
ईरान ने रक्षा क्षमताओं को 'अबातचनीय' बताया, अमेरिका से अगले दौर की बातचीत टाली
तेहरान ने मिसाइल, ड्रोन और परमाणु कार्यक्रमों को राष्ट्रीय सुरक्षा की लाल रेखा घोषित करते हुए अमेरिकी प्रतिबद्धताओं के पालन तक समझौता वार्ता को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है।
ईरान के कार्यवाहक रक्षा मंत्री और संसद अध्यक्ष ने लगभग एक साथ स्पष्ट कर दिया है कि देश की रक्षा, मिसाइल, ड्रोन और परमाणु क्षमताएं किसी भी प्रकार की बातचीत का विषय नहीं होंगी। यह रुख तब सामने आया है जब अमेरिकी वित्त मंत्रालय द्वारा ईरानी कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल लेन-देन के लिए जारी अस्थायी सामान्य लाइसेंस एक्स की अवधि 21 अगस्त को समाप्त हो रही है। तेहरान का कहना है कि जब तक अमेरिका 14-सूत्रीय सहमति ज्ञापन के तहत लेबनान में युद्ध समाप्त करने और जमे हुए धन को जारी करने जैसी प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करता, तब तक वार्ता का अगला चरण शुरू नहीं होगा।
ईरानी अधिकारियों ने अपनी स्थिति को संस्थागत रूप से दोहराया है। कार्यवाहक रक्षा मंत्री ब्रिगेडियर जनरल मजीद इब्न अल-रेज़ा ने सोशल मीडिया पर लिखा कि रक्षा, मिसाइल और ड्रोन शक्ति राष्ट्रीय सुरक्षा की लाल रेखा है, जो 'न अभी और न भविष्य में बातचीत के योग्य है'। उन्होंने घरेलू क्षमताओं के आधार पर इनका विकास जारी रखने की बात कही। संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ़ ने टेलीविज़न साक्षात्कार में कहा कि परमाणु अधिकार और लाल रेखाएं अबातचनीय हैं, भले ही ईरान एनपीटी के तहत आईएईए की निगरानी में हो। उन्होंने 2015 के जेसीपीओए अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि सुरक्षा परिषद का अनुमोदन भी कार्यकारी गारंटी नहीं बनाता। ग़ालिबाफ़ ने यह भी स्पष्ट किया कि सहमति ज्ञापन के अनुच्छेद 1 के तहत अमेरिका ने लेबनान युद्ध समाप्त करने, लोगों की वापसी और राष्ट्रीय संप्रभुता की गारंटी दी थी, जिसका पालन अभी पूर्ण नहीं हुआ।
फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह गतिरोध एक व्यापक क्षेत्रीय विखंडन को दर्शाता है जहां हर देश की अपनी अलग समय-सारिणी है। ईरान के लिए 21 अगस्त तक का लेन-देन लाइसेंस एक कठोर समयसीमा है, जबकि शेष अमेरिकी प्रतिबंध यथावत हैं। सीरिया पर यूरोपीय संघ के व्यापक प्रतिबंध मई 2025 में ही हट चुके थे, लेकिन मानवाधिकार संगठनों के अनुसार पूर्व शासन से जुड़े नेटवर्क और संपत्ति विवाद अब भी जोखिम पैदा करते हैं। इराक में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान के तहत सांसदों और उप तेल मंत्री की गिरफ्तारियां युद्धविराम से असंबद्ध हैं। लेबनान का शांति ढांचा एक सशस्त्र समूह के हस्ताक्षर न करने के कारण अधूरा है, और खाड़ी देशों के कानूनी ढांचे में कोई बदलाव नहीं हुआ है, केवल खतरे का स्वरूप बदला है। भारत के लिए यह विखंडन और होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही का ईरानी आश्वासन ऊर्जा सुरक्षा और चाबहार बंदरगाह जैसी व्यापारिक परियोजनाओं को सीधे प्रभावित करता है।
ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों की एक संयुक्त समिति लेबनान संबंधी प्रावधानों के कार्यान्वयन की निगरानी कर रही है। ईरानी संसद अध्यक्ष के अनुसार, जब तक पांच प्रमुख खंड, विशेषकर लेबनान का मुद्दा, पूरी तरह से समेकित नहीं हो जाते, तब तक तेहरान समझौता ज्ञापन के अन्य खंडों पर अगले चरण में प्रवेश नहीं करेगा। अमेरिकी लाइसेंस के नवीनीकरण या प्रतिस्थापन को लेकर अभी कोई स्पष्ट संकेत नहीं है। क्षेत्रीय स्तर पर अलग-अलग घड़ियों के चलते रहने की संभावना है, और जोखिम उन क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित हो सकता है जिन पर अभी ध्यान नहीं दिया गया है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ईरान की रक्षा, मिसाइल और ड्रोन क्षमताएं राष्ट्रीय सुरक्षा की लाल रेखा हैं और इन पर कभी बातचीत नहीं होगी। ये क्षमताएं घरेलू संसाधनों पर आधारित हैं और इन्हें लगातार मजबूत किया जाएगा। तेहरान का रुख अडिग है और कोई समझौता स्वीकार नहीं करता।
ईरान के साथ युद्धविराम 21 अगस्त को समाप्त हो रहा है, लेकिन तेहरान तब तक शांति वार्ता को रोक रहा है जब तक उसे कतर के खाते में जमे 6 अरब डॉलर नहीं मिल जाते। यह गतिरोध केवल ईरान की समस्या है, क्षेत्रीय संकेत नहीं, और इससे पूरी प्रक्रिया पटरी से उतर सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय तेहरान की हठधर्मिता को बढ़ती चिंता से देख रहा है।
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