीफाई करने का लक्ष्य रखा है और प्राकृतिककरण व युवा विकास कार्यक्रमों के जरिए टीम को मजबूत कर रहा है।
फीफा की आधिकारिक नीति के अनुसार, परिषद सदस्यों द्वारा रखे गए किसी भी विस्तार प्रस्ताव पर विचार करना अनिवार्य है, लेकिन अंतिम निर्णय फीफा काउंसिल करेगी। इन्फेंटिनो ने कहा कि 2026 विश्व कप के बाद ही इस पर औपचारिक चर्चा शुरू होगी, और यह मामला उनके 2027 के चुनाव अभियान से भी जुड़ा है। 2030 के मेज़बान देशों—विशेषकर स्पेन, पुर्तगाल और मोरक्को—ने योजना में बदलाव का विरोध किया है, क्योंकि उनकी तैयारियां अंतिम चरण में हैं। ऐसे में, विश्व कप के इतिहास का सबसे बड़ा विस्तार एक जटिल कूटनीतिक और लॉजिस्टिक चुनौती बनकर उभरा है।
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| अरब खाड़ी प्रेस | 0.00 | neutral |
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | +0.20 | neutral |
अरब दुनिया इन्फैंटिनो पर विस्तार का उपयोग करके रेफरी घोटालों को छिपाने का आरोप लगाती है।
प्रस्ताव को 2026 के रेफरी विवादों से जोड़कर, यह संकेत दिया जाता है कि फीफा का एक छिपा हुआ एजेंडा है, जिससे पहल अवैध हो जाती है।
यह उल्लेख नहीं करता कि विस्तार अस्थायी हो सकता है या नए ग्रुप प्रारूप पर तकनीकी विवरण।
खाड़ी देश विस्तार को पूरी तरह से तकनीकी मामला मानते हैं, किसी भी राजनीतिक या भावनात्मक मूल्यांकन से बचते हैं।
प्रस्ताव को गणितीय गणना और प्रारूप की समस्या तक सीमित करके, किसी भी संभावित आलोचना को बेअसर किया जाता है और निर्णय को अपरिहार्य के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
यह रेफरी विवादों, अरब दुनिया की भावनात्मक प्रतिक्रियाओं, या विस्तार की अस्थायी प्रकृति का उल्लेख नहीं करता।
ईरान प्रस्ताव को 2030 के मेजबान देशों के लिए एक राजनीतिक एहसान के रूप में उजागर करता है, विस्तार की अस्थायी प्रकृति पर प्रकाश डालता है।
विस्तार को एक अस्थायी अपवाद के रूप में प्रस्तुत करके और इसे मेजबान देशों के हितों से जोड़कर, यह संकेत दिया जाता है कि फीफा खेल योग्यता के बजाय राजनीतिक गणना के लिए कार्य करता है।
यह 2026 के रेफरी विवादों या अरब दुनिया की भावनात्मक प्रतिक्रियाओं का उल्लेख नहीं करता, पूरी तरह से भू-राजनीतिक पहलू पर ध्यान केंद्रित करता है।
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
न्यूयॉर्क के मेयर नेतन्याहू की गिरफ़्तारी पर विचार कर रहे हैं, क़ानूनी अड़चनें बरक़रार
4 भाषाएँ · 10 स्रोत
Economy & Markets सेअमेरिकी शुल्क युद्ध: ब्राज़ील पर 25% टैरिफ, लूला ने 'पारस्परिकता कानून' सक्रिय करने की चेतावनी दी
2 भाषाएँ · 14 स्रोत
Technology सेस्काईरूट के विक्रम-1 ने पहली ही कोशिश में रचा इतिहास, भारत बना निजी कक्षीय प्रक्षेपण वाला तीसरा देश
8 भाषाएँ · 24 स्रोत