
ट्रंप का चीन पर चुनावी डेटा चोरी का आरोप, खुफिया दस्तावेज सार्वजनिक
अमेरिकी राष्ट्रपति ने 2020 के चुनाव में चीन द्वारा 22 करोड़ मतदाताओं के रिकॉर्ड की चोरी का दावा करते हुए खुफिया रिपोर्टें जारी कीं, जिन्हें पूर्व आकलन और चीनी पक्ष ने सिरे से खारिज किया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस से राष्ट्र के नाम एक प्राइमटाइम संबोधन में चीन पर “चुनावी आंकड़ों की इतिहास की सबसे बड़ी चोरी” का आरोप लगाया। ट्रंप ने दावा किया कि 2020 के चुनावी चक्र के दौरान चीन ने अवैध रूप से 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं के नाम, पते, फोन नंबर और राजनीतिक पार्टी संबद्धता जैसी संवेदनशील जानकारी हासिल कर ली थी। उन्होंने इस मामले को “अभूतपूर्व चुनावी सुरक्षा दुःस्वप्न” बताते हुए आरोप लगाया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के भीतर “डीप स्टेट” के तत्वों ने इस हस्तक्षेप की जानकारी को जानबूझकर दबाया और न तो उन्हें और न ही कांग्रेस को इसकी सूचना दी गई।
इस संबोधन के साथ ही व्हाइट हाउस ने सैकड़ों पृष्ठों के अवर्गीकृत दस्तावेज जारी किए, जिनमें चुनावी बुनियादी ढांचे की कमजोरियों, मतदान मशीनों की संभावित हैकिंग और मिशिगन में कथित मतदाता पंजीकरण धोखाधड़ी का उल्लेख है। हालांकि, सीएनएन और अन्य मीडिया संस्थानों की प्रारंभिक समीक्षा के अनुसार, इनमें से अधिकांश जानकारी वर्षों पुरानी और पहले से ज्ञात कमजोरियों पर आधारित है, और कोई भी दस्तावेज इस दावे की पुष्टि नहीं करता कि 2020 के चुनाव परिणामों में किसी विदेशी शक्ति ने हेरफेर किया। स्वयं जारी एक सीआईए दस्तावेज में कहा गया है कि “मतगणना प्रणालियों में इतने बड़े पैमाने पर हेरफेर करना कठिन होगा कि चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकें।” ट्रंप ने इन दस्तावेजों के आधार पर कांग्रेस से ‘सेव अमेरिका एक्ट’ पारित करने की अपील की, जिसके तहत मतदान के लिए फोटो पहचान पत्र और नागरिकता प्रमाण अनिवार्य किया जाएगा तथा डाक मतदान पर सख्त पाबंदियां लगेंगी।
चीन ने इन आरोपों को तुरंत खारिज कर दिया। वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास के प्रवक्ता लियू चांग ने कहा, “चीन ने कभी भी अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों में हस्तक्षेप नहीं किया और न ही कभी करेगा।” बीजिंग का रुख रहा है कि अमेरिकी चुनाव उसका आंतरिक मामला है और वह गैर-हस्तक्षेप के सिद्धांत का पालन करता है। अमेरिकी खुफिया समुदाय के 2021 के एक अवर्गीकृत आकलन में भी “उच्च विश्वास” के साथ कहा गया था कि चीन ने 2020 के चुनाव के नतीजे को बदलने के लिए कोई प्रभाव अभियान नहीं चलाया, हालांकि उसने जनमत विश्लेषण के लिए मतदाता डेटा एकत्र किया था। इस आकलन के अनुसार, रूस और ईरान ने प्रभाव अभियान चलाए थे, लेकिन किसी भी विदेशी शक्ति ने मतदान के तकनीकी पहलुओं से छेड़छाड़ नहीं की।
ट्रंप का यह संबोधन नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से ठीक पहले आया है, जिसमें रिपब्लिकन पार्टी को अपना कांग्रेस बहुमत बचाने की चुनौती है। कई रिपब्लिकन सांसदों और रणनीतिकारों ने सार्वजनिक रूप से चिंता जताई है कि 2020 के चुनाव पर बार-बार ध्यान केंद्रित करने से मतदाताओं का ध्यान अर्थव्यवस्था और ईरान युद्ध जैसे मुद्दों से भटक सकता है। डेमोक्रेटिक नेताओं ने इस भाषण को “खारिज किए जा चुके झूठों को पुनर्जीवित करने का खतरनाक प्रयास” बताया और आरोप लगाया कि ट्रंप आगामी चुनावों की वैधता को पहले ही कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस बीच, एबीसी, एनबीसी और सीएनएन जैसे प्रमुख अमेरिकी टीवी नेटवर्कों ने इस भाषण का सीधा प्रसारण न करने का निर्णय लिया, जिस पर ट्रंप ने उन पर “साजिश का हिस्सा” होने का आरोप लगाया और उनके लाइसेंस रद्द करने की धमकी दी। ट्रंप ने एफबीआई, सीआईए और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक को इस मामले की जांच करने और जानकारी छिपाने के दोषियों के खिलाफ आपराधिक आरोप दायर करने का निर्देश दिया है। ‘सेव अमेरिका एक्ट’ फिलहाल सीनेट में अटका हुआ है, जहां इसे 60 वोटों का आंकड़ा पार करने के लिए डेमोक्रेटिक समर्थन की आवश्यकता है, और इसके निकट भविष्य में पारित होने की संभावना कम ही मानी जा रही है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.50 | critical |
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
China compromised 220 million election data, as denounced by President Trump.
The accusation is presented as news fact, without questioning its veracity, thus normalizing the idea that China actually breached the data.
It does not mention that Trump's accusations have been repeatedly debunked and that the declassified documents are partially redacted.
Trump's accusations against China lack concrete evidence and are part of a pattern of unfounded statements.
The repetition of the lack of evidence and the reference to the context of previous unfounded claims systematically discredit the accusation.
President Trump has accused China of stealing data of 220 million voters.
The accusation is reported neutrally, but the inclusion of the detail that voter lists are public introduces an implicit counterpoint that reduces its severity.
It does not contextualize the accusations within the geopolitical tensions between the US and China, nor does it mention official Chinese denials.
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
अमेरिकी शुल्क युद्ध: ब्राज़ील पर 25% टैरिफ, लूला ने 'पारस्परिकता कानून' सक्रिय करने की चेतावनी दी
2 भाषाएँ · 14 स्रोत
Technology सेस्पेसएक्स स्टारशिप का प्रक्षेपण अंतिम क्षण में रद्द, इंजन विफलता बनी वजह
8 भाषाएँ · 23 स्रोत
Science & Health सेअल्जाइमर की शुरुआती पहचान का रक्त परीक्षण, उम्र बढ़ने पर नियंत्रण के नए संकेत
6 भाषाएँ · 7 स्रोत