
स्विस बैंकिंग में नियामकीय खींचतान: यूबीएस ने केंद्रीय बैंक की रिपोर्ट को 'भ्रामक' बताया, जूलियस बेयर संकट से उबरने की ओर
स्विस नेशनल बैंक का कहना है कि यूबीएस के पास प्रस्तावित पूंजी सुधारों को पूरा करने के लिए पर्याप्त पूंजी है, जबकि बैंक ने इस दावे को खारिज करते हुए प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान की चेतावनी दी है।
स्विस नेशनल बैंक (एसएनबी) ने अपनी वार्षिक वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में कहा कि यूबीएस के पास पहले से ही इतनी पूंजी मौजूद है कि वह सरकार द्वारा प्रस्तावित सख्त पूंजी आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, यूबीएस की पात्र सीईटी1 पूंजी 2030 से पूर्णतः लागू होने वाले मौजूदा नियमों के तहत आवश्यकताओं से 13 अरब डॉलर अधिक है, और 2025 के अंत में उसके पास 9 अरब डॉलर का अतिरिक्त रिज़र्व था। एसएनबी के उपाध्यक्ष ने सरकारी प्रस्ताव को 'आनुपातिक कदम' बताया। इसके तुरंत बाद यूबीएस ने एक बयान जारी कर रिपोर्ट को 'भ्रामक' करार दिया और तर्क दिया कि प्रस्तावित उपायों का संचयी प्रभाव लगभग 20 अरब डॉलर की अतिरिक्त सीईटी1 पूंजी की मांग करेगा, जिससे बैंक को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान होगा।
इस बीच, एक अन्य स्विस बैंक जूलियस बेयर ऑस्ट्रियाई रियल एस्टेट कारोबारी रेने बेंको से जुड़े 70 करोड़ डॉलर के घाटे के बाद अपने परिचालन को सामान्य बनाने की ओर बढ़ रहा है। सूत्रों के अनुसार, बैंक जल्द ही उच्च जोखिम वाले ग्राहकों—राजनीतिक रूप से प्रभावशाली व्यक्तियों (पीईपी)—को स्वीकार करने पर लगी रोक हटाने की तैयारी कर रहा है। स्विस नियामक फिनमा की जांच, जो जोखिम नियंत्रण में विफलताओं के कारण शुरू हुई थी, व्यावहारिक रूप से अंतिम चरण में है और औपचारिक समापन 2025 की दूसरी छमाही में होने की उम्मीद है, जिससे बैंक शेयर पुनर्खरीद फिर से शुरू कर सकेगा। इस खबर पर जूलियस बेयर के शेयर 2.86% चढ़ गए।
यह नियामकीय जोर 2023 में क्रेडिट सुइस के पतन और यूबीएस द्वारा उसके अधिग्रहण से उपजा है, जिसने स्विट्ज़रलैंड की जीडीपी से डेढ़ गुना बड़ी बैलेंस शीट वाला एक वित्तीय दिग्गज खड़ा कर दिया। सरकार चाहती है कि यूबीएस अपनी विदेशी इकाइयों के लिए 100% पूंजी कवरेज रखे, जो मौजूदा 60% से अधिक है। एसएनबी, फिनमा और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष इस दृष्टिकोण का समर्थन करते हैं। हालांकि, यूबीएस का कहना है कि इससे उसका बिज़नेस मॉडल प्रभावित होगा और स्विस अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। संसद में इस प्रस्ताव पर बहस चल रही है, और संकेत हैं कि सांसद सरकारी प्रस्तावों के दायरे को कम कर सकते हैं, हालांकि पूंजी आवश्यकताओं को मौजूदा स्तर से ऊपर उठाने पर व्यापक सहमति है।
एसएनबी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि स्विस बैंकिंग क्षेत्र समग्र रूप से मज़बूत बना हुआ है और अधिकांश बैंक प्रतिकूल परिदृश्यों में भी घाटा सहने में सक्षम हैं, हालांकि ब्याज दरों में गिरावट ने घरेलू बाज़ार पर केंद्रित बैंकों की लाभप्रदता पर हल्का दबाव डाला है। अब सबकी निगाहें अगस्त में होने वाली संसदीय समिति की बैठक पर हैं, जहाँ यूबीएस के लिए प्रस्तावित पूंजी नियमों में ढील का औपचारिक प्रस्ताव आ सकता है। अंतिम नियमों पर निर्णय अगले वर्ष तक आने की संभावना है।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | +0.10 | neutral |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.20 | neutral |
Swiss banks handle their disputes pragmatically; the market watches without drama.
A technical-financial register normalizes the scandal as an adjustment phase, reducing tension to balance-sheet variables.
No mention of the geopolitical context of sanctions or international pressure on the Swiss financial center.
Swiss banks still need to prove they have overcome structural weaknesses; regulation remains a credible obstacle.
A hierarchy of risks is built: the past scandal is only a symptom of deeper governance problems, while the capital dispute is presented as a credibility test for the entire Swiss banking system.
No space is given to optimistic statements by bank executives or short-term positive data, such as Julius Baer's profit increase.
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