
वैंकूवर में विश्व कप का फैसलाकार मुकाबला: न्यूज़ीलैंड और मिस्र की ऐतिहासिक जंग
ग्रुप जी में दोनों टीमों के बीच पहली हार से बचने के साथ-साथ नॉकआउट की उम्मीदों को ज़िंदा रखने की होड़, पहली बार विश्व कप जीत की तलाश में मैदान पर उतरी न्यूज़ीलैंड और मिस्र।
रविवार की शाम कनाडा के बीसी प्लेस स्टेडियम की हल्की ठंडी हवा में फुटबॉल इतिहास का एक नया पन्ना लिखा जाना तय था। न्यूज़ीलैंड और मिस्र, दो ऐसी टीमें जो आज तक विश्व कप में एक भी मैच नहीं जीत पाई थीं, एक-दूसरे के सामने ऐसे खड़ी थीं मानो यह मुकाबला सिर्फ तीन अंकों का नहीं, बल्कि अपने-अपने राष्ट्रीय स्वप्न को साकार करने का हो। पहले हाफ के शुरुआती मिनटों में ही दोनों तरफ से तेज़ हमले हुए, लेकिन गोलकीपरों की चौकसी और बचाव पंक्ति की मज़बूती ने स्कोर को शून्य पर बरकरार रखा।
ग्रुप जी के इस दूसरे दौर के मैच से पहले तालिका में चारों टीमों—न्यूज़ीलैंड, मिस्र, बेल्जियम और ईरान—के एक-एक अंक थे। कीवी टीम ने पहले मैच में ईरान को 2-2 से रोमांचक ड्रॉ पर रोका था, जहां एलिजा जस्ट ने अपनी तेज़ी और क्रिस वुड ने अपनी कद्दावर मौजूदगी से धमाल मचाया था। दूसरी ओर, मिस्र ने दिग्गज बेल्जियम के खिलाफ 1-1 की बराबरी करते हुए दिखा दिया था कि मोहम्मद सलाह और ओमर मार्मौश की अगुवाई वाली यह टीम सिर्फ़ बचाव पर नहीं, बल्कि हमले पर भी उतनी ही धारदार है। अफ्रीकी चैंपियन मिस्र के लिए एमाम आशौर का अंतरराष्ट्रीय गोल इस आत्मविश्वास को और बढ़ाने वाला था।
पूर्वी एशियाई और प्रशांत द्वीपीय मीडिया ने न्यूज़ीलैंड की रणनीति पर फोकस किया: प्रशिक्षक डैरेन बेज़ली का 4-2-3-1 का सेटअप, जिसमें जो बेल और मार्को स्टामेनिच डबल पिवट की भूमिका में थे, तथा सरप्रीत सिंह और एलिजा जस्ट को विंग से क्रिएटिविटी का जिम्मा दिया गया था। अरब और उत्तरी अफ्रीकी सूत्रों ने बताया कि मिस्र के कोच होसाम हसन ने अनुभवी गोलकीपर मोहम्मद शोबीर पर भरोसा जताया और बचाव में यासेर इब्राहिम व हम्दी फतही को रक्षात्मक मज़बूती का केंद्र बनाया। दोनों टीमें पहली विश्व कप जीत की ऐतिहासिक संभावना को भुनाने के लिए पूरी तरह से लामबंद दिखीं।
ब्राज़ील और अर्जेंटीना के खेल पंडितों ने इस मुकाबले को ‘ग्रुप ऑफ ऑपर्चुनिटी’ का सबसे निर्णायक क्षण करार दिया, क्योंकि बेल्जियम और ईरान के लगातार दूसरे ड्रॉ के बाद जीत हासिल करने वाली कोई भी टीम सीधे अंतिम-16 की दावेदारी पेश कर सकती थी। मैच का प्रसारण ग्लोबो, स्पोर्ट टीवी और कैज़े टीवी के अलावा विभिन्न एशियाई प्लेटफॉर्मों पर हुआ, जिससे प्रशांत क्षेत्र से लेकर दिल्ली तक करोड़ों प्रशंसकों की निगाहें वैंकूवर की पिच पर टिक गईं।
दूसरे हाफ में दाँव परिणाम के बजाय साहस पर लगा था। न्यूज़ीलैंड ने सेट-पीस के मौकों पर क्रिस वुड की लंबाई का पूरा इस्तेमाल किया, जबकि मिस्र ने मार्मौश की गति और सलाह की दूरदर्शिता से तीखे पलटवार किए। अंतिम सीटी तक दोनों टीमें कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती थीं—क्योंकि परिणाम चाहे जो भी हो, यह मुकाबला दो महाद्वीपों के उभरते फुटबॉल सपनों के बीच का सेतु बन गया।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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मिस्र और न्यूज़ीलैंड ने एक तनावपूर्ण मैच खेला जिसमें दोनों टीमें विश्व कप में अपनी पहली जीत हासिल करने में असफल रहीं। एक आत्मघाती गोल ने मिस्र की बढ़त को खत्म कर दिया, जबकि न्यूज़ीलैंड के शुरुआती दो हमलों का दो बार जवाब दिया गया, जिससे ऑल व्हाइट्स अभी भी विश्व कप इतिहास में जीतहीन बने रहे।
ग्रुप जी के इस निर्णायक मुकाबले में न्यूज़ीलैंड और मिस्र दोनों की निगाहें पहली ऐतिहासिक विश्व कप जीत पर हैं ताकि वे नॉकआउट चरण में जगह बना सकें। प्रसारण विवरण, टीमों की लाइन-अप और लाइव कमेंट्री का ज़ोरदार प्रचार किया जा रहा है, जिसमें स्टार फॉरवर्ड एलिजा जस्ट को ऑल व्हाइट्स की मुख्य उम्मीद के रूप में उजागर किया गया है।
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