
जिनेवा के पास अमेरिका-ईरान शांति वार्ता, होर्मुज और लेबनान मुद्दों पर स्थगन के बाद बैठक
एक हफ्ते पहले हुए समझौता ज्ञापन के तहत अमेरिकी उपराष्ट्रपति और ईरानी वार्ताकार स्विट्जरलैंड में बातचीत के लिए पहुंचे, पाकिस्तान और कतर मध्यस्थता कर रहे हैं।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और ईरानी वार्ता दल के प्रमुख मोहम्मद बाकर कलीबाफ रविवार को स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में आमने-सामने हुए। इस बैठक का उद्देश्य पिछले बुधवार को हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) के तहत मध्य पूर्व युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए बातचीत का ढांचा तैयार करना है। पाकिस्तान और कतर के मध्यस्थों की मौजूदगी में शुरू हुई यह वार्ता शुक्रवार को स्थगित होने के बाद हो रही है। स्थगन का कारण दक्षिण लेबनान में इज़राइली हमलों के बाद ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से बंद करने की घोषणा थी, हालांकि अमेरिकी सेना ने वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन जारी रहने की बात कही।\n\nईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई के अनुसार, तेहरान के लिए प्राथमिक मुद्दा लेबनान में युद्धविराम का कार्यान्वयन है, जिसे एमओयू का पहला बिंदु बताया गया है। ईरानी पक्ष का कहना है कि जब तक सभी मोर्चों पर लड़ाई बंद नहीं होती, तब तक वे अंतिम समझौते की बातचीत में शामिल नहीं होंगे। दूसरी ओर, वेंस ने प्रस्थान से पहले कहा कि वार्ता में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और लेबनान में युद्धविराम पर प्रगति की उम्मीद है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेनाध्यक्ष आसिम मुनीर के भी स्विट्जरलैंड पहुंचने के बाद, इस्लामाबाद ने 'तकनीकी स्तर की वार्ता' जारी रहने की पुष्टि की।\n\nहोर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों पक्षों के बयानों में विरोधाभास ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। ईरानी संयुक्त सैन्य कमान ने इसे 'अमेरिकी प्रतिबद्धता के स्पष्ट उल्लंघन' का परिणाम बताते हुए बंद करने की बात कही, जबकि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने शनिवार को 55 वाणिज्यिक जहाजों के आवागमन का दावा किया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि 60 दिनों के भीतर कोई समझौता नहीं होता, तो वे जलडमरूमध्य पर अमेरिकी शुल्क लगा सकते हैं। ईरानी सूत्रों ने स्पष्ट किया कि जलडमरूमध्य तब तक बंद रहेगा जब तक लेबनान में युद्धविराम का सम्मान नहीं होता और ईरानी तेल बिक्री के लिए आवश्यक छूट जारी नहीं होती।\n\n17 जून को डिजिटल माध्यम से हस्ताक्षरित एमओयू 60 दिनों की अवधि प्रदान करता है, जिसमें ईरानी परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने, प्रतिबंधों में ढील, और अरबों डॉलर की ईरानी संपत्तियों को मुक्त करने पर अंतिम समझौता किया जाना है। पाकिस्तान और कतर मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि स्विट्जरलैंड मेजबान है। इस संकट का दक्षिण एशिया पर सीधा प्रभाव है, क्योंकि भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा होर्मुज के रास्ते आयात करता है और पाकिस्तान की मध्यस्थता क्षेत्रीय कूटनीति में उसकी बदलती भूमिका को दर्शाती है।\n\nकतर के विदेश मंत्रालय के अनुसार, अंतिम समझौते के लिए विशेष तकनीकी समूह बनाए गए हैं और एमओयू के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए अनुवर्ती समूह भी गठित किए गए हैं। वार्ता का पहला दिन मुख्य रूप से लेबनान मुद्दे और ईरानी संपत्तियों पर केंद्रित रहा। यह स्पष्ट नहीं है कि अगली बैठक कब होगी, लेकिन तकनीकी समूहों का काम जारी रहने की उम्मीद है। ईरान ने एक दिन की इस बैठक को अपनी प्रतिबद्धताओं की पूर्ति की मांग का माध्यम बताया है, जबकि अमेरिकी पक्ष ने इसे वार्ता प्रक्रिया की सकारात्मक शुरुआत करार दिया है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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Iranian media frame Vance's trip as a diplomatic win for Tehran, emphasizing that talks are progressing well and Iran is in control. They highlight the presence of top Iranian officials and confidence in maintaining the Lebanon ceasefire. The tone is pragmatic, with guarded optimism about US intentions.
Atlantic press in Persian reports Vance's departure to Zurich in a measured tone, focusing on hopes for progress on nuclear and Lebanon issues. It notes that talks are technical and that special envoy Witkoff is already on the ground. The approach is detached and factual, without emotional emphasis.