
अमेरिका से जापान तक, डेटा सेंटरों के विरोध में सड़कों पर उतरे लोग
कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विस्तार के लिए बन रहे विशाल डेटा केंद्रों ने स्थानीय संसाधनों और पर्यावरण को लेकर वैश्विक स्तर पर जन आक्रोश पैदा कर दिया है।
न्यू जर्सी के छोटे से शहर केनिलवर्थ में शनिवार सुबह नगर न्यायालय के बाहर जमा भीड़ अपने साथ प्लास्टिक के भोंपू, सीटियाँ और रंगीन चॉक लेकर आई थी। बारिश तेज़ होने पर लोगों ने पोंचो ओढ़ लिए और छाते साझा कर लिए, लेकिन नारेबाज़ी नहीं रुकी। एक तख्ती पर लिखा था, “आपको लगता है यह दबाव है? पानी का दबाव खत्म होने तक इंतज़ार करो,” तो दूसरी पर, “समुदाय बनाओ, डेटा सेंटर नहीं।” यह दृश्य अमेरिका के 42 राज्यों में एक साथ आयोजित 142 प्रदर्शनों की एक कड़ी था, जो ‘ह्यूमन्स फर्स्ट’ नामक संगठन की पहली राष्ट्रव्यापी कार्रवाई थी।
यह आंदोलन कोई अचानक उपजा गुस्सा नहीं है। कनाडा के अलबर्टा प्रांत के ओल्ड्स कस्बे से लेकर जापान के हीनो शहर तक, नागरिक इन विशालकाय ढाँचों के खिलाफ आवाज़ उठा रहे हैं। 94 वर्षीय योरिको कितागावा, जो हीनो में जीवन भर रही हैं, इस परियोजना को “भयानक” बताती हैं। कनाडा में एक सर्वेक्षण के अनुसार 81 प्रतिशत लोगों को डर है कि डेटा सेंटरों से उनके बिजली बिल बढ़ जाएँगे, और 79 प्रतिशत पर्यावरणीय नुकसान को लेकर चिंतित हैं। टोक्यो के उपनगर हीनो में बन रहे केंद्र की ऊँचाई घटाकर 63.5 मीटर कर दी गई, फिर भी स्थानीय निवासी यासुओ यामाजाकी को बैटरियों से आग लगने, शोर और ईंधन टैंक के विस्फोट का भय सता रहा है।
ये चिंताएँ तब और गहरा जाती हैं जब दूसरी ओर अरबों डॉलर की दौलत बनती दिखाई देती है। पैलांटिर के मुख्य कार्यकारी एलेक्स कार्प, जिनकी निजी संपत्ति अनुमानित 15 अरब डॉलर है, ने स्वयं चेतावनी दी कि एआई उनकी दौलत को 20 गुना तक बढ़ा सकता है, जबकि मध्य वर्ग की आय अगले दशक में मुश्किल से दोगुनी होगी। ऑक्सफैम के आँकड़े बताते हैं कि 2025 में वैश्विक अरबपतियों की संपत्ति 16 प्रतिशत से अधिक उछलकर रिकॉर्ड 18.3 ट्रिलियन डॉलर पहुँच गई। ब्लैकरॉक के सीईओ लैरी फिंक ने दावोस में कहा कि यह संपत्ति इतने संकीर्ण वर्ग में केंद्रित हो रही है जितनी कोई स्वस्थ समाज लंबे समय तक सहन नहीं कर सकता।
उद्योग जगत इसे अपरिहार्य विस्तार के रूप में प्रस्तुत करता है। मॉर्गन स्टेनली के अनुमान के अनुसार एक गीगावॉट एआई क्षमता बनाने की लागत लगभग 20 प्रतिशत बढ़ गई है, जिससे गूगल, अमेज़न और मेटा जैसी कंपनियाँ अपने पूँजीगत व्यय के पूर्वानुमान लगातार बढ़ा रही हैं। एक विश्लेषक का कहना है कि इस वृद्धि का 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा केवल मुद्रास्फीति को कवर करता है, वास्तविक विस्तार नहीं। इस बीच, रूसी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया ज़ाखारोवा ने पैलांटिर को “आधुनिक दुनिया के लिए सबसे बड़े खतरों में से एक” बताया, और अमेरिकी प्रशासन ‘गोल्ड ईगल’ कार्यक्रम के ज़रिए निजी कंपनियों की उन्नत एआई मॉडलों तक पहुँच को नियंत्रित करने की योजना बना रहा है।
केनिलवर्थ की बारिश में भीगते प्रदर्शनकारी अपने हाथों में तख्तियाँ लिए खड़े रहे, जिन पर लिखा था—“पानी का दबाव खत्म होने तक इंतज़ार मत करो।” यह एक ऐसी दुनिया की तस्वीर है जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता के ठोस, कंक्रीट और स्टील से बने अवतार अब पड़ोस के नागरिकों की नींद उड़ा रहे हैं।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.70 | critical |
The AI industry downplays environmental fears by comparing data centers to golf courses, while Canadian citizens mobilize against the impact on bills and the environment.
The golf analogy normalizes water consumption by shifting the debate to a seemingly harmless benchmark.
It omits the global scale of protests and direct testimonies from affected residents, such as those in Japan.
The Hino community strongly opposes the data center, calling it a horrible project that threatens their neighborhood.
The use of an elderly resident's testimony creates an emotional bond and makes the harm tangible.
It does not mention the industry's position or regulatory initiatives in the United States.
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