
अंटार्कटिका की बर्फ के नीचे छिपी विशाल भूगर्भीय संरचना और जीवाश्म खोजों ने खोले नए रहस्य
पूर्वी अंटार्कटिका में एक पंखे के आकार की प्राचीन संरचना मिली है, जबकि दशकों पुरानी जीवाश्म हड्डी ने महाद्वीप पर डायनासोरों की उपस्थिति की पुष्टि की है।
अंटार्कटिका की बर्फ की चादर के नीचे वैज्ञानिकों ने एक विशाल, पंखे के आकार की भूगर्भीय संरचना की पहचान की है, जो पूर्वी अंटार्कटिका के कई अलग-अलग बेसिनों को एक ही महाद्वीप-स्तरीय प्रणाली में जोड़ती है। नेचर जियोसाइंस में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, यह संरचना करीब 18 करोड़ वर्ष पहले गोंडवाना महाद्वीप के टूटने के दौरान भूपर्पटी के खिंचाव से बनी थी। इसी क्षेत्र में एक अन्य शोध ने बताया कि करीब 3.4 करोड़ वर्ष पहले मेंटल तरंगों ने पूर्वी अंटार्कटिका में गैम्बुर्त्सेव पर्वत श्रृंखला को इतना ऊपर उठा दिया कि वैश्विक तापमान आज से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक होने के बावजूद वहाँ स्थायी बर्फ जम गई। यह प्रक्रिया बताती है कि उत्तरी ध्रुव से करीब 90 लाख वर्ष पहले दक्षिणी ध्रुव पर बर्फ की चादर क्यों बन गई थी।
इसी बर्फीले महाद्वीप से जुड़ा एक और खुलासा लंदन के प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय के एक दराज से हुआ। 1985 में ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वेक्षण द्वारा खोजी गई एक कशेरुका हड्डी को दशकों बाद टाइटानोसोर समूह के एक शाकाहारी डायनासोर के अवशेष के रूप में चिन्हित किया गया। यह अंटार्कटिका में पाया जाने वाला पहला डायनासोर जीवाश्म है, जो करीब 8.2 करोड़ वर्ष पुराना है। शोधकर्ताओं के अनुसार, उस समय महाद्वीप घने समशीतोष्ण वनों से ढका था और यह खोज दक्षिण अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया के बीच डायनासोरों के प्रवास मार्ग की पुष्टि करती है।
जलवायु परिवर्तन के चलते अंटार्कटिका की बर्फ में तेजी से बदलाव भी दर्ज किए गए हैं। दुनिया का सबसे बड़ा हिमखंड A23a, जो 1986 में फिल्चनर आइस शेल्फ से टूटा था और लगभग 3,900 वर्ग किलोमीटर में फैला था, हाल के सप्ताहों में पूरी तरह विघटित हो गया। यह तीन दशकों तक समुद्र तल की मिट्टी में फंसा रहा, 2020 में हिलना शुरू हुआ और फिर अटलांटिक महासागर में बहता हुआ टुकड़ों में बंट गया। उपग्रहों और ड्रोन से मिले आंकड़ों ने इसके पिघलने की प्रक्रिया को विस्तार से रिकॉर्ड किया, जिससे भविष्य में बर्फ की चादरों के व्यवहार को समझने में मदद मिलेगी।
डायनासोरों के जीवन को समझने की एक और कोशिश ताइवान में हुई, जहाँ वैज्ञानिकों ने ओविरैप्टर डायनासोर के एक आदमकद घोंसले और शरीर का मॉडल बनाकर ऊष्मा हस्तांतरण का अनुकरण किया। फ्रंटियर्स इन इकोलॉजी एंड इवोल्यूशन में प्रकाशित नतीजों से संकेत मिला कि ये डायनासोर आधुनिक पक्षियों की तरह केवल शारीरिक संपर्क से अंडे नहीं सेते थे, बल्कि सूर्य की गर्मी का भी इस्तेमाल करते थे। वहीं, कोलंबिया में मिले 4.5 करोड़ वर्ष पुराने टाइटानोबोआ सर्प के जीवाश्मों से पता चला कि 1.1 टन वजनी और 45 फुट लंबा यह सांप उष्णकटिबंधीय वर्षावनों का शीर्ष शिकारी था, जो उस काल के औसत तापमान को आज की तुलना में 10 डिग्री फारेनहाइट अधिक दर्शाता है।
इन खोजों के बीच, पुरातत्वविदों को रोमन साम्राज्य काल का एक अलग ही खजाना मिला—मिट्टी का एक घड़ा जिसमें दूसरी-तीसरी शताब्दी ईस्वी के कांस्य सिक्के भरे थे। विशेषज्ञ इसे संघर्ष या आर्थिक संकट के दौरान छिपाई गई बचत मान रहे हैं, जिसके अध्ययन से प्राचीन व्यापार मार्गों और मुद्रा प्रचलन पर रोशनी पड़ेगी। अगला कदम इन सिक्कों की सफाई व अभिलेखों का विश्लेषण है, जबकि अंटार्कटिका में बर्फ के नीचे की संरचनाओं और जीवाश्म स्थलों की खोज जारी रहेगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 5 भाषाएँ
New Antarctic discoveries are met with a mix of curiosity and caution: climate implications for South America are highlighted, but without alarmism. The focus remains on local consequences rather than global scientific value.
India sees Antarctica as a common good threatened by exploitation: the new discoveries reveal resources that could trigger a race, while climate change accelerates ice melt. The tone is critical of powers that ignore treaties.
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