
इंग्लैंड के सामने कांगो की ऐतिहासिक चुनौती, अटलांटा में होगा नॉकआउट का पहला अध्याय
1966 की विश्व चैंपियन इंग्लैंड और पहली बार नॉकआउट में पहुंची डीआर कांगो के बीच मुकाबला, विजेता का सामना मेक्सिको से होगा।
अटलांटा के मर्सिडीज-बेंज स्टेडियम में बुधवार को जब इंग्लैंड और डीआर कांगो की टीमें विश्व कप 2026 के 16वें दौर में आमने-सामने होंगी, तो यह मुकाबला दो बिल्कुल अलग यात्राओं का संगम होगा। एक ओर 1966 की चैंपियन इंग्लैंड, जो ग्रुप एल में शीर्ष पर रही लेकिन जिसके प्रदर्शन ने प्रशंसकों को पूरी तरह आश्वस्त नहीं किया; दूसरी ओर डीआर कांगो, जो 1974 में ज़ैरे के नाम से खेलने के 52 साल बाद पहली बार नॉकआउट चरण में पहुंची है और जिसके लिए हर कदम इतिहास रचने जैसा है।
इंग्लैंड ने ग्रुप चरण की शुरुआत क्रोएशिया पर 4-2 की धमाकेदार जीत से की, लेकिन इसके बाद घाना से गोलरहित ड्रॉ और पनामा पर 2-0 की मेहनती जीत ने सवाल खड़े कर दिए। थॉमस टूशेल की टीम की असली ताकत हैरी केन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो तीन गोल के साथ विश्व कप में इंग्लैंड के सर्वकालिक शीर्ष स्कोरर (11 गोल) बन चुके हैं। यूरोपीय मीडिया मानता है कि टीम ने अभी तक अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखाई है, और जूड बेलिंगहम, बुकायो साका जैसे खिलाड़ियों से नॉकआउट में कहीं अधिक धार की उम्मीद है।
डीआर कांगो की कहानी किसी परीकथा से कम नहीं। ग्रुप के में पुर्तगाल के खिलाफ 1-1 की बराबरी, कोलंबिया से 1-0 की हार और उज़्बेकिस्तान पर 3-1 की वापसी जीत ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ तीसरे स्थान वाली टीम के रूप में अगले दौर में पहुंचा दिया। अफ्रीकी मीडिया इस बात पर जोर देता है कि टीम पर कोई दबाव नहीं है—वे पहले ही इतिहास रच चुके हैं। कोच सेबेस्टियन डेसाब्रे की रणनीति स्पष्ट है: कॉम्पैक्ट रक्षा और योआने विसा की रफ्तार पर निर्भर जवाबी हमले। विसा ने टीम के चार में से तीन गोल किए हैं, और आरोन वान-बिसाका, एक्सल तुआनज़ेबे जैसे प्रीमियर लीग अनुभवी खिलाड़ी इंग्लिश फुटबॉल को बखूबी समझते हैं।
सामरिक नज़रिए से यह मुकाबला इंग्लैंड के धैर्य की परीक्षा लेगा। अफ्रीकी टीमें परंपरागत रूप से गहरी रक्षा पंक्ति के साथ खेलती हैं, और कांगो ने पुर्तगाल व कोलंबिया जैसी मजबूत टीमों के खिलाफ एक से अधिक गोल नहीं खाए। इंग्लैंड को उम्मीद होगी कि इलियट एंडरसन और डेक्लान राइस की मिडफील्ड जोड़ी नियंत्रण बनाए रखेगी, जबकि केन की फिनिशिंग तंग मौकों पर काम आएगी। दूसरी ओर, कांगो की कोशिश होगी कि वे सेट-पीस या तेज़ काउंटर अटैक से इंग्लैंड की रक्षा को चौंका दें, जो घाना के खिलाफ गोल करने में नाकाम रही थी।
इस मुकाबले का विजेता क्वार्टर फाइनल में पहुंचने के लिए मेक्सिको से भिड़ेगा, जिसने इक्वाडोर को 2-0 से हराकर पहले ही अंतिम-16 में जगह पक्की कर ली है। इंग्लैंड के लिए यह अपनी दावेदारी को साबित करने का मौका है, जबकि कांगो के पास अफ्रीकी फुटबॉल का नया अध्याय लिखने का अवसर। अटलांटा की यह शाम निश्चित रूप से एक ऐतिहासिक टकराव की गवाह बनेगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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इंग्लैंड का सामना अटलांटा में पहले नॉकआउट दौर में कांगो की ऐतिहासिक चुनौती से होगा। अंग्रेज टीम, जो बिना चमक के आगे बढ़ी, को एक कमजोर लेकिन प्रेरित अफ्रीकी टीम के खिलाफ अपनी दावेदारी साबित करनी होगी। कांगो, जिसके कई खिलाड़ी प्रीमियर लीग में खेलते हैं, उलटफेर करने और अपने सपनों की यात्रा जारी रखने की कोशिश करेगा।
आज के राउंड ऑफ 32 में इंग्लैंड का मुकाबला डीआर कांगो से होगा, जिसमें इंग्लिश टीम स्पष्ट रूप से पसंदीदा है। कांगो की टीम, टूर्नामेंट की खोज, एक उपलब्धि का सपना देख रही है। यह मैच अटलांटा में खेला जाएगा, जबकि अन्य मुकाबलों में बेल्जियम-सेनेगल और यूएसए-बोस्निया शामिल हैं।
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