
गूगल के एंड्रॉयड अलर्ट सिस्टम ने वेनेजुएला में भूकंप से पहले कैसे दी चेतावनी
वेनेजुएला में आए दो शक्तिशाली भूकंपों से ठीक पहले एंड्रॉयड फोन पर मिली अलर्ट ने लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने का कीमती समय दिया।
24 जून को वेनेजुएला के उत्तरी हिस्से में 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंपों ने भारी तबाही मचाई, जिसमें दर्जनों लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए। लेकिन इस आपदा के दौरान एक तकनीकी पहलू ने ध्यान खींचा: लाखों एंड्रॉयड उपयोगकर्ताओं को भूकंप के तेज़ झटके महसूस होने से कुछ सेकंड पहले उनके फोन पर अलर्ट मिला। इस चेतावनी ने कई लोगों को इमारतों से बाहर निकलने या खिड़कियों से दूर हटने का अवसर दिया, जिससे संभावित नुकसान को कम करने में मदद मिली।
यह अलर्ट गूगल के 'एंड्रॉयड अर्थक्वेक अलर्ट्स सिस्टम' का हिस्सा है, जो 2021 से सक्रिय है। यह प्रणाली भूकंप की भविष्यवाणी नहीं करती, बल्कि भूकंप शुरू होने के तुरंत बाद उत्पन्न होने वाली प्राथमिक तरंगों (P-तरंगों) का पता लगाती है। ये तरंगें तेज़ चलती हैं और कम नुकसानदेह होती हैं, जबकि बाद में आने वाली द्वितीयक तरंगें (S-तरंगें) अधिक विनाशकारी होती हैं। एंड्रॉयड फोन में मौजूद एक्सेलेरोमीटर सेंसर, जो आमतौर पर स्क्रीन रोटेशन के लिए इस्तेमाल होता है, ज़मीन के कंपन को भांप लेता है। जब एक ही इलाके के कई फोन एक साथ समान कंपन दर्ज करते हैं, तो गूगल के सर्वर तुरंत विश्लेषण कर भूकंप की स्थिति और तीव्रता का अनुमान लगाकर प्रभावित क्षेत्रों में अलर्ट भेज देते हैं। यह पूरी प्रक्रिया इंटरनेट की गति के कारण भूकंपीय तरंगों से तेज़ होती है, जिससे दूर बैठे लोगों को कुछ सेकंड का महत्वपूर्ण समय मिल जाता है।
वेनेजुएला में इस प्रणाली का व्यापक असर देखने को मिला। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने बताया कि अलर्ट मिलने के 3 से 10 सेकंड के भीतर ही तेज़ झटके शुरू हो गए। यह प्रणाली दो तरह की चेतावनियाँ भेजती है: हल्के झटकों के लिए सूचनात्मक नोटिफिकेशन और तेज़ भूकंप की आशंका पर फुल-स्क्रीन आपात अलर्ट, जो 'डू नॉट डिस्टर्ब' मोड को भी बाधित कर सकता है। गूगल के अनुसार, दुनिया भर में करोड़ों एंड्रॉयड फोन एक विशाल वितरित सेंसर नेटवर्क की तरह काम करते हैं। यह तकनीक पारंपरिक भूकंप निगरानी प्रणालियों की पूरक है, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ आधिकारिक सिस्मोग्राफ नेटवर्क सीमित हैं। हालाँकि, यह सुविधा केवल एंड्रॉयड उपकरणों पर उपलब्ध है; आईफोन में ऐसी कोई अंतर्निहित प्रणाली नहीं है।
विज्ञान पत्रिका 'साइंस' में 2025 में प्रकाशित एक शोध के अनुसार, यह प्रणाली भूकंप की शुरुआत के कुछ ही सेकंड के भीतर अलर्ट जारी कर सकती है। वेनेजुएला की घटना ने इसकी व्यावहारिक उपयोगिता को रेखांकित किया है। अगला कदम ऐसी क्राउड-सोर्स्ड प्रणालियों का आधिकारिक आपदा प्रबंधन एजेंसियों के साथ एकीकरण है, ताकि चेतावनियों को और अधिक व्यापक और मानकीकृत बनाया जा सके। भारत जैसे भूकंप-संभावित दक्षिण एशियाई देशों में, जहाँ हिमालयी क्षेत्र में बड़े भूकंपों का खतरा रहता है, ऐसी तकनीक भविष्य में जान बचाने में सहायक हो सकती है, बशर्ते इसे स्थानीय आपात प्रणालियों से जोड़ा जाए।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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गूगल की भूकंप चेतावनी प्रणाली ने वेनेजुएला के लोगों को झटकों से कुछ सेकंड पहले सूचित किया, जो सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए पर्याप्त था। यह तकनीक फोन के एक्सेलेरोमीटर से शुरुआती भूकंपीय तरंगों का पता लगाकर जमीन की गति से भी तेज अलर्ट भेजती है। उपयोगकर्ताओं को सेटिंग में यह सुविधा चालू करने का तरीका बताया गया है।
गूगल की प्रणाली ने भूकंप की भविष्यवाणी नहीं की, बल्कि शुरू होने के कुछ क्षण बाद इसका पता लगाकर तेज झटकों से पहले चेतावनी भेज दी। मुख्य अंतर भविष्यवाणी और प्रारंभिक पहचान के बीच है, और बाद वाला एक संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण सुरक्षा अवसर देता है। इस घटना ने प्रौद्योगिकी के काम करने के तरीके के बारे में व्यापक उत्सुकता पैदा की।
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