
अली ख़ामेनेई के अंतिम संस्कार में मुजतबा की गैर-मौजूदगी ने ईरानी उत्तराधिकार पर उठाए सवाल
तेहरान में करोड़ों की भीड़ के बीच श्रद्धांजलि, लेकिन नए सर्वोच्च नेता के न दिखने से राजनीतिक अनिश्चितता गहराई।
ईरान की राजधानी तेहरान में रविवार को सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई के जनाज़े की नमाज़ पढ़ी गई, जिसमें तीन बेटे—मुस्तफ़ा, मिसम और मसऊद—शामिल हुए, लेकिन उनके उत्तराधिकारी और मौजूदा सर्वोच्च नेता मुजतबा ख़ामेनेई लगातार दूसरे दिन भी नदारद रहे। ईरानी सरकारी मीडिया ने इसे अमेरिकी-इज़रायली हमले में लगी चोटों से जोड़ा है, जबकि अरब मीडिया सूत्रों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से उन्हें जनाज़े में शामिल होने से रोका गया। लगभग 97 वर्षीय आयतुल्लाह जाफ़र सुबहानी की इमामत में हुई इस नमाज़ में राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेश्कियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ और क़ुद्स फ़ोर्स के कमांडर इस्माइल क़ानी सहित शीर्ष सैन्य-राजनीतिक नेतृत्व मौजूद रहा।
ईरानी अधिकारियों ने इस अंतिम संस्कार को “शहादत” और “राष्ट्रीय एकता” के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया। सरकारी एजेंसियों के अनुसार, तेहरान में 1.5 से 2 करोड़ लोगों के जुटने का अनुमान है, और मेट्रो ने एक ही रात में 70 लाख यात्राएं दर्ज कीं। अगले छह दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में जनाज़े को पहले क़ोम, फिर इराक के नजफ़ और करबला ले जाया जाएगा, अंत में 9 जुलाई को मशहद में इमाम रज़ा के मक़बरे के पास दफ़न किया जाएगा। विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी को “द्विपक्षीय संबंधों की अमर स्मृति” बताया; ईरानी विदेश मंत्रालय द्वारा जारी झंडों की सूची में सऊदी अरब, मिस्र, क़तर, पाकिस्तान और लेबनान शामिल हैं।
अमेरिकी टिप्पणीकारों ने इस आयोजन को एक कूटनीतिक अवसर की तरह देखा। राष्ट्रपति ट्रंप ने एक साक्षात्कार में कहा कि उन्हें ईरानियों का रोना देखकर हैरानी हुई, क्योंकि उन्हें लगता था कि लोग ख़ामेनेई से नफ़रत करते हैं; उन्होंने आँसुओं को “नकली” बताने की संभावना जताई। साथ ही ट्रंप ने दावा किया कि इस दौरान ईरान से बातचीत एक सप्ताह के लिए स्थगित है और कोई भी पक्ष गोलीबारी नहीं करेगा, लेकिन चेतावनी दी कि “एक गोली से हम सबको ख़त्म कर सकते हैं, लेकिन फिर बातचीत किससे करेंगे?” इस बयान को ईरानी मीडिया ने “धमकी” और “अहंकार” करार दिया, वहीं अरब विश्लेषकों के अनुसार यह अमेरिकी रणनीति का हिस्सा है – एक ओर सैन्य दबदबा, दूसरी ओर कूटनीति का दरवाज़ा खुला रखना।
पश्चिमी थिंक टैंकों के अनुसार, मुजतबा ख़ामेनेई की अनुपस्थिति ईरानी सत्ता के भीतर गहरी दरार का संकेत हो सकती है। मार्च 2026 की सैन्य हार और जनवरी-फरवरी के व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बाद यह जनाज़ा शासन के लिए “जनाधार परीक्षण” बन गया है। हालाँकि भीड़ का आकार प्रभावशाली है, लेकिन कुआलालंपुर स्थित एक थिंक टैंक के विशेषज्ञों का मानना है कि इसे पूरी तरह स्वैच्छिक नहीं माना जा सकता, क्योंकि सरकार ने भोजन, परिवहन और आवास जैसी सुविधाएँ मुहैया कराई हैं। अगले चरण में मशहद में होने वाली अंतिम रस्म के दौरान मुजतबा ख़ामेनेई के प्रकट होने या उनकी स्थिति पर आधिकारिक बयान की प्रतीक्षा है; इसके बाद ही अमेरिका-ईरान वार्ता के दूसरे चरण की दिशा तय होगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ
Huge crowds attend Khamenei's funeral in Tehran, but the absence of his successor Mojtaba raises questions about internal unity. The funeral proceeds with foreign delegations but the succession remains uncertain.
Millions of mourners perform the funeral prayer for the martyred leader Imam Khamenei in a majestic ceremony reflecting the nation's devotion. The massive turnout reaffirms the people's loyalty to the Islamic Revolution.
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