
नॉर्ड स्ट्रीम तोड़फोड़: जर्मनी ने यूक्रेनी अधिकारियों को सीधे जिम्मेदार ठहराया
जर्मन अभियोजकों के अनुसार, 2022 में गैस पाइपलाइनों को नष्ट करने का आदेश कीव सरकार ने दिया, जिससे बर्लिन-कीव संबंधों पर दबाव बढ़ सकता है।
जर्मनी की संघीय अभियोजन एजेंसी ने 2022 में बाल्टिक सागर में नॉर्ड स्ट्रीम गैस पाइपलाइनों को उड़ाए जाने के मामले में पहली बार सीधे तौर पर यूक्रेनी राज्य अधिकारियों को जिम्मेदार ठहराया है। अभियोजकों के अनुसार, यूक्रेनी नागरिक सेरही के. और अन्य सैन्यकर्मियों ने 'यूक्रेनी अधिकारियों के आदेश पर' पाइपलाइनों को नष्ट करने की योजना बनाई और उसे अंजाम दिया। यह आरोप हैम्बर्ग की हंसियाटिक उच्च क्षेत्रीय अदालत में दायर अभियोग पत्र का हिस्सा है, जिसमें सेरही के. पर युद्ध अपराध, विस्फोट कराने और सार्वजनिक सेवाओं को बाधित करने के आरोप लगाए गए हैं।
जर्मन अभियोजन पक्ष का कहना है कि इस हमले का उद्देश्य रूस से जर्मनी तक गैस की आपूर्ति को स्थायी रूप से रोकना और मॉस्को को युद्ध के वित्तपोषण से वंचित करना था। यूक्रेनी सरकार ने हमेशा राज्य की संलिप्तता से इनकार किया है, हालांकि कुछ अधिकारियों ने पाइपलाइनों के नष्ट होने पर संतोष व्यक्त किया था। राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा कि अभी टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी क्योंकि उन्हें आरोपों का आधिकारिक विवरण नहीं मिला है। दूसरी ओर, रूसी पक्ष ने इस घटनाक्रम का स्वागत करते हुए जर्मनी से यूक्रेन को सैन्य सहायता रोकने की मांग की है और जांच में 'मास्टरमाइंड' तक पहुंचने पर जोर दिया है। आरोपी के वकील ने युद्ध अपराध के आरोप को प्रत्यर्पण के बाद जोड़े जाने को 'भ्रामक' बताया है और तर्क दिया है कि सेरही के. को सैन्य प्रतिरक्षा प्राप्त है।
यह अभियोग जर्मनी के लिए कूटनीतिक रूप से संवेदनशील है, क्योंकि बर्लिन यूक्रेन का एक प्रमुख सैन्य और वित्तीय समर्थक बना हुआ है। जर्मन अभियोजकों ने न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक समर्थन के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखने की बात कही है, लेकिन विपक्षी दल 'अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (एएफडी) पहले ही सैन्य सहायता रोकने की मांग कर चुका है। यह मामला अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों को युद्ध अपराध मानने की बहस को भी तेज कर सकता है, जिसका वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।
सितंबर 2022 में हुए विस्फोटों ने नॉर्ड स्ट्रीम 1 और 2 की चार में से तीन पाइपलाइनों को नष्ट कर दिया था। उस समय नॉर्ड स्ट्रीम 2 चालू नहीं था, जबकि नॉर्ड स्ट्रीम 1 से युद्ध से पहले जर्मनी की वार्षिक गैस जरूरत का लगभग आधा हिस्सा पूरा होता था। जांच के दौरान कई सिद्धांत सामने आए—रूसी संलिप्तता से लेकर पश्चिमी साजिश तक—लेकिन जर्मन जांच ने धीरे-धीरे यूक्रेनी नागरिकों के एक समूह पर ध्यान केंद्रित किया, जिसने किराए की नौका 'एंड्रोमेडा' से विस्फोटक पहुंचाए थे। डेनमार्क और स्वीडन ने अपनी जांच बंद कर दी है, जिससे जर्मनी का यह मामला एकमात्र सक्रिय कानूनी प्रयास बन गया है।
अब हंसियाटिक उच्च क्षेत्रीय अदालत को तय करना है कि अभियोग स्वीकार कर मुकदमा शुरू किया जाए या नहीं। सेरही के. फिलहाल हैम्बर्ग में न्यायिक हिरासत में है। यह मामला न केवल जर्मनी-यूक्रेन संबंधों की परीक्षा लेगा, बल्कि यह भी स्पष्ट करेगा कि युद्ध के दौरान ऊर्जा अवसंरचना पर हमलों के लिए राज्य की जिम्मेदारी कैसे तय की जाती है। भारत जैसे ऊर्जा आयातक देशों के लिए यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विवादों में कानूनी मिसाल कायम कर सकता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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रूसी स्रोत लंबे समय से कहते रहे हैं कि नॉर्ड स्ट्रीम तोड़फोड़ के पीछे यूक्रेन का हाथ है। जर्मनी द्वारा एक यूक्रेनी नागरिक पर अभियोग इस संस्करण की पुष्टि करता है, जिससे मास्को की बात सही साबित होती है। कथित अपराधियों के नाम बताए गए हैं, जिनमें यूक्रेनी खुफिया विभाग का एक पूर्व अधिकारी और एक डाइविंग प्रशिक्षक शामिल हैं।
जर्मन अभियोजकों ने औपचारिक रूप से यूक्रेनी अधिकारियों पर नॉर्ड स्ट्रीम पाइपलाइनों को नष्ट करने का आदेश देने का आरोप लगाया है। अभियोग एक ऐसे व्यक्ति को निशाना बनाता है जिसने कथित तौर पर गोताखोरों की एक टीम का नेतृत्व किया। यह मामला कीव और उसके पश्चिमी सहयोगियों के बीच पहले से ही नाजुक संबंधों में तनाव की एक नई परत जोड़ता है।
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