
अमेरिका ने यूरोप में सैन्य उपस्थिति की समीक्षा की घोषणा की, नाटो सहयोगियों पर कड़ा प्रहार
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने ब्रसेल्स में नाटो की बैठक में छह महीने की समीक्षा की घोषणा करते हुए यूरोपीय सहयोगियों को 'मुफ्तखोर' करार दिया और ईरान युद्ध में सहयोग न देने पर शर्मनाक बताया।
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने ब्रसेल्स में नाटो रक्षा मंत्रियों की बैठक में एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए यूरोप में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति की छह महीने की व्यापक समीक्षा का ऐलान किया। यह समीक्षा इस बात पर निर्भर करेगी कि यूरोपीय सहयोगी कितनी तेजी से अपनी रक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी संभालते हैं। हेगसेथ ने 'नाटो 3.0' की अवधारणा प्रस्तुत की, जो शीत युद्ध के बाद की मान्यता है कि गठबंधन को फिर से एक सख्त सैन्य संगठन बनना होगा, जिसके पास महाद्वीप पर खतरों को रोकने और यूरोप की पारंपरिक रक्षा का नेतृत्व करने की वास्तविक क्षमता हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह समीक्षा महज कागजी नहीं होगी—कुछ देश इसमें विफल होंगे और कुछ उत्कृष्टता से उत्तीर्ण होंगे।
हेगसेथ ने यूरोपीय सहयोगियों पर तीखा प्रहार करते हुए उन्हें 'मुफ्तखोर' (फ्री राइडिंग) करार दिया और ईरान के विरुद्ध सैन्य अभियान के दौरान अमेरिकी बलों को यूरोपीय ठिकानों तक पहुंच, बेसिंग और हवाई उड़ान की अनुमति न देने को 'शर्मनाक' बताया। उन्होंने कहा कि इन सहयोगियों ने अमेरिकी सैनिकों को जोखिम में डाला, जबकि ऐसी बुनियादी सहायता पर कभी सवाल नहीं उठना चाहिए था। साथ ही उन्होंने नाटो के पिछले दशकों की आलोचना की, जिसमें लैंगिक समानता, जलवायु परिवर्तन और मितव्ययिता पर अधिक ध्यान दिया गया, जबकि रक्षा बजट में भारी कटौती हुई और यूरोप की सीमाएं खुली रहीं। अमेरिका ने पहले ही जर्मनी से 5,000 सैनिकों की वापसी की थी और अब नाटो की त्वरित प्रतिक्रिया बलों में अपनी भूमिका घटाने की पुष्टि की है।
यूरोपीय प्रतिक्रियाएं मिली-जुली रहीं। इटली के रक्षा मंत्री गुइदो क्रोसेतो ने कहा कि नाटो कोई पाठक मित्र क्लब नहीं है—यदि प्रतिबद्धताएं पूरी नहीं होतीं तो 'बाहर रहना' होगा। जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने अमेरिकी कदमों से उत्पन्न 'खतरनाक' कमियों की चेतावनी दी और समन्वित योजना की मांग की। ब्रिटेन अपनी दीर्घकालिक रक्षा निवेश योजना के बिना ही शिखर बैठक में शामिल हुआ। नाटो महासचिव मार्क रूटे ने स्वीकार किया कि गठबंधन अपने इतिहास के सबसे बड़े रूपांतरण से गुजर रहा है, और बताया कि यूरोपीय देशों और कनाडा ने 2025 में रक्षा खर्च में 139 अरब डॉलर की वृद्धि की, लेकिन अभी 'विशाल प्रयास' शेष हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि अमेरिकी समीक्षा एक संरचित प्रक्रिया होगी, जिसमें कांग्रेस और सहयोगियों से परामर्श शामिल रहेगा।
वैश्विक परिप्रेक्ष्य में, रूस ने इस घटनाक्रम को नाटो के मूल चरित्र की पुष्टि के रूप में देखा—एक सांसद ने कहा कि नाटो हमेशा से सोवियत संघ और फिर रूस के विरुद्ध रहा है, और इस रूपांतरण से यूरोपीय अर्थव्यवस्थाएं कमजोर होंगी। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ और रूस के बीच राजनयिक संवाद फिर शुरू होने की खबरों पर नाटो निगरानी बनाए हुए है। भारत और दक्षिण एशिया के लिए यह बदलाव महत्वपूर्ण है: अमेरिका का यूरोप से ध्यान हटने से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में उसकी सैन्य उपस्थिति और बढ़ सकती है, लेकिन साथ ही एक आत्मनिर्भर यूरोपीय रक्षा उद्योग नए हथियार बाजार और प्रौद्योगिकी साझेदारी के अवसर पैदा कर सकता है, जिसमें भारत की रणनीतिक स्वायत्तता की नीति के तहत संतुलन बनाने की चुनौती होगी।
आगे की राह अनिश्चित है। यह समीक्षा केवल सैन्य तैनाती का आकलन नहीं है, बल्कि ट्रांसअटलांटिक संबंधों की बुनियाद को हिला सकती है। यदि यूरोपीय देश तेजी से रक्षा खर्च बढ़ाकर और सैन्य क्षमताएं विकसित करके 'नाटो 3.0' की कसौटी पर खरे उतरते हैं, तो गठबंधन एक सख्त और संतुलित सुरक्षा ढांचे में बदल सकता है। लेकिन यदि राजनीतिक अनिच्छा और आर्थिक बाधाएं हावी रहीं, तो अमेरिकी मोहभंग गहरा सकता है और सामूहिक सुरक्षा की अवधारणा कमजोर पड़ सकती है। दुनिया एक ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है जहां सैन्य गठबंधन लेन-देन के आधार पर पुनर्परिभाषित हो रहे हैं, और इसका प्रभाव यूरोप से लेकर हिंद-प्रशांत तक हर क्षेत्र पर पड़ेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिकी रक्षा सचिव ने यूरोपीय नाटो सदस्यों की रक्षा खर्च लक्ष्यों को पूरा न करने के लिए तीखी आलोचना की और यूरोप में अमेरिकी सेनाओं की छह महीने की समीक्षा की घोषणा की। इस समीक्षा का उद्देश्य 'नाटो 3.0' नामक महाद्वीपीय रक्षा में यूरोपीय नेतृत्व की ओर बदलाव को तेज करना है। संदेश यह है कि वाशिंगटन पारस्परिक प्रतिबद्धता के बिना यूरोप की सुरक्षा का प्राथमिक बोझ नहीं उठाएगा।
अमेरिकी रक्षा सचिव, जिन्हें 'युद्ध मंत्री' कहा गया, ने मांग की कि यूरोप अपनी रक्षा की जिम्मेदारी स्वयं ले और अमेरिकी सैन्य तैनाती की समीक्षा की घोषणा की। 'नाटो 3.0' अवधारणा को एक अल्टीमेटम के रूप में देखा जा रहा है जो यूरोपीय देशों को तेजी से अपनी सैन्य क्षमताओं का निर्माण करने के लिए मजबूर कर रहा है। आशंका है कि इससे अमेरिकी सुरक्षा गारंटी कमजोर हो सकती है और महाद्वीप के लिए नए जोखिम पैदा हो सकते हैं।
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